रोजगार के मोर्चे पर झटका! मई 2021 में अब तक बेरोजगारी दर हुई 14.5%, पूरे महीने में रह सकती है 10 फीसदी से ऊपर

मई 2021 में देश में बेराजगारी दर 10 फीसदी से ऊपर रहने का अनुमान है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मई 2021 में देश में बेराजगारी दर 10 फीसदी से ऊपर रहने का अनुमान है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के डाटा के मुताबिक, अप्रैल 2021 के दौरान देश में बेरोजगारी दर (Unemployment Rate) 8 फीसदी पर थी. इसमें लॉकडाउन और सख्‍त कर्फ्यू (Lockdown/Curfew) के कारण बढ़ोतरी हो गई है. हालांकि, पिछले साल अप्रैल और मई में बेरोजगारी दर 23 फीसदी के ऊपर रही थी.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी के फैलने की रफ्तार को काबू करने के लिए लगाए गए लॉकडाउन और कर्फ्यू (Lockdown/Curfew) के कारण आर्थिक गतिविधियां फिर से करीब-करीब ठप हो गई हैं. इससे अप्रैल 2021 की शुरुआत से अब तक देश के लाखों लोगों की नौकरियां छिन (Job Loss) चुकी हैं, जबकि करोड़ों लोगों का रोजगार ठप हो गया है. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के मुताबिक, 16 मई 2021 को समाप्‍त हुए हफ्ते के दौरान देश में बेरोजगारी दर (Unemployment Rate of India) बढ़कर 14.5 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 8 फीसदी पर थी. हालांकि, अब भी ये पिछेल साल के अप्रैल और मई के मुकाबले 8 फीसदी से ज्‍यादा कम है. दरअसल, अप्रैल-मई 2020 के दौरान देश में बेरोजगारी दर 23 फीसदी से ऊपर थी.

मई 2021 में बेरोजगारी दर 10 फीसदी से ज्‍यादा रहने का अनुमान

सीएमआईई के मुताबिक, अप्रैल 2021 के दौरान लगाए गए लॉकडाउन और कर्फ्यू के कारण बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी होनी शुरू हो गई थी. इस दौरान उपभोक्‍ता वस्‍तुओं की खरीदारी में भी गिरावट दिखाई थी. वहीं, मई 2021 के शुरुआती हफ्तों के दौरान बेरोजगारी दर 14 फीसदी से ऊपर निकल गई. सीएमआईई का कहना है कि मई 2021 के दौरान बेरोजगारी दर 10 फीसदी से ज्यादा रहने का अनुमान है. बता दें कि वित्त वर्ष 2020-21 में औसत बेरोजगारी दर 8.8 फीसदी रही थी. सीएमआईई के मुताबिक, लगातार पांचवे हफ्ते कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स (CSI) में 1.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. मार्च 2021 के आखिरी हफ्ते से इंडेक्स में 9.1 फीसदी की गिरावट आई है. इस साल अप्रैल में कंज्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स 2019-20 के मुकाबले 49 फीसदी नीचे था.

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55 फीसदी से ज्‍यादा परिवारों की आय घटी, लोगों में बढ़ रही निराशा

कोरोना संकट के बीच नौकरी छिनने या रोजगार ठप होने से परिवार की आय (Households Income) में आई गिरावट के कारण लोगों ने खरीदारी के बजाय बचत को तरजीह दी. इससे कंज्यूमर सेंटिमेंट में गिरावट आई. वहीं, मौजूदा हालात के कारण लोगों में भविष्य को लेकर निराशा के हालात हैं. आंकड़ों के मुताबिक, करीब 55.5 फीसदी परिवारों ने आमदनी में कमी आने की बात बताई है. वहीं, 41.5 फीसदी परिवारों ने कहा है कि एक साल पहले के मुकाबले उनकी आय में कोई बदलाव नहीं हुआ है. सिर्फ 3.1 फीसदी परिवारों ने कहा कि उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हुई है. सितंबर 2020 से भारतीय अर्थव्यवस्था (India Economy) में आपूर्ति के मोर्चे पर सुधार आ रहा है.

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