क्रिप्टोकरंसी से होने वाली कमाई को अपने ITR में कैसे दिखाएं? यहां जानिए

बिटकॉइन

बिटकॉइन

बिटकॉइन (Bitcoin) जैसे क्रिप्टोकरंसी में को लेकर इस बात का भी कनफ्रयूज़न होता है कि क्या इसे भी इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय रिपोर्ट करना होगा. जानकारों का कहना है कि यह कई बातों पर निर्भर करता है. किप्टोकरंसी से होने वाली कमाई और उसके तरीके जैसे कुछ बातों का ध्यान रखना होता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 10:16 AM IST
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नई दिल्ली. इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की डेडलाइन में अब बस दो दिन दिन बचा है. असेसमेंट ईयर 2019-20 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की अंतिम तारीख 10 जनवरी 2021 है. टैक्सपेयर्स को इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के बारे में लोगों को कई बातों को लेकर कनफ्रयूज़न भी रहता है. बिटकॉइन (Bitcoin) जैसे क्रिप्टोकरंसी (Cryptocurrency) से होने वाली कमाई के बारे में भी आईटीआर में जानकारी देने को लेकर कई लोगों को कनफ्रयूज़न रहता है. आज हम आपको इसी के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं.

इनकम टैक्स नियमों के तहत, क्रिप्टोकरंसी से मिलने वाले लाभ को कैपिटल गेन्स या बिजनेस इनकम की श्रेणी में माना जाता है. इस मामले से जुड़े एक जानकार ने बताया कि दो मामलों में ही क्रिप्टोकरंसी से जुड़े लेन-देन को इनकम टैक्स में रिपोर्ट किया जाता है.

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क्रिप्टोकरंसी से फायदे/नुकसान का मामला कैपिटल गेन्स का बनता है
उन्होंने बताया कि सबसे पहले यह ध्यान देना होगा कि अगर कोई टैक्सपेयर क्रिप्टोकरंसी होल्ड करता है और उनक टैक्सेबल इनकम 50 लाख रुपये से ज्यादा है तो उन्हें अपने आईटीआर में क्रिप्टोकरंसी को एक ऐसट के तौर पर रिपोर्ट करना होगा. वहीं, जब वो क्रिप्टोकरंसी की खरीद या बिक्री करते हैं तो इससे होने वाले फायदे या नुकसान को ‘इनकम फ्रॉम कैपिटग गेन्स’ के तौर पर दिखाना होगा. 36 महीने से भी कम समय के लिए किसी एसेट को होल्ड करने पर होने वाले फायदे/नुकसान को छोटी अवधि वाला और इससे ज्यादा समय तक होल्ड करने पर फायदे/नुकसान को लंबी अवधि माना जाएगा.

माइनिंग या इन्वेस्टिंग के आधार पर तय होता है टैक्स

एक अन्य जानकार इस बारे में आगे की जानकारी देते हुए बताते हैं कि बिटकॉइन होल्ड करने वाले दो तरह के होते हैं. पहल माइनर्स और दूसरे इन्वेस्टर्स होते हैं. माइनर्स को बिटकॉइन ट्रांजैक्शन की माइनिंग से कमाई होती है. इन माइन कॉइन की बिक्री करने पर अधिग्रहण खर्च नहीं होता है. सेक्शन 55 में भी अधिग्रहण खर्च के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है. ऐसे में माइन किए गए बिटकॉइन पर कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं वसूला जा सकेगा.



अगर किसी ने बिटकॉइन में इन्वेस्ट किया है तो निवेशक अधिग्रहण खर्च और खरीदे गए बिटकॉइन को बेचते समय सेल वैल्यू तय किया जाता है. इसके बाद बिटकॉइन की इस बिक्री पर होने वाली फायदे/नुकसान पर शॉर्ट/लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होगा.

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टैक्सपेयर्स को यह भी ध्यान देना होगा कि कैपिटल गेन्स वाले व्यक्ति या क्रिप्टोकरंसी के जरिए बिजनेस इनकम प्राप्त करने वाले लोगों को आईटीआर-2 और आईटीआर-3 फॉर्म उनके रिटर्न भरने के लिए होता है.
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