गांव में खुलते हैं ई-ग्रामीण स्टोर्स: अब मिली बड़ी सफलता, किया 100 करोड़ का कारोबार

CSC E Grameen Stores का टर्नओवर 100 करोड़ पहुंचा
CSC E Grameen Stores का टर्नओवर 100 करोड़ पहुंचा

सरकार की ओर से चलाए जा रहे रूरल ई-कॉमर्स वेंचर की बड़ी सफलता मिली है. ई-ग्रामीण स्टोर्स का टर्नओवर 100 करोड़ पर पहुंच गया है. इस पर ट्रांजेक्शन की संख्या करीब 10 लाख तक पहुंच गई है.

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  • Last Updated: November 5, 2020, 9:15 AM IST
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नई दिल्ली: सरकार की ओर से चलाए जा रहे रूरल ई-कॉमर्स वेंचर की बड़ी सफलता मिली है. ई-ग्रामीण स्टोर्स का टर्नओवर 100 करोड़ पर पहुंच गया है. इस पर ट्रांजेक्शन की संख्या करीब 10 लाख तक पहुंच गई है. बता दें सिर्फ 8 महीने में ई-ग्रामीण स्टोर्स को ये उपलब्धि मिली है. इस बड़ी सफलता के बाद अब ई-ग्रामीण अपने कामकाज को आगे बढ़ाने के लिए टाटा क्रोमा और HDFC Bank के साथ कारोबार करने जा रहे हैं. CSC E-governance services के CEO दिनेश त्यागी ने इस बारे में जानकारी दी.आपको बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) में ई-ग्रामीण स्टोर खोले जाते है. इसमें शहरों की तर्ज पर गांवों में भी फल, सब्जी, किराना का सामान, दूध व उसके ब्रांडों की होम डिलीवरी भी होती है. इसके जरिए किसान गांवों में ही घर बैठे बिक्री कर सकेंगे. सीएससी संचालकों और उससे जुड़े युवाओं को गांव में ही रोजगार मिलता है.

किसान अपना माल बेचने के लिए भी इन्हीं सेंटरों पर संपर्क कर सकते हैं. इससे आमजन को भी फायदा होगा. सीएससी से क्रय और विक्रय दोनों किए जा सकेंगे. किसान और ग्राहक दोनों इसका फायदा उठा सकेंगे.ई-ग्रामीण स्टोर से जुड़ने के लिए पहले प्ले स्टोर में जाकर ई-ग्रामीण स्टोर एप डाउनलोड करना होगा.इसमें दी गई सूची के अनुसार अपने गांव के नजदीकी सेंटर का चयन करना होगा.

इसी एप के माध्यम से आवश्यक सामान का आर्डर करना होगा. वहीं, दूरी के आधार पर वीएलई सर्विस चार्ज ले सकेगा.गांव और कस्बों में ई-ग्रामीण स्टोर खोले जा रहे हैं. जहां से सीएससी संचालक गैर सरकारी और सरकारी सेवाएं दे सकेंगे. इसका मुख्य उद्देश्य गांव लोगों को सुविधाएं और रोजगार उपलब्ध कराना है.



समझौते पर हो गए सिग्नेचर
CEO दिनेश त्यागी के मुताबिक, क्रोमा और एचडीएफसी बैंक के साथ पिछले हफ्ते समझौतों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं. तो जल्द ही हम इन कंपनियों के साथ मिलकर कारोबार शुरू करेंगे. आपको बता दें सीएससी गवर्नेंस सर्विसेज के तहत 3,00,000 से भी ज्यादा CSC आते हैं.

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1 लाख 20 हजार स्थानों पर काम कर रहा CSC
CSC को डिजिटल कियोस्क भी कहा जाता है, जिसके अंदर ग्रामीण और अर्द्धशहरी क्षेत्रों को शामिल किया जाता है. CSC ई-ग्रामीण स्टोर की शुरुआत करीब अप्रैल में हुई थी. इस समय वर्तमान में यह करीब 1 लाख 20 हजार स्थानों पर काम कर रही है. पेप्सी और कोकाकोला जैसी कई बड़ी कंपनियों के साथ इनका समझौता पहले ही हो चुका है.

ग्रामीण लोगों को मिली काफी मदद
इसके अलावा CEO दिनेश त्यागी ने कहा, "सीएससी ई-ग्रामीण स्टोर से लोगों को खासकर ग्रामीण इलाकों के लोगों को काफी मदद मिली है. ये लोग कमोडिटीज खरीदने के लिए ट्रेडिशनल दुकानों और शहर के मॉल में नहीं जा सकते."

ग्रामीण ग्राहकों को मिलेगा क्रोमा का सामान
बता दें CSC का जब क्रोमा और HDFC के साथ करार हो जाएगा तो ग्राहकों को यहां पर इलेक्टॉनिक्स सामान भी आराम से मिल सकेगा. यानी गांव में रहने वाले लोगों को भी क्रोमा का सामान आसानी से मिल जाएगा. साथ ही HDFC Bank ग्राहकों को EMI की सुविधा भी देगा.

HDFC Bank के जरिए कर सकेंगे पेमेंट
HDFC Bank के साथ समझौता फाइनल हो जाने के बाद ग्राहकों को लोन लेने में आसानी रहेगी, जिसका पेमेंट वो आसानी से EMI में कर सकेंगे. जब आप क्रोमा से कोई सामान खरीदेंगे तो एचडीएफसी बैंक प्रोडक्ट की कीमत के बराबर रकम क्रोमा को चुका देगा. इसके बाद में आप EMI के जरिए पेमेंट कर सकेंगे और फिर सीएससी ग्राहक के पते पर प्रोडक्ट पहुंचाएगा और लगाएगा.

सभी प्रोडक्ट की होगी डिलीवरी
त्यागी ने कहा, "इस जुड़ाव से हम ग्रामीण इलाकों में भी ग्राहकों को उन प्रोडक्ट की डिलीवरी कर सकेंगे, जिन्हें वे अब तक खरीद नहीं पाते थे. इसस अर्थव्यवस्था में खासकर ग्रामीण भारत में मांग बढ़ेगी."

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लॉकडाइन में ई-ग्रामीण स्टोर को मिला बढ़ावा
मार्च में देशभर में लॉकडाउन के बाद सीएससी ईग्रामीण स्टोर को बढ़ावा मिला. इसकी वजह यह थी कि तब प्रोडक्ट की सप्लाई पर काफी असर पड़ा था. ईग्रामीण स्टोर मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी के तहत आते हैं. लॉकडाउन के दौरान इन स्टोरों ने लोगों के घर तक जरूरी सामान पहुंचाने के लिए आसपास की राशन की दुकानों से भी मदद ली थी.
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