Covid-19 की तरह ब्लैक फंगस भी सभी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में होगा कवर, जानिए क्यों और कैसे

कोविड 19 ने हेल्थ इंश्योरेंस का महत्व और डिमांड दोनों बढ़ा दी है.

कुछ मरीज कोविड-19 के इलाज के दौरान या उसके बाद म्यूकोर्मिकोसिस (ब्लैक या व्हाइट फंगस) से पीड़ित हो रहे हैं। अच्छी बात यह है कि बीमा कंपनियों ने स्वीकार किया है कि म्यूकोर्मिकोसिस का उपचार भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के कवरेज का हिस्सा है और मरीज इसका दावा कर सकते हैं।

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    Covid-19 (कोविड-19) महामारी के दौर में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की अहमियत बढ़ गई है। इस बीमारी के इलाज का बिल लाखों रुपए में आता है। यदि मरीज ने हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले रखी हो तो इसका भुगतान बीमा कंपनी करती है। लेकिन, अब एक दूसरी समस्या देखी जा रही है।

    कुछ मरीज कोविड-19 के इलाज के दौरान या उसके बाद म्यूकोर्मिकोसिस (ब्लैक या व्हाइट फंगस) से पीड़ित हो रहे हैं। अच्छी बात यह है कि बीमा कंपनियों ने स्वीकार किया है कि म्यूकोर्मिकोसिस का उपचार भी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के कवरेज का हिस्सा है और मरीज इसका दावा कर सकते हैं।

    म्यूकोर्मिकोसिस सभी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कवर

    संजीव बजाज (ज्वाइंट चेयरमैन एवं एमडी, बजाज कैपिटल) बताते हैं कि, म्यूकोर्मिकोसिस गंभीर, लेकिन दुर्लभ फंगल संक्रमण है। इसे आम तौर पर ब्लैक फंगस नाम से जाना जाता है। अब व्हाइट, येलो और यहां तक कि ग्रीन फंगस के मामले भी सामने आने लगे हैं। से सभी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कवर हैं। एक बात जरूर है इन बीमारियों के इलाज से संबंधित दावों का निपटारा आईसीएमआर, एम्स और स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से समय-समय पर जारी दिशानिर्देशों के अनुसार किया जा सकता है।
    इंश्योरेंस कवर को लेकर स्थिति स्पष्ट
    1. हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में कुछ परमानेंट एक्सक्लूजन (ऐसी बीमारियां, जो कवर नहीं हैं) होते हैं और कुछ बीमारियों के बीमा कवर से पहले वेटिंग पीरियड के प्रावधान होते हैं। बीमा कंपनियां आम तौर पर प्री-एग्जिस्टिंग यानी पहले से मौजूद बीमारियां 48 महीनों के बाद कवर करती हैं।

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    2. ब्लैक फंगस के मामले में हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों के दस्तावेज में कोई परमानेंट एक्सक्लूजन या वेटिंग पीरियड का जिक्र नहीं है। इसका मतलब है कि इसके इलाज का खर्च भी बीमा कंपनी उठाएगी, जैसे अन्य बीमारियों के मामले में होता है।

    3. ब्लैक, व्हाइट, येलो और ग्रीन फंगस, सभी को सरकार ने महामारी की सूची में डाल रखा है। इसका सीधा मतलब है कि ये सभी कोविड-19 की तरह सभी बीमा कंपनियों की तमाम हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत कवर हैं।

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    4. कुछ बीमा कंपनियां ब्लैक फंगस के केवल सामान्य इलाज को कवर कर सकती हैं। संभव है कि सर्जरी के लिए दो साल का वेटिंग पीरियड हो। ऐसे में मुश्किल स्थिति पैदा हो सकती है। लेकिन, हमें उम्मीद है कि बीमा कंपनियां इस तरह की मुश्किलें पैदा नहीं करेंगी।

    कुछ विकल्प भी मौजूद
    कोविड संक्रमण होने पर अस्पताल का खर्च कवर करने के लिए कोरोना कवच जैसे कुछ खास हेल्थ इंश्योरेंस प्लान भी उपलब्ध हैं। ऐसी पॉलिसी घर में कोरोना के इलाज का खर्च भी कवर करती है। यदि किसी परिवार के पास 20 लाख रुपए से कम का हेल्थ कवर है, तो उसके लिए यह अच्छा विकल्प साबित हो सकता है।

    अभी पॉलिसी ली तो एक माह का वेटिंग पीरियड
    यदि आपने अब तक कोई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं ली है और कोविड-19 या ब्लैक फंगस जैसी बीमारियों के इलाज का खर्च कवर करने के लिए अब ऐसी पॉलिसी लेना चाहते हैं तो आपको 30 दिन का वेटिंग पीरियड ध्यान में रखना होगा।

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