बस और टैक्सी सेक्टर में 20 लाख लोगों ने गंवाई नौकरी, सरकार से नहीं मिली मदद तो बदतर होंगे हालात

बस और टैक्सी सेक्टर में 20 लाख लोगों ने गंवाई नौकरी, सरकार से नहीं मिली मदद तो बदतर होंगे हालात
लॉकडाउन की वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेक्टर में संकट

प्राइवेट बस व टैक्सी ऑपरेटर्स के एक समूह (BOCI) का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से करीब 20 लाख कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी है. इन ऑपरेटर्स ने सरकार से टैक्स और लोन पर ब्याज जैसे राहत की मांग की है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस के मद्देनजर देशभर में लंबे समय तक लॉकडाउन की वजह से प्राइवेट बस और टूरिस्ट टैक्सी सर्विस में काम करने वाले करीब 20 लाख लोगों की नौकरी जा चुकी है. बस एंड कार ऑपरेटर्स कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडिया (BOCI) ने यह बात कही है. BOCI का कहना है कि वह 20 हजार ऑपरेटर्स का प्रतिनिधित्व करता है जोकि 15 लाख बस व मैक्सी-कैब्स और 11 लाख टूरिस्ट टैक्सी ऑपरेट करते हैं. BOCI ने दावा किया है कि इसमें करीब 1 करोड़ लोग सीधे तौर पर नौकरी करते हैं. अब इस कॉन्फेडरेशन ने सरकार से मांग की है कि टैक्स और लोन पर ब्याज की छूट मिले क्योंकि इनमें से अधिकतर बंद होने की कगार पर खड़े हैं.

कर्मचारियों की सैलरी देने में समस्या
BOCI के प्रेसीडेंट प्रसन्ना पटवर्धन ने कहा, 'लॉकडाउन के दौरान हमारे 90 फीसदी वाहन रोड पर नहीं थे. कंपनियों में कॉन्ट्रैक्ट के तहत बेहद कम संख्या में बस ऑपरेट कर रहे थे, जबकि कुछ प्रवासी मजदूरों को ट्रांसपोर्ट करने में लगे थे. अब​ बिजनेस नहीं होने से मेंबर्स को अपने कर्मचारियों की सैलरी देने के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है.' उन्होंने कहा कि अब तक करीब 15 से 20 लाख की नौकरी जा चुकी है. बाकी बचे कर्मचारियों की नौकरी पर भी खतरा है. सरकार को प्राइवेट बस और कैब ऑपरेटर्स की मदद करनी चाहिए.

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सरकार से इन राहत की मांग


पटवर्धन ने कहा, सितंबर के बाद से जब RBI का लोन मोरेटोरियम पीरियड खत्म हो जाएगा और इसके बाद ऑपरेटर्स लोन की EMI जमा करने में असमर्थ होंगे, तभी सबसे बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है. सरकार से मदद की उम्मीद करते हुए उन्होंने कहा कि मोटर व्हीकल टैक्स (Motor Vehicle Tax) नहीं वूसला जाए, डीज़ल पर छूट दी जाए और एक शहर से दूसरे शहर जाने के लिए टोल टैक्स नहीं वसूला जाए. लॉकडाउन की अवधि की भरपाई करते हुए हमारी इंश्योरेंस पॉलिसी (Vehicle Insurance Policy) को कम से कम 3 महीने के लिए बढ़ाया जाए. इंश्योरेंस काफी खर्चीला काम है. बसों के लिए तो यह 50 हजार रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक का होता है.

6 महीने तक बैंक न वसूलें ब्याज
वाहन लोन पर ब्याज को लेकर भी उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि बैंकों को कम से कम 3 से 6 महीने के लिए ब्याज से राहत देनी चाहिए. मोरेटोरियम पीरियड के दौरान उन्हें कोई ब्याज नहीं वसूलना चाहिए. सितंबर से ईएमआई तो शुरू हो जाएगी लेकिन, बिजनेस अचानक से बेहतर स्थिति में नहीं पहुंच पायेगा.

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ट्रांसपोर्ट कंपनियों की बढ़ीं वित्तीय मुश्किलें
BOCI के मुताबिक, कई योजनाओं की मदद से केंद्र सरकार ने खस्ताहाल अर्थव्यवस्था को बूस्ट करने के लिए कई कदम उठाए हैं. लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेक्टर (Public Transport Sector) के लिए सरकार ने कोई कदम नहीं उठाया है. देशव्यापी लॉकडाउन ने अधिकतर पैसेंजर ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए वित्तीय मुश्किलें खड़ी कर दी है. इसके अलावा, सोशल डिस्टेंसिंग के नियम व अन्य गाइडलाइंस की वजह से ऑपरेटर्स का बिजनेस प्रभावित होगा.
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