यूपी से बिहार और एमपी तक तबाह हुई किसानों की फसल, मुआवजे का पता नहीं, कैसे दोगुनी होगी आय?

गोरखपुर के बभनौली गांव में बारिश की वजह से धान की फसल खराब हो गई
गोरखपुर के बभनौली गांव में बारिश की वजह से धान की फसल खराब हो गई

यूपी में धान और गन्ना, बिहार व एमपी में मक्का और सोयाबीन की फसल हुई है तबाह, लेकिन सरकारी एलान के बाद भी अब तक नहीं मिला मुआवजा. पढ़िए स्पेशल रिपोर्ट.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 4, 2020, 3:53 PM IST
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नई दिल्ली. किसान हितैषी होने का दावा करने वाली सरकारों का असली चेहरा कैसा है? वो कहते क्या हैं और होता क्या है. रोजाना यह दावा किया जा रहा है कि 2022 तक आय दोगुनी हो जाएगी. हर सरकार कह रही है कि उससे बड़ा किसान हितैषी (Farmer friendly) कोई है ही नहीं. इन कागजी और जुबानी बातों के उलट जमीनी सच ये है कि बाढ़ और अति बारिश से फसलों को हुए नुकसान (Crop Loss) का अब तक मुआवजा (Compensation) भी नहीं दिया गया है. आईए कुछ उदाहरणों से किसानों का दर्द समझते हैं.

केस नंबर-1: यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के बेलघाट ब्लॉक के तहत आने वाले बिशुनपुरा गांव निवासी वेद प्रकाश मौर्य ने 10 बीघे में धान (Paddy) की फसल लगाई थी. इस पर करीब 65 हजार रुपये का खर्च किया लेकिन लगातार हुई बारिश में पूरी फसल सड़ गई. अब तक गांव में कोई भी राजस्व अधिकारी नुकसान का सर्वे करने नहीं आया.

केस नंबर-2: इसी ब्लॉक के बभनौली गांव निवासी संदीप गौड़ की पांच बीघे में धान की फसल बर्बाद हो गई है. अब तक न नुकसान का सर्वे हुआ है और न कोई तत्काल सहायता मिली है.



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यूपी: महराजगंज के खेसरारी गांव में बारिश से खराब हुई गन्ने की फसल

केस नंबर-3: यूपी के तराई बेल्ट स्थित महाराजगंज जिले के सिसवा ब्लॉक में खूब गन्ना होता है. यहां के खेसरारी गांव निवासी राघव सिंह बताते हैं कि उनकी  12 एकड़ में गन्ने (Sugarcane) की फसल सड़ गई है. करीब 60 हजार रुपये एकड़ लागत आई है लेकिन अब तक नुकसान का सर्वे भी नहीं हुआ है, मुआवजे की बात तो दूर है. ऊपर से बैंक केसीसी का पैसा वापस करने का दबाव बना रहे हैं. जब फसल ही बर्बाद हो गई तो किसान खेती के लिए लिया गया कर्ज कैसे लौटाएगा.

केस नंबर-4: कुशीनगर जिले के खजुरिया गांव निवासी अशोक के परिवार में 12 बीघे में गन्ने की फसल खराब हो गई है. लेकिन मुआवजे के लिए सर्वे नहीं हुआ.

केस नंबर-5: मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के सलईखेड़ी गांव निवासी सतेंद्र यादव की 40 बीघा में बोई गई सोयाबीन की फसल (soybean crop) बर्बाद हो गई. इतनी खेती में सिर्फ 7 क्विंटल सोयाबीन निकला है. जबकि सही उपज होती तो कम से कम 100 क्विंटल पैदावार होती. यादव ने इस पर करीब 2 लाख रुपये खर्च किया था. लेकिन अब जिस क्वालिटी का सोयाबीन हुआ है उसका दाम अधिकतम सिर्फ 2000 रुपये क्विंटल मिलेगा. मुआवजे के लिए 20 दिन पहले सर्वे हुआ है. लेकिन मुआवजा नहीं मिला. सरकार मुआवजा भी देगी तो इतना पैसा कभी नहीं दे सकती.

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मध्य प्रदेश के विदिशा में खराब हुई सोयाबीन की फसल


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देश के अलग-अलग हिस्सों में किसानों की तबाही के ये कुछ उदाहरण भर हैं. नुकसान तो न जाने कितने किसानों की फसल का हुआ है. हालात ये हैं कि सरकारी आदेश के बाद भी अब तक सर्वे भी नहीं किया गया. मुआवजा तभी मिलता है जब ग्राउंड पर सर्वे हो. राजस्व विभाग नुकसान के आकलन की रिपोर्ट भेजे.

देश भर में कितना हुआ नुकसान?

केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक, 'इस साल बाढ़ और बारिश की वजह से 10 सितंबर तक 20.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल बर्बाद हुई है. बिहार, कर्नाटक, असम, ओडिशा और पूर्वी यूपी तबाही ज्यादा है.' कहीं धान की फसल सड़ गई तो कहीं गन्ना और मक्के की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा है. करीब आठ हजार पशु मारे गए हैं. अतिवृष्टि के कारण निचले इलाकों में केले की खेती को भी नुकसान हुआ है.

इतने बड़े पैमाने पर नुकसान के बावजूद हमारे अन्नदाता सरकारी मदद का इंतजार कर रहे हैं और किसानों के नाम पर सियासत चमकाने वाले इस मसले पर मौन हैं. अकेले बिहार (Bihar) में 7.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसल खराब हुई है. सवाल ये है कि फसल बर्बाद होने के बाद मुआवजा नहीं मिला तो 2022 तक अन्नदाता की आय कैसे दोगुनी होगी.

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गोरखपुर के बिशुनपुरा गांव में बारिश के पानी में डूबी धान की फसल


योगी सरकार ने दिए थे सर्वे के आदेश लेकिन क्या हुआ?

यूपी की बात करें तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि प्रदेश में बाढ़ और जलभराव से प्रभावित फसलों का सर्वेक्षण कराकर जल्द मुआवजा दिया जाएगा. उन्होंने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए थे कि वे अपने-अपने जिलों में फसलों को हुए नुकसान का तत्काल आकलन करें. जिन किसानों की बोई गई फसलों में 33 प्रतिशत से अधिक की क्षति हुई है, ऐसे लोगों को कृषि निवेश अनुदान वितरित किया जाए. लेकिन लगता है कि अधिकारी उनके आदेशों को हवा में उड़ा देते हैं.

कांग्रेस ने गन्ना मंत्री से की मांग

यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने गन्ना मंत्री को पत्र लिखकर नुकसान की ओर ध्यान देने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि राज्य के विभिन्न जिलों में भारी बारिश के चलते जलभराव के कारण गन्ने की फसल को भारी नुकसान हुआ है. अब तक प्रभावित किसानों को मुआवजे के भुगतान के संबंध में कोई आश्वासन नहीं दिया गया है. उन्हें चीनी मिलों से अपना बकाया भी नहीं मिल रहा है.

किसानों को जल्द मिले मुआवजा

किसान शक्ति संघ के अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह ने सरकार से गन्ने की फसल के नुकसान का बिना देरी सर्वे करवाने और एक लाख रुपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा देने की मांग की है. गन्ने में लागत ज्यादा है. बकाया न मिलने की वजह से हालात पहले से ही खराब हैं. इसी तरह धान और मक्के की फसल को हुए नुकसान की भरपाई भी कम से कम कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की लागत के आधार पर किया जाए.

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कुशीनगर के खजुरिया के गांव में बारिश से तबाह गन्ने की फसल


एक ही ब्लॉक में इतना नुकसान, सर्वे का पता नहीं

सहकारी गन्ना विकास समिति सिसवा बाजार, महराजगंज के उपाध्यक्ष चंद्रशेखर सिंह ने हमें बताया कि उनके क्षेत्र में करीब 600 एकड़ में गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा है. लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि मुआवजे के लिए अब तक कोई सर्वे नहीं हुआ. यह अधिक लागत वाली फसल है. ऐसे में अगर मुआवजा नहीं दिया गया तो किसान बर्बाद हो जाएंगे.

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सभी जिलों में सभी फसलों के सर्वे का आदेश: मंत्री

हमने इस बारे में जब गन्ना राज्यमंत्री सुरेश पासी से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि शासन का आदेश है कि किसी भी फसल का नुकसान हो, डीएम सर्वे करवाकर जानकारी दें. गन्ना भी इसमें शामिल है. अगर कहीं पर सर्वे नहीं हुआ है तो किसान हमें जानकारी दें, हम सर्वे करवाएंगे. ज्यादा नुकसान हुआ है तो मुआवजा मिलेगा.





मध्य प्रदेश के सोयाबीन किसानों का दर्द

राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन में मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष राहुल राज बताते हैं कि सोयाबीन यहां की प्रमुख फसल है. मालवा में इसकी ज्यादा पैदावार होती है. फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है. जबकि अब तक राहत राशि घोषित नहीं की गई है. मक्का और कपास की फसल भी तबाह है. सरकार को जल्द से जल्द मुआवजा देना चाहिए. ताकि नुकसान के झटके से किसान संभल सके. दुर्भाग्य से अब तक सिर्फ कागजी दावे हो रहे हैं.

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अतिवृष्टि के कारण केले की खेती को भी नुकसान


बिहार में सबसे ज्यादा तबाही लेकिन मुआवजा नहीं मिला

बिहार किसान मंच के अध्यक्ष धीरेंद्र सिंह टुडू ने बताया कि बाढ़ और बारिश में 18 जिलों के 155 प्रखंड में धान, सोयाबीन, मक्का और सब्जियों की फसल पूरी तरह से खत्म हो गई है. कृषि विभाग ने सरकार से फसल क्षतिपूर्ति के रूप में 999 करोड़ 60 लाख रुपये की मांग रखी थी. लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि चुनाव के बाद भी सरकार ने अभी तक राहत राशि का वितरण नहीं किया है. अगर सरकार अब पैसा नहीं दे रही है तो उसका चुनाव बाद क्या हाल होगा.
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