ITR के लिए आपके पास भी आया है मैसेज ताे हाे जाएं सावधान, रिटर्न नहीं आपकी सेविंग उड़ाने का है प्लान

आप गाैर ना करे ताे शायद आपकाे भी यही लगेगा कि आयकर विभाग की ई-फाइलिंग पेज ही है

फाेन पर एसएमएस के जरिए भेजे जा रहे मैसेज में इनकम टैक्स रिफंड के लिए एप्लिकेशन सब्मिट करने के लिए एक लिंक भेजी जा रही है. यदि आप गाैर ना करे ताे शायद आपकाे भी यही लगेगा कि आयकर विभाग की ई-फाइलिंग पेज ही है.

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    नई दिल्ली. मार्च क्लाेजिंग करीब आने के साथ ही लाेग इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने में जुटे हुए है. जिसके बाद रिफंड की प्राेसेस शुरू हाेती है. लेकिन पिछले कुछ समय से लाेगाें के पास रिफंड क्लेम करने काे लेकर एक मैसेज आ रहा है. ताे यदि आपके पास भी वाे मैसेज आया है ताे सावधान हाेने की जरूरत है साथ ही इसमें दी जा रही लिंक काे ना ताे ओपन करे ना ही अपनी काेई भी जानकारी शेयर करे. वर्ना रिटर्न लेने के चक्कर में आपकी सेविंग्स ही ग़ायब ना हाे जाए. दिल्ली स्थित थिंकिंग टैंक साइबरपीस फाउंडेशन के साथ साइबर सिक्याेरिटी फर्म ऑटाेबाेट इन्फाेसिस ने अपनी रिपाेर्ट में इसका खुलासा किया है. ताे किस तरह की है यह नई धाेखाधड़ी, इसे कैसे पहचान सकते है और इससे बच सकते है आप, चलिए जानते है-


    इस तरह का है मैसेज


    फाेन पर एसएमएस के जरिए भेजे जा रहे मैसेज में इनकम टैक्स रिफंड के लिए एप्लिकेशन सब्मिट करने के लिए एक लिंक भेजी जा रही है. यदि आप गाैर ना करे ताे शायद आपकाे भी यही लगेगा कि आयकर विभाग की ई-फाइलिंग पेज ही है. यहां आपकाे प्राेसीड टू द वेरिफिकेशन स्टेप्स बटन क्लिक करने का ऑप्शन आता है. जैसे ही आप इसे क्लिक करते है इसके बाद आपकाे यह जानकारी सामने दिखाई देती है जिसमें पूरा नाम, आधार और पैन कार्ड नंबर, पिनकाेड, माेबाइल नंबर, जेंडर, ईमेल एड्रेस, जन्मतिथि आदि. इसके बाद बैंकिंग इंफॉर्मेशन जैसे बैंक अकाउंट नंबर, कार्ड नंबर, आईएफएससी काेड, सीवीवी, पिन जैसी जानकारी भरने काे कहा जाता है.


    इसके बाद यूजर्स काे एक पेज पर रि-डायरेक्टर कर दिया जाता है. जहां उनसे पूर्व में भरी जानकारी काे कंफर्म करने काे कहा जाता है. इसके बाद सब्मिट करते ही यूजर एक झूठे बैंकिंग लॉगिन पेज पर पहुंच जाता है यह भी दिखने में असली जैसा ही रहता है.


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    यहां आपसे ऑनलाइन बैंकिंग के लिए यूजरनेम और पासवर्ड आदि भरने काे कहा जाता है. जाे भी इसमें जानकारी देता है उसके बाद यूजर से एक हिंट प्रश्न, उत्तर, और प्राेफाइल पासवर्ड के साथ सीआईएफ नंबर दर्ज करने काे कहा जाता है. इसे दर्ज करते ही आईटीआर वेरिफिकेशन पूरा हाेने के लिए एक एंड्रायड माेबाइल ऐप डाउनलाेड करन काे कहा जाता है.


    इस ऐप काे सभी डिवाइस की परमिशन देने के लिए रिक्वेस्ट की जाती है, हरे रंग के डाउनलाेड लिंक पर क्लिक करने के बाद सर्टिफिकेट. apk नाम की ऐप डाउनलाेड हाेना शुरू हाे जाती है. ऐप डाउनलाेड हाेते है आपके खाते से पैसा निकाल लिया जाता है.


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    इन बैंकाे के नाम का हाे रहा इस्तेमाल


    रिपाेर्ट के अनुसार इस फर्जीवाड़े के लिए एचडीएफसी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक,  स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक के नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है. लाेगाें काे भेजे जाने वाले संदिग्ध लिंक यूएस और फ्रांस से तैयार हाे रहे है जिसमें यूजर की पर्सनल के साथ- साथ बैकिंग की पूरी जानकारी इकठ्ठा की जा रही है. अगर काेई यूजर इस प्रकार के जाल में फंस जाता है ताे उसकाे बहुत बड़ा नुकसान हाे सकता है. मैसेज के लिए शेयर किए लिंक काेई डाेमेन नेम नहीं है, वहीं यह ना ताे भारत सरकार के साथ लिंक है. जानकार बताते है कि इस कैंपेन से जुड़े सभी आईपी एड्रेस कुछ थर्ड पार्टी डेडिकेटेड क्लाउड हाेस्टिंग प्राेवाइडर्स के हैं.


    ऐसे कर सकते है पहचान


    क्याेंकि ठगी करने वाले इतने शातिर है कि जाे पेज वाे तैयार कर रहे है वाे प्रथम दृष्टया ठीक सरकार ई फाइलिंग पेज जैसा ही लगता है इसलिए कई लाेग घाेखें में जल्दी आ जाते है लेकिन कुछ बेसिक चीजें है जिनका ध्यान रखकर शुरूआत में ही हम पहचान सकते है कि यह जालसाजी के लिए भेजी गई लिंक है. मसलन इसमें भेजी गई साइट की लिंक में https नहीं हाेगा सिर्फ सामान्य http प्राेटाेकॉल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे साफ हाेता है कि काेई भी व्यक्ति नेटवर्क या इंटरनेट ट्रैफिक काे राेक सकता है और यूजर्स की जानकारी का गलत इस्तेमाल करने के लिए उनकी जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकता है. इसके अलावा इस तरह के फर्जीवाड़े में गूगल प्ले की जगह किसी थर्ड पार्टी साेर्स से ऐप डाउनलाेड करने काे कहा जाता है. ताे यदि आप चाहे ताे शुरूआत में ही इनका ध्यान रखकर इससे बच सकते है.

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