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CRISIL का अनुमान! बैंकिंग सेक्टर के Bad Loans में होगी 9 फीसदी तक की बढ़ोतरी

CRISIL का अनुमान! बैंकिंग सेक्टर के Bad Loans में होगी 9 फीसदी तक की बढ़ोतरी

CRISIL ने कहा, मॉरेटोरियम सुविधा मिलने के बाद भी रिटेल सेगमेंट में बैड लोंस पिछले साल के मुकाबले बढ़ने की आशंका है.

CRISIL ने कहा, मॉरेटोरियम सुविधा मिलने के बाद भी रिटेल सेगमेंट में बैड लोंस पिछले साल के मुकाबले बढ़ने की आशंका है.

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) का कहना है कि कोरोना वायरस महामारी के बीच केंद्र सरकार की ओर से किए गए राहत उपायों (Relief Measures) के कारण बैड लोन (Bad Loans) में बढ़ोतरी की रफ्तार घटेगी.

    नई दिल्‍ली. रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL Ratings) का कहना है कि भारत के बैकिंग सेक्टर (Indian Banking Sector) के बैड लोन मौजूदा वित्‍त वर्ष के दौरान साल 2018 के उच्चस्तर के मुकाबले कम रफ्तार से बढ़ेंगे. क्रिसिल के मुताबिक, बैंकों के ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (Gross NPA) में 8-9 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है बता दें कि साल 2018 के आखिर में बैंकों का ग्रॉस-एनपीए 11.2 फीसदी था. क्रिसिल (CRISIL) ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के कारण केंद्र की ओर से रिस्‍ट्रक्‍चरिंग को मंजूरी और इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी स्‍कीम (ECLGS) जैसे उपायों के कारण ग्रॉस-एनपीए के बढ़ने की दर कम रहेगी.

    रिटेल सेगमेंट में बैड लोन बढ़ सकता है 5 फीसदी तक
    बैंकों के क्रेडिट का लगभग 2 फीसदी वित्‍त वर्ष 2021-22 के आखिर में रिस्ट्रक्चरिंग के तहत होने के कारण ग्रॉस एनपीए और रिस्ट्रक्चरिंग वाली लोन बुक 10-11 फीसदी तक पहुंच सकती है. क्रिसिल रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर और डिप्‍टी चीफ रेटिंग्स ऑफिसर कृष्णन सीतारमण ने बताया कि बैंक क्रेडिट में रिटेल (Retail Credit Segment) और एमएसएमई सेगमेंट्स (MSME Segment) की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी की है. उन्‍होंने कहा कि रिटेल सेगमेंट में बैड लोन 4-5 फीसदी और एमएसएमई सेगमेंट्स में 17-18 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है.

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    मॉरेटोरियम के बाद भी रिटेल सेगमेंट से बढ़ेगी दिक्‍कत
    कोरोना संकट के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे कर्जदारों को राहत देने के लिए पिछले साल केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ( RBI) ने छह महीने के लोन मॉरेटोरियम की घोषणा की थी. इसके बावजूद रिटेल सेगमेंट में बैड लोंस पिछले साल के मुकाबले बढ़ने की आशंका है. हालांकि, क्रेडिट में सबसे अधिक हिस्सेदारी रखने वाले होम लोन सेगमेंट पर सबसे कम असर पड़ेगा. महामारी की बड़ी मार अनसिक्योर्ड लोंस पर पड़ सकती है. एमएसएमई सेगमेंट को सरकार की कुछ स्कीमों से फायदा मिलने के बावजूद एसेट क्वालिटी खराब होने से जूझना पड़ेगा. इसके लिए रिस्ट्रक्चरिंग की जरूरत ज्‍यादा होगी.

    Tags: Bad loan, Bank news, Banking sector reforms, Business news in hindi, Indian economy, Loan moratorium, Rating, RBI

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