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कपास के भाव में तूफानी तेजी, MCX पर 50,000 के ऊपर, इस महीने 14 फीसदी चढ़ चुके हैं दाम

अप्रैल में कॉटन के रेट (Cotton Rate)  में 6 फीसदी का उछाल देखने को मिला था.

अप्रैल में कॉटन के रेट (Cotton Rate) में 6 फीसदी का उछाल देखने को मिला था.

अप्रैल में कॉटन के रेट (Cotton Rate) में 6 फीसदी का उछाल देखने को मिला, जबकि मई में 8 फीसदी, जून में 4 फीसदी का उछाल दे ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

अमेरिका के कृषि विभाग ने इस बार अमेरिका में कॉटन उत्‍पादन के अनुमान को घटा दिया है.
अमेरिका में सूखा पड़ने से उत्पादन गिरने की आशंका बढ़ी है, जिससे बाजार पर असर पड़ा है.
कॉटन की बढ़ती कीमतों के कारण मिलों की मांग है कि कॉटन को MCX से हटाया जाए.

नई दिल्‍ली. दुनियाभर में कॉटन उत्‍पादन (Cotton Production) गिरने की आशंकाओं से इस बार कपास के भाव (Cotton Rate) आसमान छू रहे हैं. मल्‍टी कमोडिटी एक्‍सचेंज (MCX) पर कपास के भाव लगातार 50,000 रुपये से ऊपर बने हुए हैं. अगस्‍त 2022 में अब तक कपास के भाव 14 फीसदी उछल चुके हैं. अमेरिका के कृषि विभाग (USDA) द्वारा इस बार अमेरिका में कॉटन उत्‍पादन (US Cotton Production 2022) के अनुमान को 12.01 करोड़ बेल्‍स से घटाकर 11.70 करोड़ बेल्‍स कर दिए जाने के बाद से कॉटन की वैश्विक कीमतों में और उछाल आने की संभावना है.

मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में सूखा पड़ने से उत्पादन गिरने की आशंका बढ़ी है. टेक्सास में 29 लाख बेल्स कपास का उत्‍पादन होने की उम्‍मीद है. 2021 में टेक्सास में 77 लाख बेल्स कपास पैदा हुई थी. अगर भारत की बात करें तो देश में भी कैरी स्‍टॉक में कमी आई है. यही नहीं कई मॉनसून असंतुलन से भी नई फसल का उत्‍पादन गिरने की संभावना व्‍यक्‍त की जा रही है.

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गुलाबी सुंडी का असर
हरियाणा और पंजाब में पिछली बार की तरह इस बार भी गुलाबी सुंडी का कहर कपास की फसल पर देखा जा रहा है. हरियाणा के कई जिले इससे प्रभावित हैं. वहीं, दूसरी तरफ भारी बारिश से गुजरात, महाराष्ट्र में कॉटन की फसल को नुकसान हुआ है. वहीं, उत्‍तर भारत में कम कुछ इलाकों में कम बारिश से कपास की फसल की कम बुआई हुई और समय पर बारिश ने होने से खड़ी फसल को नुकसान हुआ है. इन सब कारणों से भी घरेलू कपास उत्‍पादन में कमी आने की आशंका से भाव को सपोर्ट मिल रहा है.

चढ़ रही है कीमत
कॉटन की चाल पर नजर डालें तो अप्रैल में कॉटन में 6 फीसदी का उछाल देखने को मिला, जबकि मई में 8 फीसदी, जून में 4 फीसदी का उछाल देखने को मिला था. हालांकि, जुलाई में कॉटन में 14 फीसदी की गिरावट देखने को मिली, लेकिन अगस्त में अब तक इसमें 14 फीसदी की तेजी आई है. कॉटन की ऊंची कीमतों से इंडस्ट्री परेशान है. स्पिनिंग मिल ऊंची कीमत होने के बावजूद कॉटन खरीदने पर मजबूर है. कॉटन की बढ़ती कीमतों के कारण मिलो की मांग है कि वह कॉटन को MCX से हटाया जाए.

Tags: Agriculture Market, Business news, Business news in hindi, India agriculture, Multi Commodity Exchange, Stock market

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