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साइरस मिस्त्री ने हाई कोर्ट से कहा- NCLAT से परविार को​ मिलनी चाहिए और राहत

भाषा
Updated: February 17, 2020, 8:21 PM IST
साइरस मिस्त्री ने हाई कोर्ट से कहा- NCLAT से परविार को​ मिलनी चाहिए और राहत
साइरस मिस्त्री

मिस्त्री के परिवार की टाटा संस में 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है और उन्होंने हाई कोर्ट में एक ‘क्रॉस अपील’ दायर की है.

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मुंबई. उच्चतम न्यालालय द्वारा टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में साइरस मिस्त्री (Cyrus Mistry) को बहाल करने के आदेश पर रोक लगाने के बाद अब मिस्त्री ने शीर्ष अदालत का रुख करते हुए NCLAT के आदेश में कई विसंगतियों को दूर करने की मांग की है और कहा है कि न्यायाधिकरण से उनके परिवार को और अधिक राहत मिलनी चाहिए थी. मिस्त्री के परिवार की टाटा संस में 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है और उन्होंने अदालत में एक ‘क्रॉस अपील’ दायर की है. आमतौर पर क्रॉस अपील उसे कहते हैं, जिसमें किसी फैसले के कुछ पहलुओं के खिलाफ अपील की जाती है.

मिस्त्री का टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में किया गया था बहाल
प्रधान न्यायाधीश अरविंद बोबड़े की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीश की पीठ ने 25 जनवरी को राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें मिस्त्री को टाटा संस के अध्यक्ष के रूप में बहाल किया गया था. न्यायालय ने टाटा समूह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह रोक लगाई गई है.





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मिस्त्री ने याचिका में टाटा के साथ समूह के संबंधों को “60 साल से पुराने अर्ध-साझेदारी संबंध” के रूप में बताया है, जिसके पास टाटा संस की इक्विटी शेयर पूंजी का 18.37 फीसदी हिस्सा है और जिस हिस्सेदार की कीमत 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक है.”

कई विसंगतियों को ठीक करने की मांग
याचिका के मुताबिक मिस्त्री ने NCLAT के आदेश में कई विसंगतियों को ठीक किए जाने की मांग की है, जिनमें अल्पसंख्यक शेयरधारकों के कथित उत्पीड़न पर ध्यान नहीं देने के साथ ही टाटा संस को एक निजी लिमिटेड कंपनी में एक पद के रूप में परिवर्तित करना शामिल है. यह बदलाव मिस्त्री को 24 अक्टूबर, 2016 को अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद हुआ.

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न्यायाधिकरण के फैसले के बाद मिस्त्री ने कहा था कि वह टाटा संस में कोई कार्यपालक भूमिका नहीं चाहते हैं, लेकिन वह केवल कॉरपोरेट गवर्नेंस के मानदंडों के बनाए रखना और टाटा संस में परिवार के निवेश को सुरक्षित करना चाहते हैं.

14 फरवरी को दायर की गई याचिका
उच्चतम न्यायालय में 14 फरवरी को दायर की गई 45 पेज वाली इस याचिका में कहा गया है कि न्यायाधिकरण ने टाटा संस के पूर्वाग्रहपूर्ण आचरण को स्पष्ट रूप से पाया है, लेकिन उसने उनके परिवार को टाटा संस के निदेशक मंडल में आनुपातिक प्रतिनिधित्व सहित राहतें नहीं दी हैं जो महत्वपूर्ण है.

याचिका में कहा गया कि कई ऐसे प्रावधान हैं जो बहुसंख्यक शेयरधारकों को पक्षपातपूर्ण आचरण में सक्षम बनाते हैं. इसमें अल्पसंख्यक शेयरधारकों के हितों की रक्षा की मांग की गई है.

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First published: February 17, 2020, 8:21 PM IST
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