पानी से सस्ता हुआ कच्चा तेल, आई 29 साल की सबसे बड़ी गिरावट

पानी से सस्ता हुआ कच्चा तेल, आई 29 साल की सबसे बड़ी गिरावट
कच्चे तेल के दामों में 29 साल की सबसे बड़ी गिरावट आई है

पिछले हफ्ते क्रूड की कीमतों में 11 फीसदी की गिरावट आई है. ब्रेंट क्रूड के दाम गिरकर 27 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गए है. इस भारी गिरावट के बाद कच्चा तेल पानी से भी सस्ता हो गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 21, 2020, 2:56 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना की वजह से दुनियाभर में थमती बिजनेस एक्टिविटी (Business Activity) की वजह से घटी डिमांड और सऊदी अरब, ईरान और रूस के बीच प्राइस वॉर (Price War) के चलते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है. यह साल 1991 के बाद की किसी भी सप्ताह की सबसे बड़ी गिरावट है. CNBC के मुताबिक, पिछले हफ्ते क्रूड की कीमतों में 11 फीसदी की गिरावट आई है. ब्रेंट क्रूड के दाम गिरकर 27 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गए है. इस भारी गिरावट के बाद कच्चा तेल पानी से भी सस्ता हो गया है.

आपको बता दें कि भारत अपनी जरूरत के 83 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और इसके लिए इसे हर साल 100 अरब डॉलर देने पड़ते हैं. कमजोर रुपया भारत का आयात बिल और बढ़ा देता है और सरकार इसकी भरपाई के लिए टैक्स दरें ऊंची रखती है.

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पानी से भी सस्ता हुआ कच्चा तेल- एंजेल कमोडिटी (Angel Commodity) की रिपोर्ट के मुताबिक, कीमतों के लिहाज से देखें तो एक लीटर कच्चा तेल का दाम एक लीटर पैकेज्ड पानी की बोतल से भी नीचे पहुंच गया है.



दुनिया में सबसे ज्यादा कच्चा तेल निर्यात करने वाला देश सऊदी अरब है. उसने एक साल में 182.5 अरब डॉलर का कच्चा तेल निर्यात किया. कुल कच्चे तेल के निर्यात में उसकी हिस्सेदारी 16.1% है.
दुनिया में सबसे ज्यादा कच्चा तेल निर्यात करने वाला देश सऊदी अरब है. उसने एक साल में 182.5 अरब डॉलर का कच्चा तेल निर्यात किया. कुल कच्चे तेल के निर्यात में उसकी हिस्सेदारी 16.1% है.


मौजूदा रेट के मुताबिक एक बैरल कच्चा तेल भारतीय रुपये में 2000 रुपये का पड़ रहा है. एक बैरल में 159 लीटर होते हैं. इस तरह से देखें तो एक लीटर क्रूड का दाम 13 रुपये प्रति लीटर से भी कम पड़ रहा है. वहीं अगर, देश में पैकेज्ड पानी की एक बोतल का दाम देखें तो 20 रुपये है.

अब सवाल उठता है कि क्या और सस्ता होगा पेट्रोल-डीज़ल इस पर एक्सपर्ट्स का कहना है कि पेट्रोल के दाम कई चीजों से तय होते है. इसमें एक कच्चे तेल भी है. इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद भारत में उस अनुपात में पेट्रोल-डीजल की कीमतें क्यों नहीं घटतीं? इसकी दो बड़ी वजह है-

पहली वजह-भारत में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला भारी टैक्स है. वहीं, दूसरी वजह डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी है. आपको बता दें कि पेट्रोल पर फिलहाल  19.98 रुपये एक्साइज ड्यूटी लगती है. वैट के तौर पर  15.25 रुपये वसूले जाते है.

पेट्रोल पंप के डीलर को 3.55 रुपये कमीशन दिया जाता है. राज्यो में वैट की दरें अलग-अलग हैं. यह रेंज 15 रुपये से लेकर 33-34 रुपये तक है. इसलिए राज्यों पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी अलग-अलग हैं. एक लीटर डीजल पर यह टैक्स लगभग 28 रुपये का पड़ता है. यानी पेट्रोल-डीजल की कीमत का आधा से ज्यादा हिस्सा टैक्स का है.

दूसरी वजह यानी रुपये की कमजोरी की बात करते हैं. इकनॉमी में लगातार गिरावट के साथ ही हमारा रुपया भी लगातार कमजोर होता जा रहा है. दिसंबर 2015 में हम एक डॉलर के बदले 64.8 रुपये अदा करते थे. लेकिन अब ये 74 रुपये से ज्यादा हो गया हैं. सीधे-सीधे 15 फीसदी अधिक कीमत देनी पड़ रही है. इसलिए अंतरराष्ट्रीय क्रूड हमारे लिए सस्ता होकर भी महंगा पड़ रहा है और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए यह बोझ बना हुआ है.
First published: March 21, 2020, 2:41 PM IST
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