निजता, सुरक्षा और व्यापार: जानिए डेटा संरक्षण कानून की अहमियत

डेटा सुरक्षा

डेटा सुरक्षा

2017 में सुप्रीम कोर्ट ने निजता यानी ‘प्राइवेसी’ को एक मौलिक अधिकार करार देते हुए, हमें इस डिजिटल दुनिया में एक सुरक्षा कवच प्रदान किया. किन्तु केवल सुप्रीम कोर्ट के कह देने से हमारी निजता सुरक्षित नहीं हो जाती है. यह दारोमदार, सरकार, कंपनियों और उपयोगकर्ताओं, तीनों पर है.

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नई दिल्ली. एक तरफ सरकार को डेटा संगरक्षण कानून को पारित कर उसे समाज कि वास्तविकताओं के अनुसार लागू करना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ कंपनियों को भी विश्वीय निजता प्रथाओं को मद्दे नज़र रखते हुए ज़रूरत से अनुसार डेटा इखट्टा करना चाहिए. साथ ही साथ उपयोगकर्ताओं को अपनी निजता के प्रति जागरूक हो कर डिजिटल दुनिया मे कदम उठाने चाहिए. हाल ही मे व्हाट्सऐप की नई निजता नीति काफी चर्चा में रही है. इस नई नीति के माध्यम से निजता, व्यापार और सुरक्षा के संगम को समझते है.

नीजि चैट और एंड टू एंड एन्क्रिप्शन

पहले तो यह समझना ज़रूरी है की हमारी निजी चैट एंड टू एंड एन्क्रिप्शन टेक्नोलॉजी के माध्यम से सुरक्षित है. आपके फ़ोन मे ‘सेंड’ बटन को छूते ही आपका सन्देश निरर्थक अक्षरांकीय सन्देश में बदल जाता है जिसे केवल आपके दोस्त के फ़ोन में छुपी डेक्रिप्शन चाभी के माध्यम से ही पढ़ा जा सकता है. मतलब सन्देश भेजने और प्राप्त करने वाले के आलावा कोई तीसरा व्यक्ति फिर चाहे वो कंपनी हो, सरकार हो, या कोई हैकर, कोई भी उस सन्देश को नही पढ़ सकता. वो सन्देश एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्शन के कवच मे सुरक्षित है.

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बिज़नेस चैट

नीजि चैट और बिज़नेस चैट काफी अलग है. जहां नीजि चैट ऐप अपने परिवार या दोस्त यार से करते है, कुछ कंपनियां बिज़नेस चैट के माध्यम से सामान और सेवा बेचती है. अब अगर आपने किसी बिज़नेस अकाउंट से चैट करी तो वो उसको एनालिसिस करने के लिए किसी भी तीसरी कम्पनी को दे सकता है, जिसमे से एक फेसबुक भी है.

यहां हमें समझना चाहिए की कल अगर आप चाहे तो अपने व्हाट्सऐप पर अपने सभी मित्रों से करी गयी बातों को एनालिसिस करके जान सकते है की कितने लोग रात को जागते, या फिर कौन अंग्रेजी मे चैट करना पसंद करता है और कौन हिंदी में. अब इसी तरीके से कंपनियां भी अपनी चैट को एनालाइज करने का प्रयत्न करती है. यहां ज़रूरी यह है कि अगर कंपनियां ऐसा कर रही हैं तो उपभोक्ता को पता होना चाहिए की उनकी चैट कोई एनालाइज कर रहा है तथा उनसे अनुमति ली जानी चाहिए.



व्हाट्सऐप पर बिज़नेस अकाउंट स्पष्ट रूप से इस बात को सामने रखते है की वो आपका डेटा एनालाइज करवाएंगे. अब आपको उनसे व्यापार करना है की नहीं, यह आपकी इच्छा है. बल्कि अगर आपको कोई तकलीफ हो तो आपके पास, बिज़नेस अकाउंट तो ब्लॉक या रिपोर्ट करने का प्रावधान भी है.

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सुरक्षा

एक और ज़रूरी सवाल उठता है की बिज़नेस चैट के आलावा व्हाट्सऐप हमारा डेटा क्यों ले रहा है, इससे केवल व्हाट्सप्प को फायदा है या नागरिकों को भी? पहले तो हमारी नीजि चैट का डेटा व्हाट्सऐप ले ही नही सकता, याद करिये एंड टू एंड एन्क्रिप्शन कवच. इसके अलावा वो हमारा प्रोफाइल फोटो, स्टेटस, लॉगिन टाइम जैसा डेटा स्टोर करते है. लेकिन इसका इस्तेमाल पुलिस को मदद करने मे भी होता है. यह डेटा वो एक वारंट की प्रस्तुति के बाद ही पुलिस के साथ बाटते है जिससे आपराधिक जांच में सहायता मिलती है. अब चैट तो एंड टू एंड एन्क्रिप्टेड है नागरिकों की सुरक्षा के लिए, लेकिन यह बाकी का डेटा फ़र्ज़ी खबर, मादक द्रव्यों का व्यापार, कट्टरता, और बाल यौन शोषण सामग्री फैलाने वाले चोर उच्चक्कों को पकड़ने मे बहुत सहायक सिद्ध होती है.

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डेटा संरक्षण कानून की ज़रूरत

डेटा का इस्तेमाल सभी अच्छे और ख़राब कामों के लिए किया जा सकता है. व्हाट्सऐप की नई निजता नीति कई महत्त्वपूर्ण सवालों के साथ साथ उपभोगता का डेटा, कब, कहाँ, कितना और कैसे इस्तेमाल होता है उसमें पारदर्शिता भी लाती है. क्योंकि बहुत सी कंपनियां यह काम बिना बताये या फिर आटोमेटिक अपडेट के माध्यम से चुप चाप कर रही है.

तो कौन कितना डेटा एकत्र कर उसको कैसे इस्तेमाल कर सकता है उस पर विनियमन की ज़रूरत है. इस दिशा में सरकार द्वारा उठाये गए कदमों को हमारी आर्थिक वास्तविकताओं से मेल खाना ज़रूरी है. हमारा समाज और अर्थव्यवस्था दोनों ही आज डेटा पर निर्भर है. हमारे सभी फैसले निजता और अर्थव्यवस्था दोनो को मद्दे नज़र रखते हूए लेने चाहिए. यूरोप मे कड़ी कानूनन प्रतिबन्ध की कई लोगों ने आलोचना भी की है. हमें अग्रसर हो कर भारतीय डेटा संगरक्षण कानून को पारित करने की आव्यशक्ता है, जिससे की उचित नियमो द्वारा हमारी अर्थव्यवस्था को अधिक हानि पहुंचाए बिना नागरिकों कि निजता सुनिश्चित रहे.

सबसे ज़रूरी है सूचित रहना. सब हूँ हल्ले से दूर जाकर समझना कि हम अपनी निजता को खुद कैसे सुरक्षित रख सकते है. सरकार तो अपना काम करेगी ही मगर अपनी निजता अपने हाथ!

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