पानी से सस्ता बिक रहा है दुनियाभर में कच्चा तेल, कीमतों में 21 साल की सबसे बड़ी गिरावट

पानी से सस्ता बिक रहा है दुनियाभर में कच्चा तेल, कीमतों में 21 साल की सबसे बड़ी गिरावट
अमेरिकी कच्चा तेल दो दशक से अधिक के निचले स्तर पर पहुंचा

कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी ने दुनिया को हिलाकर रख दिया है. इस संकट में कच्चे तेल (Crude Oil Price) के दाम गिरकर 15 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गए है. इस भारी गिरावट के बाद कच्चा तेल पानी से भी सस्ता हो गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 20, 2020, 1:25 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोनो वायरस (Coronavirus) की वजह से दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियां ठप हैं. कोरोना वायरस प्रकोप और भंडारण क्षमता के न होने के चलते अमेरिकी कच्चा तेल (Crude Oil) सोमवार को 21 साल के अपने निचले स्तर 15 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर आ गए है. इस गिरावट के बाद दुनियाभर में कच्चा तेल पानी से भी सस्ता हो गया है. आपको बता दें कि भारत अपनी जरूरत के 83 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है और इसके लिए इसे हर साल 100 अरब डॉलर देने पड़ते हैं. कमजोर रुपया भारत का आयात बिल और बढ़ा देता है .और सरकार इसकी भरपाई के लिए टैक्स दरें ऊंची रखती है.

सिर्फ 7 रुपये में बिक रहा है एक लीटर कच्चा तेल -एक लीटर कच्चे तेल के दाम पानी की बोतल से भी नीचे पहुंच गया है. मौजूदा रेट के मुताबिक एक बैरल कच्चा तेल भारतीय रुपये में 1140 रुपये का पड़ रहा है. एक बैरल में 159 लीटर होते हैं. इस तरह से देखें तो एक लीटर क्रूड का दाम 7.13 रुपये प्रति लीटर से भी कम पड़ रहा है. वहीं अगर, देश में पैकेज्ड पानी की एक बोतल का दाम देखें तो 20 रुपये है.

अंतर्राष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 4.1 प्रतिशत गिरकर 26.93 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, हालांकि बाद में इसमें थोड़ा सुधार हुआ और यह 28.11 डॉलर के भाव पर था. हाल के सप्ताहों में लॉकडाउन और यात्रा प्रतिबंधों के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की मांग घटी है.



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कच्च्चे तेल को लेकर चल रहा प्राइस वॉर
मार्च महीने से ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के भाव में लगातार नरमी देखने को मिल रही है. कच्चे तेल की कटौती को लेकर सऊदी अरब और रूस कोई सहमति नहीं बन सकी थी. इसके बाद सऊदी अरब ने अपने प्रोडक्शन में 1.20 करोड़ बैरल प्रति दिन का इजाफा कर दिया था.

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पिछले हफ्ते सऊदी अरब के नेतृत्व वाले ओपेक और रूस के नेतृत्व वाले गैर-ओपेक तेल उत्पादक देशों ने अगले दो महीनों में उत्पादन में 97 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती करने के लिए एक समझौता किया था. इस पहल का मकसद कोरोना वायरस की रोकथाम के लिये जारी लॉकडाउन था सऊदी अरब और रूस के बीच कीमत युद्ध के कारण कच्चे तेल के भाव में आयी गिरावट का रोकना था. ओपेक और इसके सहयोगी देशों द्वारा तेल उत्पादन में ऐतिहासिक कटौती के समझौते के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में रिकवरी शुरू नहीं हो पायी है.

कोरोना वायरस के कारण दुनिया के कई देशों में औद्योगिक गतिविधियां बाधित रहने के चलते आई खपत में भारी कमी के कारण लंबे समय से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है.

10 डॉलर तक कीमत पहुंचने का अनुमान
पिछले दिनों एक रिपोर्ट आई थी जिसमें ये अंदेशा जताया गया था कि अगर ओपेक प्लस देशों की बैठक लंबे समय के लिए टल जाती है तो कच्चे तेल की कीमत 10 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. मांग में जबरदस्त गिरावट और अधिक तेल के स्टोरेज को लेकर पैदा हुई अनिश्चितताओं के चलते भाव में यह गिरावट आई है. कच्चे तेल का ग्लोबल स्टोरज इस समय अपनी सीमा तक भर गया.

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