कोरोना वायरस राहत पैकेज: मोदी सरकार ने 2 साल पहले ही लिख दी थी कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार की स्क्रिप्ट!

कोरोना वायरस राहत पैकेज: मोदी सरकार ने 2 साल पहले ही लिख दी थी कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार की स्क्रिप्ट!
मोदी सरकार ने 15 लाख करोड़ रुपये के कृषि कर्ज का लक्ष्य रखा है

न्यूज18 हिंदी से बातचीत में डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी के चेयरमैन डॉ. अशोक दलवई ने कहा, DFI और नीति आयोग ने सरकार से की थी EC Act और एपीएमसी में बदलाव की सिफारिश

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नई दिल्ली. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट और एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (APMC) एकट में संशोधन का एलान भले ही कोरोना काल में विशेष आर्थिक पैकेज के बहाने हुआ है, लेकिन सरकार ने इनमें बदलाव की स्क्रिप्ट काफी पहले ही लिख ली थी. मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद अप्रैल 2016 में डबलिंग फार्मर्स इनकम (DFI) कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी ने सरकार को इसमें बदलाव की वकालत की थी ताकि किसानों की आय बढ़ सके. कमेटी ने सितंबर 2018 में सरकार को रिपोर्ट सौंप दी थी.

इसके बाद जून 2019 में नीति आयोग ने कंज्यूमर अफेयर्स मंत्रालय (Ministry of Consumer) से एसेंशियल कमोडिटी एक्ट में ढील देने की मांग उठाई. नीति आयोग (NITI Aayog) ने कहा था कि कड़े कानून के चलते ट्रेडर्स स्टॉक नहीं रखना चाहते हैं. ऐसे में किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल पा रहा. अगर इस कानून में ढील दी जाती है तो किसानों की आमदनी बढ़ेगी.

न्यूज18 हिंदी से बातचीत में फार्मर्स इनकम डबलिंग कमेटी के चेयरमैन डॉ. अशोक दलवई ने कहा, किसानों को मार्केट मिल जाए और उचित मूल्य मिले, प्रोडक्टिविटी बढ़ जाए और उत्पादन लागत कम हो तो उनकी इनकम डबल हो सकती है. इसी दिशा में सरकार काम कर रही है. इतने पुराने कानूनों में बदलाव की पहल इसी कड़ी का हिस्सा है. वेयरहाउस बढ़ाने के लिए बड़ा निवेश करने का एलान हुआ है.



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डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी के चेयरमैन डॉ. अशोक दलवई

दलवई ने बताया कि डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी और नीति आयोग लगातार सरकार को बता रहे थे कि किसानों के हित सुरक्षित करने के लिए इस कानून में बदलाव होना चाहिए. सरकार ने इसे मान लिया है. अब किसान अपने मन मुताबिक अपनी फसल बेच सकेंगे. सारे बैरियर हटाकर उन्हें अपनी उपज कहीं भी बेचने के लिए स्वतंत्र कर दिया गया है.

दलवई ने कहा, किसानों की इनकम को बढ़ाना है तो उनकी पैदावार का सही मूल्य देना होगा. इसके लिए उन्हें अपनी उपज कहीं भी बेचने की आजादी देने से किसी का एकाधिकार नहीं होगा. मार्केट में कंप्टीशन होगा और सही दाम मिलेगा. अभी तक किसानों की उपज पर एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी (एपीएमसी) का एकाधिकार था.

स्पर्धा सरकारी-निजी क्षेत्र के बीच भी होगी

सरकार ने इस बदलाव के साथ ही प्राइवेट मंडी का रास्ता भी खोल दिया है. इसलिए इस सेक्टर में निजी क्षेत्र का निवेश बढ़ेगा. अब किसानों की उपज खरीदने के लिए स्पर्धा सिर्फ मार्केट कमेटी और राज्यों के बीच ही नहीं बल्कि इसके बाहर निजी और सरकारी क्षेत्र के बीच भी होगी. कोई सरकार ऐसा करने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी. उम्मीद है अब कृषि क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव दिखेंगे.

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