बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में पैसा लगाने वालों के साथ हुआ बड़ा धोखा, जानिए कैसे?

बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में पैसा लगाने वालों के साथ हुआ बड़ा धोखा, जानिए कैसे?
क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency)

बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) भारत समेत दुनियाभर में बहुत फेमस है. लेकिन एक बड़ा खुलासा हुुआ है. क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी एक कंपनी के संस्थापक का हैरान करने वाला कबूलनामा सामने आया है. इस कबूलनामे में उन्होंने अनजान निवेशकों को फंसाने और चपत लगाने की बात स्वीकार की है.

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नई दिल्ली. क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) से जुड़ा एक मामला सामने आया है. क्रिप्टोकरेंसी से जुड़ी एक कंपनी के संस्थापक का हैरान करने वाला कबूलनामा सामने आया है. इस कबूलनामे में उन्होंने अनजान निवेशकों को फंसाने और चपत लगाने की बात स्वीकार की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक,  संस्थापक ने बताया कि वो अपनी कंपनी के जरिेए नए निवेशकों को $2.5 करोड़ (करीब 190 करोड़ रुपये) का चूना लगा चुका है.

क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी?-आपको बता दें कि क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल करेंसी होती है, जो ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित है. इस करेंसी में कूटलेखन तकनीक का प्रयोग होता है. इस तकनीक के जरिए करेंसी के ट्रांजेक्शन का पूरा लेखा-जोखा होता है, जिससे इसे हैक करना बहुत मुश्किल है. यही कारण है कि क्रिप्टोकरेंसी में धोखाधड़ी की संभावना बहुत कम होती है. क्रिप्टोकरेंसी का परिचालन केंद्रीय बैंक से स्वतंत्र होता है, जो कि इसकी सबसे बड़ी खामी है.

अंग्रेजी के बिजनेस अखबार इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, रॉबर्ट फर्कास और उनके दो अन्य साथियों ने सेंट्रा टेक नामक कंपनी की स्थापना की. इसमें उनके साथ सोहराब शर्मा और रेमंड ट्रपनी भी शामिल हुए. इन पर साल 2018 में धोखाधड़ी और वित्तीय जालसाजी का आरोप लगा था. उन्होंने निवेशकों को गुमराह किया था.



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इन तीनों ने पहले फ्लोरिडा की मियामी एक्सोटिक्स में एक साथ काम किया था. इसके बाद तीनों ने सेंट्रा टेक की स्थापना की. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जल्दी पैसा जुटा लिया. उन्होंने पूर्व बॉक्सर फ्लॉयड मेवेदर और म्यूजिक प्रोड्यूसर डीजे खालिद के नाम को जोड़ा.

उन्होंने और भी कई किस्म के झूठ बोले, जिसमें उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी के सीईओ हार्वर्ड स्कूल से शिक्षित हैं. साथ ही उन्होंने बिजनेस से जुड़ी कई अन्य गलत जानकरियां भी दीं. उन्होंने अपनी क्रिप्टोकरेंसी को पंजीकृत तक नहीं करवाया था.

ऐसे हुआ निवेशकों के साथ धोखा- निवेशकों से कहा गया था कि वे वीजा या मास्टरकार्ड द्वारा भुगतान स्वीकार करने वाले किसी भी मंच पर डिजिटल करेंसी के जरिए भुगतान कर सकते हैं. आपको बता दें कि शर्मा और ट्रपनी के खिलाफ नंवबर में अमेरिकी अदालत में मुकदमा शुरू होगा.

फर्कास को मैनहैटन की अदालत ने गुनाहगार माना है. वो अमेरिका की निचली अदालत में दोषी पाए गए हैं. उन्होंने सिक्योरिटीज की धोखाधड़ी और जालसाजी का अपराधी माना गया है. कोर्ट ने उन्हें सजा सुना दी है.

उन्हें एक दशक की जेल की सजा सुनाई गई है, मगर अभियोजना पक्ष की दलील और दरख्वास्त के आधार पर उनकी सजा 70 से 87 महीने तक रह सकती है. उन पर $2.5 लाख (करीब 1.9 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया जाएगा.

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