लॉकडाउन के दौरान 76 करोड़ से ज्यादा लोगों तक पहुंची केंद्र की यह योजना

लॉकडाउन के दौरान 76 करोड़ से ज्यादा लोगों तक पहुंची केंद्र की यह योजना
केंद्र सरकार ने अब तक 51 हजार करोड़ अनुमानित लागत का खाद्यान्न और दालों का आवंटन कर दिया है.

लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान खाद्यान्नों की कालाबजारी की भी लगातार शिकायतें आ रही हैं. इस पर उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय का कहना है राज्य सरकारों को पीडीएस (PDS) सेंटर्स का लाइसेंस रद्द करने का पूरा अधिकार है. मंत्रालय का काम है खाद्यान्न पहुंचाने का.

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नई दिल्ली. ल़ॉकडाउन (Lockdown) के दौरान प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (PKGKAY) के तहत देश में अप्रैल महीने में 62 करोड़ लोगों को 31 लाख टन खाद्यान्नों को पहुंचाया गया है. वहीं मई महीने की बात करें तो 5 मई तक 14.36 करोड़ लोगों को 7.2 लाख टन आनाज पहुंचाई जा चुकी है.केंद्र सरकार का दावा है कि अप्रैल और मई महीने में अब तक 38 लाख टन से ज्यादा आनाज बांटी जा चुकी है. देश की 21 राज्यों ने इस योजना के तहत अप्रैल महीने में 90 प्रतिशत से अधिक खाद्यान्नों का वितरण कर लिया है.

मंत्रालय का दावा
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान के मुताबिक, 'केंद्र सरकार ने अब तक 51 हजार करोड़ अनुमानित लागत का खाद्यान्न और दालों का आवंटन कर दिया है. मंत्रालय ने बताया है कि 12 मई तक सभी राज्यों ने तीन महीने के कोटे में से दो महीने का पूरा कोटा 79.76 लाख टन उठा लिया है. इस आनाज का भी वितरण जारी है. अधिकतर राज्यों ने अप्रैल महीने का राशन वितरण कर दिया है. कुछ राज्य जो बचे हैं वह भी बहुत जल्द ही अप्रैल-मई महीने का खाद्यान्नों का वितरण का काम पूरा कर लेंगे.

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12 मई तक सभी राज्यों ने तीन महीने के कोटे में से दो महीने का पूरा कोटा 79.76 लाख टन उठा लिया है.

80 करोड़ लाभार्थियों को पहुंच रहा है फायदा


गौरतलब है कि लॉकडाउन के बाद पीकेजीकेएवाई योजना लॉन्च की गई थी. केंद्र सरकार ने इसके तहत 80 करोड़ लाभार्थियों को अप्रैल से जून महीने तक अतिरिक्त खाद्यान्नों के वितरण का निर्णय लिया था. इन तीन महीने में केंद्र सरकार ने 120 लाख टन खाद्यान्न वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया था. इस योजना के तहत लोगों को 5 किलोग्राम आनाज प्रति व्यक्ति को तीन महीने तक निशुल्क दिया जा रहा है. देश में 20 करोड़ राशन कार्ड धारक परिवार हैं जिसके तहत 80 करोड़ 95 लाख लाभार्थी हैं. इन लोगों को इस योजना का लाभा मिल रहा है.

20 करोड़ परिवारों को मिल रहा है एक किलो दाल
अगर दाल की बात करें तो इस योजना के तहत इन 20 करोड़ परिवारों को एक किलो दाल प्रति परिवार को तीन महीने तक मुफ्त दिया जा रहा है. अगले तीन महीने के लिए 5.87 लाख मीट्रिक टन दाल देनी है, जिसमें से 12 मई तक 3.15 लाख मिट्रिक टन दाल राज्यों को भेजी जा चुकी है. इसमें से 2.26 लाख मीट्रिक टन दाल राज्यों में पहुंच भी चुकी है. 12 मई 2020 तक 71 हजार 738 मीट्रिक टन दाल का वितरण भी किया जा चुका है. 12 मई तक सरकार के पास 12.75 लाख मीट्रिक टन दाल का वफर स्टॉक मौजूद है.

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कई राज्यों से जन वितरण प्रणाली दुकानों में कालाबाजारी की शिकायतें भी मिल रही हैं.


कालाबाजारी की शिकायत, कार्रवाई का अधिकार राज्यों को
देश के कई राज्यों से जन वितरण प्रणाली (PDS) दुकानों में कालाबाजारी की शिकायतें भी मिल रही हैं. लॉकडाउन के दौरान कई पीडीएस सेंटर्स पर अनाज नहीं मिलने की शिकायत आ रही हैं. बिहार, झारखंड जैसे राज्यों से इस तरह की शिकायतें ज्यादा आ रही हैं. इस मामले में जब मंत्रालय से संपर्क किया गया तो उनका कहना है था कि यह राज्यों का विषय है. राज्य सरकार और जिला प्रशासन ही इस विषय को देखे. राज्य सरकारों को पीडीएस सेंटर्स का लाइसेंस रद्द करने का पूरा अधिकार है. मंत्रालय का काम है खाद्यान्न पहुंचाने का.

बिहार में अब तक 40 से भी ज्यादा डीलरों पर कार्रवाई की गई है. वहीं, देश के अन्य राज्यों में भी जनवितरण प्रणाली के दुकानों पर लॉकडाउन के दौरान नगरानी रखी जा रही है. यूपी में भी कोटेदारों द्वारा लोगों की सहायता के लिए भेजा गया अनाज डकारने की छिटपुट घटनाएं हुई हैं.

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