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2008 के संकट से भी बुरी होगी कोरोना के चलते आने वाली मंदी, पूरी दुनिया पर खतरा-IMF

2008 के संकट से भी बुरी होगी कोरोना के चलते आने वाली मंदी, पूरी दुनिया पर खतरा-IMF

पूरी दुनिया पर गहरे आर्थिक मंदी का खतरा

पूरी दुनिया पर गहरे आर्थिक मंदी का खतरा

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का कहना है कि COVID-19 की वजह से पूरी दुनिया पर गहरी मंदी (Economic Recession) का संकट मंडरा रहा है. इससे गरीब और विकासशील देशों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ने वाला है. विश्व​ बैंक भी इस बात पर विशेष ध्यान दे रहा है.

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    नई दिल्ली. अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने शुक्रवार को कहा कि कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) ने दुनियाभर की अर्थव्यवस्था के लिए संकट की स्थिति खड़ी कर दी है. IMF ने कहा कि पूरी दुनिया के लिए यह स्थिति कारीब एक दशह पहले साल 2008 में वैश्विक वित्तीय संकट (2008 Financial Crisis) से भी बुरी हो सकती है. IMF ने इसे 'मानवता के लिय अंधकारमय समय' कहा है.

    विकासशील देशों को सपोर्ट की जरूरत
    IMF की प्रबंध निदेश, क्रिस्टेलिकना जॉर्जिवा ने कहा एक न्यूज कॉन्फ्रेंस में एडवांस इकोनॉमी को आगे आकर इमर्जिंग मार्केट्स को सपोर्ट करने का कहा है. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से विकासशील देश (Developing Nations) अपनी अर्थव्यवस्था की चुनौतियों के साथ-साथ इस महामारी से भी निपट सकेंगे.



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    1 दशक पहले के वित्तीय संकट से कहीं गंभीर चुनौती
    उन्होंने कहा, 'यह संकट पहले के किसी अन्य संकट की तरह नहीं है.' करीब 400 रिपोर्टर्स को एक वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उन्होंने कहा कि हमने पहले भी वैश्विक अर्थव्यवस्था के संकट को देखा है. अब हम मंदी के दौर में हैं. यह स्थिति साल 2008-09 की वित्तीय संकट से भी बुरी है.

    विश्व बैंकों को भी मंदी की आशंका
    इस दौरान विश्व बैंक के प्रेसिडेंट डेविड मालपास ने भी इस बात से हामी भरते हुए अपने एक लिंक्डइन पोस्ट में कहा, 'कोविड-19 महामारी से स्वास्थ्य समस्याओं के आगे हम एक वैश्विक मंदी का दौर देखते हैं.'

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    गौरतलब है कि शुक्रवार शाम तक प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पूरी दुनिया में अब तक 10 लाख से अधिक लोग कोरोना वायरस के संक्रमित हो चुके हैं. वैश्विक स्तर पर इससे अब तक 53,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.

    गरीब देशों से एक साल तक कर्ज न वसूलने की कवायत
    जॉर्जिवा ने कहा कि विश्व बैंक और विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर आईएमएफ इस बात पर विचार कर रहा है कि चीन समेत कुछ बड़े अर्थव्यवस्था वाले देश छोटे देशों से कम से कम एक साल के लिए कर्ज की वसूली न करें. उन्होंने कहा, 'इस मामले पर चीन का रुख साकारात्मक है और आगामी सप्ताह में चीन विशेष प्रस्तावों पर काम करेगा.' उन्होंने बताया कि अगले दो सप्ताह के अंदर विश्व बैंक और जी20 समूह के बीच आनलाइन बैठक होगी.

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    Tags: Business news in hindi, Coronavirus, Indian economy, International Monetary Fund, World bank

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