डायमंड सिटी सूरत से अपने घर को लौट रहे हैं लाखों मजदूर, ये है वजह!

डायमंड सिटी सूरत से अपने घर को लौट रहे हैं लाखों मजदूर, ये है वजह!
डायमंड सिटी सूरत से क्यों अपने घर को लौट रहे हैं मजदूर?

कोविड-19 (COVID-19) के मामले बढ़ने के चलते सूरत में डायमंड यूनिट्स बंद होने की वजह से रोजाना हजारों मजदूर अपने घर को लौट रहे हैं.

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नई दिल्ली. डायमंड सिटी (Diamnod City) के नाम से मशहूर सिटी सूरत से मजदूरों का पलायन हो रहा है. दरअसल, कोविड-19 (COVID-19) के मामले बढ़ने के चलते सूरत में डायमंड यूनिट्स बंद हैं. इन डायमंड यूनिट्स में लाखों की संख्या में मजदूर हीरा तराशने का काम करते थे. अब यूनिट्स बंद होने की वजह से वो अपने घर को लौटने को मजबूर हैं. सूरत डायमंड वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष जयसुख गजेरा का कहना है कि उन्हें आशंका है कि शहर छोड़ने वाले 70 फीसदी कामगार शायद ही वापस आएंगे.

6 लाख से ज्यादा लोग करते है डायमंड इंडस्ट्री में काम
सूरत में हीरा तराशने वाली 9000 से ज्यादा डायमंड यूनिट्स में 6 लाख से ज्यादा लोग काम करते हैं. ये यूनिट्स मार्च के अंत से जून के पहले सप्ताह तक बंद रहीं. लेकिन, जून के दूसरे सप्ताह में व्यावसायिक गतिविधियां फिर से शुरू होने के बाद से 600 से ज्यादा मजदूर और उसके परिवार वाले कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित हो गए. इसलिए सूरत नगर निगम ने इस हफ्ते की शुरुआत में डायमंट यूनिट्स को 13 जुलाई तक बंद रखने का आदेश दिया था.

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इंडिया टीवी डॉट इन की रिपोर्ट के मुताबिक, सूरत लग्जरी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश अंधान का दावा है कि सूरत से रोजाना औसतन 300 बसें 6 हजार डायमंड यूनिट्स में काम करने वाले मजदूरों को लेकर सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के लिए रवाना हो रही है, जहां से ये मजदूर काम की तलाश में यहां आए थे. उन्होंने कहा, रोजाना 6000 कर्मचारी लग्जरी बसों और करीब 4000 रोजाना कारों, ट्रकों और अन्य गाड़ियाों से अपने घर को लौट रहे हैं. इनमें से कई अपने सामान के साथ जा रहे हैं. बस ऑपरेटर उनसे उनके सामान का पैसा नहीं ले रहे हैं और उनके सामान बस की छत पर रख रहे हैं.



अंधान ने कहा कि वे दिवाली की छुट्टियों के दौरान शहर छोड़ने वाले लोगों की तुलना में अधिक भीड़ देखी जा रही है. हीरा तराशने वाली यूनिट्स अब बंद हो गई हैं, ऐसे में जो मजदूर किराये के मकानों में रह रहे थे, वे अपनी आजीविका बनाये रखने में असमर्थ हैं. ये कारीगर लगभग चार महीनों से बेरोजगार हैं और उम्मीद है कि निकट भविष्य में स्थिति में सुधार होगा. लगभग 1,500 परिवार अपने सामान के साथ हर दिन मिनी ट्रक में अपने घर के लिये रवाना हो रहे हैं.
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