PMFBY: किसान या कंपनी कौन काट रहा फसल बीमा स्कीम की असली ‘फसल’

PMFBY: किसान या कंपनी कौन काट रहा फसल बीमा स्कीम की असली ‘फसल’
आसान नहीं है खराब फसल का मुआवजा लेना (File Photo)

आखिर साल दर साल क्यों कम हो रहा है फसलों का इंश्योर्ड एरिया और मोदी सरकार को क्यों किसान क्रेडिट कार्ड लेने वालों के लिए फसल बीमा (PMFBY) लेना स्वैच्छिक करना पड़ा. पढ़िए पूरी कहानी

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 16, 2020, 4:26 PM IST
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नई दिल्ली. देश के बड़े हिस्से में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है. खुदाई के लिए तैयार आलू के खेतों में बारिश का पानी भर गया है. किसान जल्द से जल्द राहत चाहते हैं लेकिन वे बीमा कंपनियों के ‘कंडीशन’ और राजस्व अधिकारियों की लालच के जाल में उलझे हुए हैं. इन दोनों की भूख मिटेगी तब जाकर किसान तक राहत मिलेगी. ऐसी ही परेशानियों के कारण साल दर साल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY- Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) का एरिया घटता जा रहा है. ऐसा हो भी क्यों नहीं? किसानों की भलाई के नाम पर बनाई गई इस योजना की असली फसल इंश्योरेंस कंपनियां जो काट रही हैं.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय (Ministry of Agriculture) की रिपोर्ट बता रही है कि फसल बीमा का सबसे ज्यादा लाभ तो इंश्योरेंस कंपनियों को मिल रहा है. पिछले तीन साल में किसानों को इस स्कीम के तहत फसल खराब होने पर करीब 60 हजार करोड़ रुपये मिले हैं, जबकि इंश्योरेंस कंपनियों को प्रीमियम से 76 हजार करोड़ रुपये मिले.

किसान नेताओं का कहना है कि बीमा कंपनियां किसानों को मुआवजे के लिए भटकाती रहती हैं इसलिए ज्यादातर किसान उनके दुष्चक्र में फंसने से अब बच रहे हैं. इसीलिए सरकार को किसान क्रेडिट कार्ड लेने पर फसल बीमा करवाने के बाध्यता खत्म करनी पड़ी है.



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फसल बीमा के प्रीमियम से मालामाल होतीं कंपनियां

क्यों नहीं मिलता नुकसान का पूरा मुआवजा

राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य विनोद आनंद कहते हैं कि इंश्योरेंस कंपनी व किसान के बीच राज्य सरकार (राजस्व विभाग) है. जबकि बीमा केंद्रीय विषय है. किसान की फसल खराब होने के बाद पहले तहसीलदार और उसके मातहत कर्मचारी रिपोर्ट बनाते हैं, जिसमें वे खुलेआम पैसे मांगते हैं. जबकि बीमा कंपनी फसल नुकसान का आकलन निजी वेदर कंपनी स्काईमेट की रिपोर्ट पर करती है. इन दोनों की ऐसी मिलीभगत है कि कभी किसान के नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी से नहीं हो पाती. कई क्षेत्रों में तो कंपनियां बीमा करती ही नहीं हैं.

किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि अब तक सरकार ने ऐसी कोई व्यव्स्था नहीं बनाई है जिससे कि किसानों को आसानी से फसल बीमा योजना का लाभ मिल सके. सरकार को एक ऐप बनाना चाहिए जिसमें किसान खराब हुई फसल की फोटो और वीडियो अपलोड करके खुद ही बता दे कि नुकसान कितना प्रतिशत है. उसके बाद 14 दिन के अंदर अगर बीमा कंपनी किसान के दावे की क्रासचेकिंग न करे तो दावे को पास मानकर मुआवजे का भुगतान हो जाए. दुर्भाग्य से बीमा कंपनियां न तो किसानों के दावों का सही आकलन करती हैं और न ही समय से दावों का भुगतान होता है.

 

हालांकि, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने राज्यसभा में कहा है कि दावा निपटान समय को कम करने के लिए और निर्धारित समय सीमा के भीतर लंबित दावों को पूरा करने के लिए सरकार द्वारा नियमित रूप से निगरानी की जा रही है. प्रीमियम राज सहायता में राज्य सरकार के 50 फीसदी शेयर न मिलने से वर्ष 2018-19 के लिए 3726 करोड़ रुपए के दावे लंबित हैं.

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बेमौसम बारिश से खराब हुई फसल


फसल बीमा का प्रीमियम

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ फसलों पर 2 फीसदी, रबी फसलों पर 1.5 फीसदी और बागवानी नकदी फसलों पर अधिकतम 5 फीसदी प्रीमियम लगता है. बाकी का 98 फीसदी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर देती हैं.

PMFBY में कंडीशन अप्लाई

(1) फसल की बुआई के 10 दिन के अंदर किसान को योजना का फॉर्म भरना होगा.

(2) फसल काटने से 14 दिनों के बीच अगर आपकी फसल को प्राकृतिक आपदा के कारण नुकसान होता है तो भी बीमा का लाभ उठा सकते हैं.

(3) बीमा की रकम का लाभ तभी मिलेगा जब आपकी फसल किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से खराब हुई हो.

फसल बीमा के लिए इन दस्तावेजों की जरूरत

(1) किसान का आईडी कार्ड चाहिए, जिसमें पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड से काम चलेगा.

(2) पता के लिए ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी कार्ड, पासपोर्ट, आधार कार्ड की कॉपी लगेगी. एक फोटो भी लगेगी.

(3) अगर खेत आपका अपना है तो इसका खसरा नंबर और उसका पेपर

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पिछले दिनों पाकिस्तानी टिड्डी दल ने राजस्थान में बर्बाद कर दी थी फसल


(4) खेत में फसल की बुवाई हुई है, इसका सबूत पेश करना होगा. इसके सबूत के तौर पर किसान पटवारी, सरपंच, प्रधान जैसे लोगों से एक पत्र लिखवा ले सकते हैं.

(5) अगर खेत बटाई या किराए पर लेकर फसल की बुवाई की गई है, तो खेत के मालिक के साथ हुए एग्रीमेंट की कॉपी लगानी होगी.

(6) फसल नुकसान का मुआवजा सीधे आपके बैंक खाते में आए इसके लिए एक कैंसिल चेक जरूरी है.

 

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