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माल्या का कोर्ट में दावा- कर्ज चुकाने को तैयार था, बैंकों ने ठुकराई पेशकश

भाषा
Updated: December 8, 2017, 9:37 AM IST
माल्या का कोर्ट में दावा- कर्ज चुकाने को तैयार था, बैंकों ने ठुकराई पेशकश
बैंकों ने ठुकराई लोन चुकाने की पेशकश, माल्या बचाव पक्ष का दावा.
भाषा
Updated: December 8, 2017, 9:37 AM IST
ब्रिटेन में प्रत्यर्पण से जुड़ी सुनवाई के दौरान विजय माल्या के बचाव पक्ष ने दावा किया कि उसने कर्ज की करीब 80 फीसदी राशि लौटाने की बात की थी, लेकिन भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की अगुवाई में बैंकों के समूह ने उनकी पेशकश को ठुकरा दिया था.

सीपीएस ने दी ये दलीलें 
इस पर भारत सरकार की ओर से दलील पेश कर रही ‘क्राउन प्रोसेक्यूशन सर्विस’ (सीपीएस) ने प्रतिवाद करते हुए संकेत दिया कि ऐसे प्रस्ताव को ठुकराने का कारण यह था कि बैंकों को पता था कि संपूर्ण बकाये के भुगतान के लिए माल्या के पास साधन हैं.

माल्या की वकील क्लेयर मोंटगोमरी ने सवाल किया कि क्या छह अप्रैल, 2017 को करीब 4,4000 रुपये वापस करने की उनके मुवक्किल की पेशकश को एक दिन ही बाद ही बैंकों द्वारा ठुकराया जाना चाहिए था.

सुनवाई के फैसले के बाद पता चलेगा की माल्या भारत वापस आएंगे या नहीं
ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट अदालत में यह सुनवाई चल रही है. इस सुनवाई का फैसला तय करेगा कि माल्या को वापस भारत भेजा जाना चाहिये या नहीं, जहां वह 9,000 करोड़ रुपये के धन शोधन और बैंकों के साथ धोखाधड़ी के मामलों में वांछित हैं. माल्या के बचाव में बैंकिंग विशेषज्ञ को एक गवाह के तौर पर पेश किया गया.

माल्या का ‘धोखाधड़ी’ करने का कोई इरादा नहीं: पॉल रेक्स
बैंकिंग विशेषज्ञ पॉल रेक्स ने अपनी दलील में इस बात पर जोर दिया कि वास्तव में माल्या का ‘धोखाधड़ी’ करने का कोई इरादा नहीं था. बैंकिंग विशेषज्ञ पॉल रेक्स, जिनके बारे में बताया गया कि उनका बैंकिंग क्षेत्र में 20 साल से अधिक का अनुभव है. उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र में स्वतंत्र विशेषज्ञ के तौर पर काम किया. उन्हें  सुनवाई के तीसरे दिन अदालत में पेश किया गया.

माल्या की वकील क्लेयर मोंटगोमरी ने अपनी दलीलों को पेश करते हुए कहा कि भारत सरकार की ओर पेश हुई क्राउन प्रोसीक्यूशन सर्विस (सीपीएस) उनके मुवक्किल पर दायर मामले को प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी का मामला स्थापित करने में विफल रही है.

नहीं थी माल्या कर्ज चुकाने की मंशा: सीपीएस
उधर, रेक्स की दलील के मुताबिक माल्या की धोखाधड़ी करने की कोई मंशा नहीं थी, जबकि सीपीएस की दलील थी कि माल्या ने जो कर्ज लिया उसे चुकाने की उसकी मंशा नहीं थी क्योंकि उनकी विमानन कंपनी का बंद होना अपरिहार्य हो गया था.

क्लेयर ने यह स्थापित करने की कोशिश की कि किंगफिशर के बंद होने में परिस्थितियां जिम्मेदार रहीं, क्योंकि 2009 से 2010 के बीच वैश्विक आर्थिक मंदी का दौर रहा था और कंपनी का बंद होना कंपनी के नियंत्रण से बाहर होने का परिणाम था.
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