COVID-19 ने बढ़ाया घर खरीदारों का इंतजार, इस साल 4.66 लाख घरों की डिलिवरी में होगी देरी

4.66 लाख घरों की डिलिवरी में 2020 में हो सकती है देरी
4.66 लाख घरों की डिलिवरी में 2020 में हो सकती है देरी

दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR), मुंबई (Mumbai) और बेंगलुरू (Bangaluru) में करीब एक-एक लाख से अधिक मकानों की डिलविरी 2020 में देना तय था. जबकि पुणे में 68,800, कोलकाता में 33,850, हैदराबाद में 30,500 और चेन्नई में 24,650 महानों की डिलिवरी 2020 में करनी थी.

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कोलकाता. कोविड-19 (COVID-19) के चलते 2020 में करीब 4.66 लाख आवासों पर समय से डिलिवरी में देरी हो सकती है. अधिकतर राज्यों ने परियोजनाओं को पूरा करने की समयसीमा छह महीने तक बढ़ा दी है. वैश्विक संपत्ति सलाहकार कंपनी एनारॉक ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी. दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR), मुंबई (Mumbai) और बेंगलुरू (Bangaluru) में करीब एक-एक लाख से अधिक मकानों की डिलविरी 2020 में देना तय था. जबकि पुणे में 68,800, कोलकाता में 33,850, हैदराबाद में 30,500 और चेन्नई में 24,650 महानों की डिलिवरी 2020 में करनी थी.

एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि घर खरीदारों को नयी वास्तविकता के साथ समायोजन करना पड़ेगा. वर्ष 2020 में करीब 4.66 लाख मकानों की डिलिवरी की जानी थी जिनमें अब देरी होने की संभावना है. पिछले कुछ महीनों में लॉकडाउन के चलते कोई भी निर्माण कार्य नहीं हुआ है. ऐसे में इन परियोजनाओं के पूरा होने की अंतिम समयसीमा को आगे बढ़ा दिया गया है.

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संपत्ति बाजार के नियामक रेरा (हर राज्य में अलग) ने अधिकतर राज्यों में समयसीमा को छह महीने आगे खिसका दिया है. पुरी ने कहा कि अधिकतर बढ़े शहरों में श्रमिकों की कमी से निपटने के लिए सरकार को हस्तक्षेप करने की जरूरत है.
रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की डेडलाइन 6 महीने के लिए बढ़ी
बता दें कि केंद्र सरकार ने रेरो के अंतर्गत आने वाले प्रोजेक्ट्स (RERA Registered Projects) की रजिस्ट्रेशन और पूरा करने की अंतिम तारीख को 6 महीने के लिए बढ़ा दी है. यह 25 मार्च या उसके बाद एक्सायर होने वाले प्रोजेक्ट्स पर लागू होगा. इसके लिए किसी को भी व्यक्तिगत तौर पर ए​प्लीकेशन नहीं देना होगा.



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इसके अलावा आवसीय एवं शहरी विकास मंत्रालय सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों और नियामकीय प्राधिकरण (Regulatory Authorities) को सुझाव देगी कि कोविड-19 को देखते हुए रेरा के अंतर्गत आने वाले प्रोजेक्ट्स को ‘Force Majeure’ के तौर मान्यता दें. इसके लिए मंत्रालय स्वत: ही फ्रेश 'प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट' जारी करेगा जिसमें रिवाइज्ड टाइमलाइंस होंगी.
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