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कोरोना की दूसरी लहर का सूरत के हीरा उद्योग पर कोई असर नहीं, निर्यात में हुई 37.78% की बढ़ोत्तरी

सूरत का हीरा उद्योग

गुजरात के सूरत शहर के हीरा उद्योग का दावा है कि कोरोना वायरस की पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर का डायमंड इंडस्ट्री पर फिलहाल कोई असर नहीं हुआ है.

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    गुजरात में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप खत्म होने को है. राज्य में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या दिन-प्रतिदिन कम होती जा रही है. इसी के साथ सरकार ने सोमवार से सभी सरकारी निजी कार्यालयों में 100% कर्मचारियों को काम करने की अनुमति दे दी है. इधर कोरोना वायरस की पहली लहर ने सूरत के हीरा उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाया था. लेकिन वही अगर दूसरी लहर की बात की जाए तो इस बार कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ा.

    कोरोना की पहली लहर के दौरान पूरे देश में पूर्ण लॉकडाउन लगा दिया गया था. जिसके चलते पूरी तरह से पॉलिश किए गए हीरे का उत्पादन पिछले साल मार्च से जुलाई तक रोक दिया गया था. हालांकि दूसरी लहर में 30 फीसदी कर्मचारियों की कमी के बावजूद हीरा उद्योग के विभिन्न क्षेत्रों में वृद्धि हुई है.

    अप्रैल 2020 की तुलना में अप्रैल 2021 में वृद्धि
    गुजरात के सूरत शहर के हीरा उद्योग का दावा है कि कोरोना वायरस की पहली लहर की तुलना में दूसरी लहर का डायमंड इंडस्ट्री पर फिलहाल कोई असर नहीं हुआ है. अप्रैल 2020 की तुलना में 2021 में कटे और पॉलिश किए गए हीरे के निर्यात में 37.78 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

    विभिन्न श्रेणियों के हीरों में वृद्धि
    लेब्रॉन डायमंड को बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. लेब्रोन डायमंड में 307 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है. इसी तरह, रंगीन जेम्स स्टोन में 8.46 फीसदी की वृद्धि देखी जा रही है. जड़े हुए सोने के गहनों में 33.88 फीसदी की तेजी देखी जा रही है. चांदी के आभूषणों में 250.70 फीसदी की तेजी देखी जा रही है. प्लेटिनम ज्वैलरी में 125.72 फीसदी की तेजी देखने को मिल रही है.

    सोने के आभूषणों में गिरावट
    हीरे के साथ साथ अन्य सभी प्रकार के आभूषण उद्योग में वृद्धि देखी जा रही है, हालांकि, सादे सोने के आभूषणों में गिरावट देखी जा रही है. इस सेक्टर में 59.38 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है.

    कर्मचारियों की संख्या में 30 फीसदी की कमी
    दिनेश नवादिया ने कहा कि कोरोना की पहली लहर में ज्वैलर्स समेत मजदूरों की भी हालत खराब थी, इसलिए दूसरी लहर में मजदूर अपने गृह राज्य चले गए. इस हीरा उद्योग में लगे कर्मचारियों की संख्या में 30 फीसदी की कमी है. बता दें कि जूनागढ़, अमरेली और राजकोट में हीरा निर्माण केंद्र हैं जो चक्रवात से प्रभावित हुए हैं. चक्रवात के कारण वहां की फैक्ट्रियां बंद कर दी गई हैं. साथ ही यहां काम करने वाले कारीगर अपने क्षेत्र वापस जा रहे हैं.
    Published by:Anita
    First published: