कोरोना की मार! महामारी ने भारत में 23 करोड़ लोगों को गरीबी में धकेला, दूसरी लहर से हालात हुए बदतर

अजीम प्रेमजी यूनि‍वर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना संकट के कारण देश में गरीबी बढ़ी है.

अजीम प्रेमजी यूनि‍वर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना संकट के कारण देश में गरीबी बढ़ी है.

अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में उन लोगों को गरीब माना गया है, जिनकी दैनिक आमदनी (Daily Income) 375 रुपये से कम है. इसमें कहा गया है कि सबकी आमदनी घटी है, लेकिन महामारी का प्रकोप गरीबों पर सबसे ज्‍यादा पड़ा है.

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नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस संक्रमण ने साल 2020 के दौरान 23 करोड़ भारतीयों को गरीबी (Poverty in India) में धकेल दिया. इसकी सबसे ज्‍यादा मार युवाओं और महिलाओं पर पड़ी. वहीं, कोरोना वायरस की दूसरी लहर (2nd Wave of Coronavirus) ने संकट को पहले से कहीं ज्‍यादा बढ़ा दिया है. बेंगलुरु की अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च 2020 से भारत में लगाए गए सख्त लॉकडाउन ने करीब 10 करोड़ लोगों से रोजगार छीन (Unemployment) लिया. इनमें 15 फीसदी को साल खत्म होने तक काम नहीं मिला. महिलाओं पर इसका बहुत बुरा असर पड़ा. करीब 47 फीसदी महिलाएं पाबंदियां के खत्म होने के बाद भी रोजगार हासिल नहीं कर पाईं.

अप्रैल-मई 2020 में 20% परिवारों की आमदनी खत्‍म

यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में उन लोगों को गरीब माना गया है, जिनकी दैनिक आमदनी 375 रुपये से कम है. इसमें कहा गया है कि सबकी आमदनी घटी है, लेकिन महामारी का प्रकोप गरीबों पर सबसे ज्‍यादा पड़ा है. एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कोविड-19 के पहले से ही सुस्ती के दौर से गुजर रही थी, लेकिन महामारी ने इसे और धीमा कर दिया. एक अनुमान था कि पिछले साल 5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ जाते, लेकिन इसके बजाय 20 फीसदी परिवारों की आमदनी अप्रैल, मई 2020 में पूरी तरह खत्म हो गई. रिपोर्ट के एक लेखक अमित बासोले ने कहा कि दूसरी लहर हालात और खराब करने जा रही है. स्टडी में शामिल 20 फीसदी लोगों ने बताया कि छह महीने बाद भी उनके खाने-पीने में सुधार नहीं हुआ है.

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2020 में भुखमरी की कगार पर पहुंच गए लाखों लोग

पूरी दुनिया में साल 2020 के दौरान कम से कम 155 मिलियन लोगों को भूख का सामना करना पड़ा. इसमें करीब 1,33,000 लोग ऐसे थे, जो भुखमरी के चलते मौत के करीब पहुंच गए. इन्‍हें बचाने के लिए तत्काल भोजन की जरूरत थी. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि साल 2021 पिछले से ज्यादा भयानक होने वाला है. साल 2021 बेहद गंभीर और बदतर होगा. इसका खुलासा 16 संगठनों वाली संयुक्‍त राष्‍ट्र रिपोर्ट में किया गया है. यूएन रिपोर्ट 55 देशों में किए गए सर्वे पर आधारित है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल Covid-19 महामारी और लॉकडाउन के चलते दुनियाभर को आर्थिक संकट से गुजरना पड़ा. ऐसे में लाखों लोगों को बिना भोजन के ही रहना पड़ा.

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