Tourism Sector: बैंकों ने टूरिज्म और ट्रांसपोर्ट सेक्टर से बनाई दूरी, नए क्रेडिट कार्ड बंद किए, पुराने की लिमिट घटाई

Coronavirus Effect On Tourism Sector: क्रिसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक टूर और ट्रैवल सेक्टर का रेवेन्यू करीब 11 हजार करोड़ रुपए का है.

Coronavirus Effect On Tourism Sector: टूरिज्म और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर में काम करने वाले लोगों को बैंक नए क्रेडिट कार्ड तक इश्यू नहीं कर रहे हैं.

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    नई दिल्ली. कोरोनावायरस महामारी (Coronavirus Effect On Tourism Sector) की दूसरी लहर से देश फिर से उबरने लगा है. केंद्र सरकार ने भी हाल ही में आर्थिक राहत पैकेज का भी ऐलान कर दिया है. इसके बाद भी टूरिज्म और ट्रांसपोर्टेशन सेक्टर के हालात बदतर है. आलम यह है कि इन सेक्टर्स में काम करने वाले लोगों को बैंक नए क्रेडिट कार्ड तक इश्यू नहीं कर रहे हैं.
    हिमाचल प्रदेश के मनाली में टूर एंड ट्रेवल्स एजेंट्स का काम करने वाले दिलीप ठाकुर ने बताया कि उन्होंने बीते साल की शुरूआत में ही अपनी अलग फर्म शुरु की थी. इसी बीच लॉकडाउन लग गया. कारोबार तबाह गया. लिहाजा, इमरजेंसी में खरीदी के लिए बैंक में क्रेडिट कार्ड के लिए अप्लाई किया. एक साल बाद बैंक ने बताया कि उनकी प्रोफाइल निगेटिव हो चुकी है. इसलिए क्रेडिट कार्ड इश्यु नहीं किया जाएगा. मध्यप्रदेश के भोपाल में रघुवंशी ट्रेवल्स के संचालक महेंद्र सिंह रघुवंशी के साथ ही ऐसा ही हुआ है. उन्होंने कहा कि बीते साल से ही ट्रेवल्स का काम ठप है. रही सही कसर डीजल के प्राइज में हुई बढ़ोतरी ने पूरी कर दी है. रघुवंशी ने गाड़ी की किस्तें टाइम से भरी लेकिन कोरोनावायरस की चपेट में आने की वजह से पूरी बचत खत्म हो गई. बैंक में लोन के लिए अप्लाई किया तो आवेदन मंजूर नहीं हुआ.
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    सरकार ही ऐसा भेदभाव कर रही है तो भला बैंक पीछे क्यों रहेंगे?
    ट्रैवल एजेंट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (टीएएआई​) के उपाध्यक्ष जय भाटिया का कहना है कि उनसे जुड़े कई टूर ऑपरेटर्स ने बैंकों द्वारा क्रेडिट कार्ड की लिमिट घटाने और नए कार्ड जारी न करने की शिकायत की है. इस बारें में केंद्र सरकार को भी ज्ञापन सौंपा गया हे. ट्रेवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष प्रदीप लुल्ला कहते हैं कि सरकार ने आत्मनिर्भर अभियान के पहले पैकेज में ट्रेवल इंडस्ट्री के लिए कोई घोषणा नहीं की थी. अब दूसरे आर्थिक राहत पैकेज में 10700 टूरिस्ट गाइड को सरकारी गारंटी पर एक लाख रुपए और सिर्फ 904 टूरिस्ट एजेंसी को 10 लाख रुपए तक का कर्ज का ऐलान हुआ है. यूएफटीएए (Universal Federation of Travel Agent Association) में ही 3 हजार से ज्यादा टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसियां है. इन्हें छोड़ दिया है. इसके अलावा होटल, टूर पैकेज एजेंट्स, टैक्सी मालिक व ड्राइवर आदि को भी छोड़ दिया गया है. जब सरकार ही ऐसा भेदभाव कर रही है तो भला बैंक पीछे क्यों रहेंगे?
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    लोन देने से पहले संबंधित व्यक्ति की प्रोफाइल देखना एक सामान्य नियम

    वॉयस ऑफ बैंकिंग के फाउंडर अश्विनी राणा बताते हैं बैंकों में यह सामान्य नियम है कि लोन देने से पहले संबंधित व्यक्ति की प्राेफाइल देखी जाए. रिस्क ज्यादा है तो लोन का आवेदन नामंजूर कर दिया जाता है. वैसे, आजकल सिबिल देखकर लोन या क्रेडिट कार्ड की लिमिट तय की जाती है. लेकिन काेरोनाकाल में कई सेक्टर्स से बहुत ज्यादा असर पड़ा है. हो सकता है कि इसी वजह से बैंक इन सेक्टर्स के लोगों की प्राेफाइल की जांच ज्यादा बारीकी से कर रहे हों. यदि बैंक आवेदन रिजेक्ट कर रहे हैं तो ग्राहक के पास एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियों का ऑप्शन है. हालांकि इनकी ब्याज दर ज्यादा होती है.
    सिर्फ तीन कंपनियों के राजस्व में 2,300 करोड़ रुपए की गिरावट
    टूर और ट्रैवल ऑपरेटर भारत और विदेशों में हवाई/बस टिकटिंग, अवकाश और कॉर्पोरेट यात्रा दोनों के लिए होटल/पैकेज जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं. क्रिसिल की एक रिपोर्ट के मुताबिक इनका रेवेन्यू करीब 11 हजार करोड़ रुपए का है. जबकि, टीएएआई​ के जय भाटिया के मुताबिक छोटे-बड़े सभी एजेंट्स को शामिल किया जाए तो यह करीब 20 हजार करोड़ रुपए बैठता है. क्रिसिल के मुताबिक सिर्फ तीन कंपनियों ने पिछले वित्त वर्ष में राजस्व में 2,300 करोड़ रुपए की गिरावट हुई. यह कुल रेवेन्यू का महज 20% था. देशव्यापी लॉकडाउन और अन्य प्रतिबंधों के कारण यात्राओं की संख्या बेहद कम रह गई है.

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