Exclusive: अस्पतालों और बीमा कंपनियों में तनातनी! 1,71,000 क्लेम फंसे, कोरोना पीड़ितों के परिजन परेशान

 कैशलेस सेटलमेंट विकल्प अपनाने पर इंश्योरर और हॉस्पिटल के बीच सीधे क्लेम सेटल होता

कैशलेस सेटलमेंट विकल्प अपनाने पर इंश्योरर और हॉस्पिटल के बीच सीधे क्लेम सेटल होता

कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच मेडिकल खर्च के करीब 1,71,000 कोविड क्लेम सेटलमेंट के लिए पेंडिंग है जिसने संबंधित कुल धनराशि 6649.53 करोड़ रुपये है. 28 अप्रैल तक पूरे देश भर में 15,568 करोड़ रुपये के 11 लाख कोविड हेल्थ क्लेम इंश्योरर के समक्ष फाइल किए गए हैं.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Covid 19)की इस दूसरी लहर में जहां अस्पताल पटे हुए है मरीजों से तो वहीं ईलाज के लिए मेडिकल क्लेम (Medical claim)परिजनों के लिए भी दिक्कत की वजह बनी हुई है. जिसकी वजह है कि क्लेम सेटलमेंट (claim settlement )ना होना. ऐसे हजार -दस हजार मामले नहीं है बल्कि एक लाख 71 हजार मामले सामने आए है जहां क्लेम फंसा हुआ है. कुछ ऐसा ही हुआ दिल्ली के निकुंज तिवारी के साथ जो कि एक निजी कंपनी में एडवरटाइजिंग एग्जिक्यूटिव है. बकौल निकुंज उनके पिता जी कोविड-19 की वजह से बीमार थे और उनको जल्द से जल्द हॉस्पिटल में भर्ती करना था. निकुंज के पास उस समय दो ही विकल्प थे. पहला ये कि वो या तो खुद सारा मेडिकल खर्च उठाएं और बाद में इंश्योरर से रीइम्बर्समेंट क्लेम करें। दूसरा विकल्प ये था कि वो कैशलेस सेटलमेंट के लिए क्लेम करें। बाद में रीइम्बर्समेंट का फायदा ये था कि उनके पिता तुरंत भर्ती हो सकते थे और उनको बेड मिल सकता था।



कैशलेस सेटलमेंट विकल्प अपनाने पर इंश्योरर और हॉस्पिटल के बीच सीधे क्लेम सेटल होता. इस पूरी प्रक्रिया में इंश्योरर से मंजूरी मिलने में 2 घंटे से ज्यादा समय लगता और इस स्थिति में कोई गारंटी भी नहीं थी कि 2 घंटे के बाद उनको खाली बेड मिल सकता था. जिसको ध्यान में रखते हुए तिवारी ने रीइम्बर्समेंट का विकल्प अपनाया. हालांकि यह विकल्प भी उनके लिए कई मायनों में अच्छा साबित नहीं हुआ.



ऐसे चार्ज कर रहे है जो इंश्योरेंस कंपनी नहीं कर रही 



तिवारी का कहना है कि मेरे पिता जी ठीक होकर घर गए हैं. मैंने अप्रूवल के लिए थर्ड पार्टि एडमिनिस्ट्रेटर के सामने अपना क्लेम दाखिल कर दिया है. हमसे यह कहा गया है कि बहुत सारे हॉस्पिटल इन्फेक्शन कंट्रोल के लिए भी चार्ज कर रहे हैं जिसका भुगतान इंश्योरर द्वारा नहीं किया जाएगा. तिवारी की तरह ही बहुत से ऐसे भारतीय हैं जो एक तरफ कोरोना से लड़ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अपना इंश्योरेंस क्लेम सेटल करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. 


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6649.53 करोड़ रुपये के सेटलमेंट पेडिंग



कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच मेडिकल खर्च के करीब 1,71,000 कोविड क्लेम सेटलमेंट के लिए पेंडिंग है जिसने संबंधित कुल धनराशि 6649.53 करोड़ रुपये है. 28 अप्रैल तक पूरे देश भर में 15,568 करोड़ रुपये के 11 लाख कोविड हेल्थ क्लेम इंश्योरर के समक्ष फाइल किए गए हैं जिनमें से 8918.57 करोड़ रुपये के 930729 क्लेम सेटल हो गए हैं.



ब्लेम गेम



सूत्रों का कहना है कि क्लेम सेटलमेंट में ये देरी हास्पिटल और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच क्लेम अमाउंट और लागू चार्ज पर मतभेद की वजह से है. चूंकि क्लेम का डेटा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इंश्योरर ऑनरिकॉर्ड कोई भी कमेंट नहीं करना चाहते. इन मतभेदों की वजह से कुछ हाॉस्पिटल में कैशलेस सेटलमेंट को नहीं स्वीकार किया जा रहा है. बता दें कि मई 2020 से अस्पतालों ने कोविड आउटब्रेक के बाद अपनाए गए इन्फेक्शन कंट्रोल उपायों की वजह से इलाज का खर्च बढा़ दिया है जिसको ग्राहकों के ऊपर हॉस्पिटल की तरफ पास ऑन कर दिया गया है. इंश्योरर इन्फेक्शन कंट्रोल चार्ज की वजह से बढ़े हुए खर्च का क्लेम स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है. 



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रेटकार्ड पर मतभेद



जून 2020 में इंश्योरर कंपनियों ने अपने इंडस्ट्री बॉडी जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के जरिए सभी कोविड हॉस्पिटल ट्रीटमेंट के लिए स्टैंडर्ड रेट कार्ड बनाया था. हालांकि जैसा कि मनीकंट्रोल पहले ही बता चुका है कि हॉस्पिटल इस रेट के हिसाब से अपना खर्च नहीं दिखा रहे हैं.  इसलिए इंश्योरेंस कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि इन सारी दिक्कतों के लिए हाॉस्पिटल जिम्मेदार हैं कि इंश्योरर. इंश्योरर्स का कहना है कि हम नेटवर्क हॉस्पिटल के साथ पहले से निर्धारित और लागू रेट के आधार पर भुगतान कर रहे हैं जबकि अस्पताल बढ़ा बिल पेश कर रहे हैं. इस बीच ग्राहक इन दोनों के बीच में पिसते हुए डिले, रिजेक्शन और मेडिकल क्लेम के लिए शिकायत पर शिकायत दर्ज कर रहे हैं. देश में कोरोने का केस लगातार बढ़ रहे हैं. इरडा का कहना है कि वो क्लेम डिले और रिजेक्शन पर अपनी नजर बनाए हुए हैं. चूंकि हाॉस्पिटल्स के लिए कोई रेगुलेटर नहीं है. इसलिए इंश्योरर के हाथ बंधे हुए हैं. 



हॉस्पिटल और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच एक लीगल एग्रीमेंट की जरूरत



बैंकिंग से जुड़ी एक इंश्योरेंस कंपनी के CFO ने इस मुद्दे पर बात करते हुए कहा कि एक बार कोविड की दूसरी लहर थमते ही एक इंडस्ट्री के रूप में हमें सभी संक्रामक बीमारियों और भविष्य में आने वाली किसी महामारी के इलाज से जुड़े दर पर व्यापक चर्चा करनी होगी. इसके लिए हॉस्पिटल और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच एक लीगल एग्रीमेंट की भी जरूरत है जिससे कि इसका उल्लंघन होने पर जुर्माना लगाया जाए.


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