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डेयरी फार्मिंग ने इस किसान को किया मालामाल, हर महीने होता है ₹3 लाख का शुद्ध मुनाफा

यूरिया, डिटरजेंट और रिफाइन  आदि से नकली दूध तैयार किया जा रहा है

यूरिया, डिटरजेंट और रिफाइन आदि से नकली दूध तैयार किया जा रहा है

राजस्थान के जयपुर जिले के गांव लोहरवाड़ा के निवासी रतन लाल यादव दूध बेचकर प्रतिदिन कुल 24,960 रुपये कमाते है.जबकि प्रतिदिन का कुल खर्चा 14,900 रुपये आता है. इस लिहाज से उन्हें हर महीने 3 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो जाता है

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    नई दिल्ली.आज के आधुनिक दौर में पशुपालन व्यवसाय अगर लगन और समझदारी के साथ किया जाये, तो आप खेतीबाड़ी से भी ज्यादा आमदनी कमा सकते हैं. राजस्थान के जयपुर जिले के गांव लोहरवाड़ा के निवासी रतन लाल यादव का तजुर्बा कुछ ऐसी ही कहानी बयां करता है. इन्होंने न्यूज 18 अन्नदाता की टीम से खास बातचीत में बताया कि कुछ साल पहले उन्होंने 5 पशुओं से डेयरी व्यवसाय की शुरुआत की थी. वहीं अब इनके पास में 80 पशु हैं. जिसमें से 35 पशु दूध देने वाले, 16 पशु बिना दूध देने वाले और 29 पशुओं के छोटे बच्चे हैं. दूध देने वाले 35 पशुओं से प्रतिदिन 416 लीटर दूध प्राप्त होता है. जिसको यह जयपुर में बेंच देते हैं. वहां दूध का बाजार में औसतन मूल्य 60 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से मिलता है. इस तरह उनकी प्रतिदिन कुल आमदनी 24,960 रुपये होती है.जबकि प्रतिदिन का कुल खर्चा 14,900 रुपये आता है. इस लिहाज से उन्हें प्रतिमाह 3,01,800 रुपये का शुद्ध मुनाफा हो जाता है

    दूध बेचकर लाखों कमाने का तरीका-

    रतन लाल यादव बताते हैं कि अच्छा मुनाफा कमाने के लिये उन्होंने पशुओं का प्रबंधन सही ढंग से किया है. दूध देने वाले पशुओं को अलग बाड़े में रखा है और दूध न देने वाले पशुओं को अलग बाड़े में रखा है. पशुओं को सर्दी से बचाने के लिये उन्होंने आवास की खिड़कियों पर जूट के बोरे लगाये हैं. इस तरह यह मौसम के हिसाब से पशुओं की उचित आवास व्यवस्था रखते हैं.

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    वह बताते हैं कि वह पशुओं को उनके उत्पादन के अनुसार संतुलित मात्रा में चारा-दाना खिलाते हैं. इसके अलावा दुधारू पशुओं के आहार में हरे और सूखे चारे के साथ-साथ 50 ग्राम खनिज लवण और 30 ग्राम नमक प्रतिदिन देते हैं.

    सर्दी से पशुओं को बचाने के लिये वह उनके आहार में गुड़ और सरसों के तेल की मात्रा बढ़ा देते हैं और समय-समय पर पशुओं को साफ और ताजा पानी पीने को देते हैं. पशुओं को बीमारियों से बचाने के लिये पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार समय-समय पर टीका लगवाते हैं. जिससे पशु स्वस्थ्य रहें और उनसे दूध का अच्छा उत्पादन मिलता रहे

    अनुग्रह तिवारी, न्यूज18 इंडिया

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