महाराष्‍ट्र: पानी से भी कम दाम पर बिक रहा गाय का दूध, सिर्फ 15-18 रुपये लीटर बेचने को मजबूर हैं किसान

महाराष्‍ट्र: पानी से भी कम दाम पर बिक रहा गाय का दूध, सिर्फ 15-18 रुपये लीटर बेचने को मजबूर हैं किसान
दूध के गिरते रेट का ये है सबूत (रेट लिस्ट: नंदू रोकड़े)

Farmers Protest Against Low Rate of Milk in Maharashtra: पशुपालक किसान गाय का दूध 14.5 रुपये प्रति लीटर तक बेचने को मजबूर हैं. जबकि बोलत बंद पानी 20 रुपये लीटर है. ऐसे में कौन पालेगा गाय? हालांकि उपभोक्ता को 50 रुपये लीटर तक देना पड़ रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: July 21, 2020, 10:36 PM IST
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नई दिल्ली. पिछले 6 साल से गाय भारतीय राजनीति (Cow Politics) के केंद्र में है. इसके सहारे सियासी फसल काटी जा चुकी है. लेकिन, नेताओं ने गाय के दूध को कभी मुद्दा नहीं बनाया. जिसकी वजह से गायों को पालने वाले किसान (Dairy Farmers) परेशान हैं. क्योंकि उन्हें दूध का सही दाम नहीं मिल पा रहा है. कुछ राज्यों में तो पशुपालक बोतलबंद पानी (Water) से भी बहुत कम रेट पर दूध बेचने को मजबूर हैं. ऐसे ही राज्यों में शामिल है महाराष्ट्र. जहां के किसानों ने मंगलवार को जगह-जगह दूध बहाकर केंद्र व राज्य सरकार के खिलाफ प्रदर्शन भी किया. स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के आंदोलन में प्रदर्शनकारी किसानों ने सड़क पर सैकड़ों लीटर दूध बहा दिया. उन्होंने गाय के दूध का रेट कम से कम 30 रुपये लीटर करने या फिर 10 रुपये प्रति लीटर अनुदान देने की मांग उठाई.

आईए समझते हैं कि आखिर वजह क्या है जिससे गाय के दूध का रेट इतना कम हो गया?

केस नंबर-1



अहमदनगर (महाराष्ट्र) के पशुपालक नंदू रोकड़े ने न्यूज18 हिंदी को फोन पर बताया कि उन्होंने 15 लाख रुपये का लोन लेकर डेयरी फार्म खोला है. लॉकडाउन के बाद से गाय के दूध का रेट 35 रुपये लीटर से घटकर 14.5 रुपये लीटर तक आ गया है. 17 से 18 रुपये लीटर तो आम बात हो गई है. जबकि 25 रुपये लीटर खर्च लग जाता है.
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अहमदनगर, महाराष्ट्र का एक डेयरी फार्म


रोकड़े कहते हैं, प्राइवेट डेयरी वाले कह रहे हैं कि दूध की खपत कम हो गई है. इसलिए वो पुराने रेट पर दूध नहीं खरीद सकते. जबकि वही डेयरी वाले शहर में गाय का दूध 50 रुपये लीटर बेच रहे हैं. कोरोना की आड़ में कुछ लोग फायदा उठा रहे हैं और किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है. निजी डेयरी संचालक और बिचौलिए किसानों की मेहनत का फायदा उठा रहे हैं.

रोकड़े कहते हैं कि उनके पास 15 गाय हैं. लॉकडाउन के बाद से हर दिन 3000 रुपये का नुकसान हो रहा है. लाखों युवाओं ने लोन लेकर डेयरी का काम शुरू किया है. लेकिन पर्याप्त दाम न मिलने की वजह से वे हताश और निराश हैं. क्योंकि लोन कैसे चुकाया जाए. लोन वापस नहीं कर पाएंगे तो बैंक वाले जमीन हड़प लेंगे.

ऐसे में केंद्र सरकार को बताना चाहिए कि जब देश में दूध पर्याप्त है और यहां के किसानों को उचित दाम नहीं मिल पा रहा है तो 10 हजार मिट्रिक टन स्किम्ड मिल्क पाउडर (SMP- Skimmed Milk Powder) इंपोर्ट करने की अनुमति क्यों दी गई. रोकड़े कहते हैं कि यही हाल रहा तो नौजवान खेती dairy और पशुपालन बंद कर देंगे और देश को दूध और अनाज आयात करना पड़ेगा.

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केस नंबर-2

पाशा पटेल, लातूर (महाराष्ट्र) के लोदगा गांव के किसान हैं. इनके पास भी 20 गायों का डेयरी फार्म है. हमसे फोन पर हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि कोरोना की वजह से दूध 18 से 20 रुपये प्रति लीटर पर आ गया है, जो काफी चिंताजनक है. उन्होंने सरकार से मांग की है कि दाम कम से कम 30 रुपये लीटर करे या फिर 10 रुपये लीटर अनुदान दिया जाए. पाशा भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं. महाराष्ट्र एग्रीकल्चर प्राइस कमीशन के चेयरमैन भी रह चुके हैं. जब दूध के दाम को लेकर वो व्यथित हैं तो आम किसानों की परेशानी आसानी से समझी जा सकती है.

डेयरी मंत्री ने माना 25 रुपये लीटर आता है खर्च लेकिन…

दाम को लेकर जब हमने पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री संजीव बालयान से बातचीत की तो उन्होंने कहा, “कोरोना वायरस की वजह से दूध की बिक्री कम हुई है. इसकी वजह से कुछ कंपनियों ने लालच में खूब कमाया है और पशुपालकों को कम दाम मिला है. मैं खुद किसान परिवार से हूं जानता हूं कि प्रति लीटर दूध पैदा करने में कम से कम 25 रुपये का खर्च आता है. लेकिन रेट 17-18 रुपये और उससे भी कम होगा यह मुझे नहीं पता था. मंत्रालय में विचार-विमर्श करके इसका जल्द ही कुछ समाधान निकालने की कोशिश करुंगा.”

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दूध की कम कीमत के खिलाफ महाराष्ट्र में किसानों का प्रदर्शन


क्या एमएसपी ही है दूध के सही दाम का विकल्प

किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष पुष्पेंद्र चौधरी कहते हैं कि कुछ डेयरी संचालक कोरोना के नाम पर पशुपालकों से सस्ते में दूध खरीद रहे हैं लेकिन उसी दूध का दाम उपभोक्ता के लिए बढ़ाते जा रहे हैं. उत्पादकों को इसकी सही कीमत दिलाना सरकार का काम है. वो इससे भाग नहीं सकती.

सही कीमत न मिलने की वजह से लोग पशुपालन से घबराते हैं. इसलिए दूध के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की व्यवस्था लागू की जाए. जब तक दूध का एमएसपी नहीं घोषित होगा तब तक हालात नहीं सुधरेंगे. ऐसा हो जाएगा तो कम से कम संगठित क्षेत्र के खरीदार तो उचित दाम देंगे.

कैसे तय होता है दूध का दाम

दूध का सही रेट न मिलने की समस्या आम है. दरअसल, दूध में मौजूद फैट और एसएनएफ (Solids Not Fat) के आधार पर इसका दाम तय होता है. कोऑपरेटिव दूध के जो दाम तय करती है वो 6.5 फीसदी फैट और 9.5 फीसदी एसएनएफ का होता है. इसके बाद जिस मात्रा में फैट कम होता जाता है उसी तरह कीमत घटती जाती है.


दूध उत्पादन और भारत

-भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है. वर्ष 2018 में 176.3 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ. विश्व के कुल दूध उत्पादन (Milk production) में भारत की हिस्सेदारी लगभग 20 फीसदी है.

-भारत में हर रोज करीब 50 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है. इसमें से लगभग 20 फीसदी संगठित और 40 फीसदी असंगठित क्षेत्र खरीदता है. लगभग 40 फीसदी दूध का इस्तेमाल किसान खुद करता है.

-यूपी, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा एवं कर्नाटक भारत के सबसे बड़े दूध उत्पादक राज्य हैं.

-नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के मुताबिक 2018-19 में भारत में प्रति व्यक्ति प्रति दिन दूध की औसत उपलब्धता 394 ग्राम थी. इस मामले में हरियाणा सबसे आगे है जहां प्रति व्यक्ति औसत दूध 1087 ग्राम है.

-20वीं पशुधन गणना के मुताबिक देश में मादा मवेशी (गायों की कुल संख्‍या) 145.12 मिलियन आंकी गई है. जो पिछली गणना (2012) की तुलना में 18.0 प्रतिशत अधिक है. जबकि कुल पशुधन आबादी 535.78 मिलियन है.
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