कोरोना का नहीं हुआ कृषि पर असर! फसलों की बुवाई में हुई रिकॉर्ड प्रगति, 59 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबा

कोरोना का नहीं हुआ कृषि पर असर! फसलों की बुवाई में हुई रिकॉर्ड प्रगति, 59 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबा
कोरोना के बावजूद इस साल बुवाई की रफ्तार पिछले साल से रिकॉर्ड तेज रही

पिछले साल की अपेक्षा इस साल अभी तक खरीफ की फसलों की रिकॉर्ड बुवाई हुई है. तिलहन के बुवाई क्षेत्र में भी 10% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई. सरकार ने कहा है कि कोविड-19 महामारी का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर नहीं पड़ा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 12, 2020, 11:55 AM IST
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इस साल अच्छे मानसून का असर फसलों की बुवाई पर दिख रहा है. यही कारण है कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष खरीफ फसलों की बुवाई 59 लाख हेक्टेयर से ज्यादा बढ़ा है. मौसम विभाग के अनुसार इस साल 10 सितंबर तक देश में चालू मानसून सत्र में 828.6 मिमी बारिश हुई जबकि इस समय तक देश में लगभग 777.3 मिमी बारिश होती है. बारिश में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. केंद्रीय कृषि एवं कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष की इसी अवधि में 1045.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में इस बार 1104.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है जो अपने आप में रिकॉर्ड है, जबकि देश के कई हिस्सों में धान की बुवाई अभी चल ही रही है.

केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, 10.09.2020 तक, देश के 123 जलाशयों में उपलब्ध जल संग्रहण पिछले वर्ष की इसी अवधि के जल संग्रहण का 102 प्रतिशत और पिछले दस वर्षों के औसत संग्रहण का 118 प्रतिशत है. बता दें कि दलहन, मोटे अनाज और तिलहन फसलों की बुवाई लगभग हो चुकी है. खरीफ सीजन के लिए बुवाई के अंतिम आंकड़े 1 अक्टूबर 2020 में आने की उम्मीद है.

इस तरह रहे बुवाई के आंकड़ें
चावल: चावल की बुवाई पिछले वर्ष की इसी अवधि के दौरान 373.87 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में इस बार 402.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है अर्थात बुवाई क्षेत्र में 7.59 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
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दलहन: पिछले वर्ष के 131.76 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल के मुकाबले इस बार 137.87 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की खेती हुई है, अर्थात 4.64 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

मोटे अनाज: पिछले वर्ष के 177.43 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के मुकाबले इस बार 179.70 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मोटे अनाज की खेती हुई अर्थात 1.28 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

तिलहन: पिछले साल के 176.91 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में इस बार 195.99 लाख हेक्टेयर क्षेत्र तिलहन की बुवाई हुई अर्थात तिलहन बुवाई क्षेत्र में 10.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

गन्ना: पिछले साल के 51.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के मुकाबले इस बार 52.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बुवाई हुई यानी बुवाई क्षेत्र में 1.37 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

कपास: पिछले वर्ष के 126.61 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के मुकाबले इस बार 129.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की गई अर्थात कपास बुवाई क्षेत्र में 2.12 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

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जूट और मेस्टा: पिछले साल के 6.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की तुलना में इस बार 6.97 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जूट और मेस्टा की बुवाई की गई है यानी 1.68 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

कोविड-19 महामारी का खरीफ फसलों के अंतर्गत बुवाई क्षेत्र में बढ़ोतरी पर आज तक कोई प्रभाव नहीं है. कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और राज्य सरकारों ने मिशन कार्यक्रमों और फ्लैगशिप योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए सभी प्रयास किए हैं. भारत सरकार द्वारा समय पर बीज, कीटनाशक, उर्वरक, मशीनरी और ऋण जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने की वजह से कोविड-19 महामारी की लॉकडाउन स्थितियों में भी बुवाई क्षेत्र में बढ़ोतरी संभव हो पाया है. इसके लिए समय पर खेती के काम करने, प्रौद्योगिकियों को अपनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को भी श्रेय जाता है.
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