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महंगे क्रूड से बिगड़ेगा आम आदमी का बजट, होगा देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर

महंगे क्रूड से बिगड़ेगा आम आदमी का बजट, होगा देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर

कच्चे तेल के महंगा होने से देश की आर्थिक ग्रोथ को बड़ा झटका लगता है.

कच्चे तेल के महंगा होने से देश की आर्थिक ग्रोथ को बड़ा झटका लगता है.

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब (Saudi Arabia) में 30 दिन में स्थिति सामान्य नहीं होती तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil Price Soar) की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है. जानिए कच्चा तेल महंगा होने से भारत पर क्या असर होगा!

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  • News18Hindi
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    रियाद. दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) के दो प्लांट पर यमन के हूती लड़ाकों ने शनिवार को ड्रोन से हमला कर दिया. इससे सऊदी अरब में कच्चे तेल (Crude Oil) का उत्पादन 50 फीसदी घट गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ग्लोबल प्रोडक्शन (Global Crude Oil Production) का 5 फीसदी है. हमले से पहले सऊदी अरब (Saudi Arabia) करीब 100 लाख बैरल प्रति दिन उत्पादन कर रहा था. अब यह घटकर 50 लाख बैरल रह गया है. इसी वजह से सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 28 साल की सबसे बड़ी तेजी आई है. सऊदी अरब का कहना है कि जल्द हालात काबू में होंगे और उत्पादन फिर से पुराने स्तर पर पहुंच जाएगा. आपको बता दें कि कच्चा तेल महंगा होने से भारत का आयात बिल और व्यापार घाटा भी बढ़ेगा. कच्चे तेल की कीमत में 1 डॉलर के इजाफे से भारत पर सालाना 10,700 करोड़ रुपये का असर पड़ता है.

    अब क्या होगा- न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सऊदी अरब में 30 दिन में स्थिति सामान्य नहीं होती तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती है. 7 दिन सप्लाई रुक गई तो कच्चा तेल 15 डॉलर से 20 डॉलर प्रति बैरल तक महंगा हो सकता है.

    (1) महंगे क्रूड से देश की अर्थव्यवस्था पर होगा असर- ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनी नोमुरा के अनुमान के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से भारत के राजकोषीय घाटे और करंट अकाउंट बैलेंस पर असर होता है.

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    मतलब साफ है कि महंगे क्रूड से  जीडीपी पर 0.10 से 0.40 फीसदी तक का बोझ बढ़ जाता है. सरकार के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा था कि तेल की कीमतों में $10 प्रति बैरल की वृद्धि जीडीपी ग्रोथ को 0.2 से 0.3 प्रतिशत नीचे ला सकती है. वर्तमान में करंट अकाउंट डेफिसिट 9 से 10 अरब डॉलर तक बढ़ सकता है.

    (2) महंगाई बढ़ने का डर- अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्रूड महंगा होने से इंडियन बास्केट में भी क्रूड महंगा हो जाता है. इससे तेल कंपनियों (HPCL, BPCL, IOC) पर दबाव बढ़ता है कि वो भी महंगा कच्चा तेल खरीदने पर पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ाएं. ऐसे में पेट्रोल और डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ जाता है, जिससे महंगाई बढ़ने का डर होता है.

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    (3) बढ़ेगा देश का करंट अकाउंट डेफिसिट- भारत अपनी जरूरतों का करीब 82 फीसदी क्रूड खरीदता है. ऐसे में क्रूड की कीमतें बढ़ने से देश का करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ सकता है. क्रूड की कीमतें लगातार बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल उसी रेश्‍यो में महंगा होगा, जिससे करंट अकाउंट डेफिसिट की स्थिति बिगड़ेगी. देश की अर्थव्यवस्था पर उल्टा असर पड़ने से आम आदमी भी प्रभावित होता है.

    आपको बता दें कि किसी देश के करंट अकाउंट डेफिसिट यानी (सीएडी) से पता चलता है कि उसने गुड्स, सर्विस और ट्रांसफर्स के एक्सपोर्ट के मुकाबले कितना ज्यादा इंपोर्ट किया है. यह जरूरी नहीं है कि करंट अकाउंट डेफिसिट देश के लिए नुकसानदेह ही होगा.

    भारत जैसे विकासशील देशों में लोकल प्रॉडक्टिविटी और फ्यूचर में एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए शॉर्ट टर्म में करंट अकाउंट डेफिसिट हो सकता है. लेकिन लॉन्ग टर्म में करंट अकाउंट डेफिसिटी इकनॉमी का दम निकाल सकती है.



    करंट अकाउंट डेफिसिट को घटाने के उपाय बहुत कम रह गए हैं, क्योंकि हर हाल में इंपोर्ट होने वाली चीजों की कीमत बढ़ रही है. इंडियन इकनॉमिक हालत को देखते हुए इसका सीएडी 2.5 फीसदी होना चाहिए.

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    (4) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले आएगी रुपये में कमजोरी-एक्सपर्ट्स का कहना है कि आगे भी क्रूड ऐसे ही महंगा होता रहा तो करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने के साथ ही रुपये में कमजोरी आती दिख सकती है. फिलहाल अभी डॉलर के मुकाबले रुपया स्टेबल है और इस पर ज्यादा असर नहीं दिखा है.



    (5) आम आदमी की जेब पर भी बढ़ेगा बोझ- केडिया कमोडिटीज के मैनेजिंग डायरेक्टर, अजय केडिया ने न्यूज18 हिन्दी को बताया है कि विदेशी बाजार में कच्चा तेल महंगा होने से भारत में पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ सकते है. भारत, सऊदी अरब का दूसरा बड़ा ग्राहक है. ऐसे में इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत पर भी पड़ेगा.

    उन्होंने कहा सितंबर महीने में कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. कच्चा तेल महंगा होने का असर रुपये पर भी पड़ेगा और रुपये में 5 से 8 फीसदी तक कमजोरी आ सकती है.

    महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपये से अगले 10 दिनों में देश में पेट्रोल की कीमतों में 7 रुपये तक बढ़ोतरी हो सकती है.

    Tags: Business news in hindi, Crude oil, Crude oil prices, Crude price, Discount on crude oil

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