कोविड-19 के लिए बायोकॉन की इस दवा को मिली मंजूरी, मृत्यु दर कम करने में हो सकती है कारगर

कोविड-19 के लिए बायोकॉन की इस दवा को मिली मंजूरी, मृत्यु दर कम करने में हो सकती है कारगर
Itoliuzumab से कोविड—19 मरीजों में साइटोकिन स्टॉर्म्स cytokine storms के इलाज करने में मदद मिल सकेगी.

ड्रग कंट्रोलर (DCGI) ने कोविड-19 के गंभीर संक्रमण से जूझ रहे मरीजों पर बायोकॉन बायोलॉजिक्स की मोनोक्लोनल एंटीबॉडी Itoliuzumab के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है. कोविड-19 मरीजों में cytokine storms के इलाज करने में मदद मिल सकेगी.

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नई दिल्ली. बायोकॉन बायोलॉजिक्स (Biocon Biologics) को कोविड-19 मरीजों के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) की तरफ से मोनोक्लोनल एंटीबॉडी Itoliuzumab के इमरजेंसी तौर पर इस्तेमाल करने की अनुमति मिल गई है. बायोकॉन बायोलॉजिक्स को यह अनुमति इमरजेंसी यूज ऑथोराइजेशन (EUA) के तहत मिली है. Itoliuzumab से कोविड-19 मरीजों में साइटोकिन स्टॉर्म्स (Cytokine Storms) के इलाज करने में मदद मिल सकेगी. माना जा रहा है कि cytokine storms ही गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों की मौत का प्रमुख कारण है.

DCGI के मुताबिक, इस दवा का इस्तेमाल हॉस्पिटल सेट-अप में ही किया जा सकता है. साथ ही, इलाज शुरू करने से पहले मरीजों को इसके बारे में जानकारी देनी होगी और रिस्क मैनेजमेंट प्लान भी तैयार रखना होगा. हालांकि, अभी बायोकॉन बायो​लॉजिक्स की तरफ इस बारे में कोई बयान नहीं आया है.

क्या है इमरजेंसी यूज ऑथोराइजेशन का मतलब?
आमतौर पर ड्रग रेग्युलेटर इमरजेंसी यूज ऑथोराइजेशन की मंजूरी तब देते हैं, जब किसी बीमारी के इलाज की बेहद जरूरत होती है. ड्रग रेग्युलेटर ट्रायल डेटा का गहन परीक्षण करता है और यह सुनिश्चित करता है कि प्रस्तावित दवा सुरक्षित है और कुछ हद तक बीमारी को कंट्रोल करने में सक्षम है. हालांकि, ईयूए के मतलब मंजूरी मिलना नहीं होता है. डिटेल डेटा के आधार पर ही मंंजूरी मिलती है.
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बता दें कि साल 2013 में Plaque Psoriasis नाम की एक गंभीर बीमारी के ​इलाज के लिए Itolizumab को साल 2013 में Alzumab ब्रांड नाम से लॉन्च किया गया था. हालांकि, अब इस दवा का इस्तेमाल गंभीर कोवि-19 संक्रमण से जूझ रहे मरीजों के लिए भी किया जा सकता है. बॉयोकॉन लिमिटेड सब्सिडियरी को इस दवा का क्लिनिकल ट्रायल के लिए डीसीजीआई से मंजूरी मिली थी. इस दवा का ट्रायल कोविड-19 मरीजों पर किया गया है.

मुंबई दिल्ली के अस्पतालों में हुआ ट्रायल
बायोकॉन बायोलॉजिक्स के चीफ मेडिकल ऑफिसर और सीनियर वाइस प्रेसीडेंट संदीप अठाल्ये के हवाले से लाइवमिंट ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, 'इस दवा कि विशेष मैकेनिज्म की वजह से CRS या cytokine storm को रोकने में मदद मिलेगी. इसी की वजह से अधिकतर कोविड-19 की मौत हो रही है. इसके लिए मुंबई व दिल्ली के कई अस्पतालों में क्लिनिकल ट्रायल शुरू कर दिया गया. लाइवमिंट को अठाल्ये ने यह बयान 1 जून 2020 को दिया था.

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क्या होता है साइटोकिन्स?
साइटोकिन्स एक तरह का सिग्नलिंग पदार्थ है जिसे शरीर की रोग प्रतिरोधक सिस्टम छोड़ती है. यह प्रक्रिया तब शुरू होती है, जब मानव शरीर में कोई वायरल गतिविधि चल रही होती है. कोरोना वायरस संक्रमण वाले कुछ मामलों में देखा गया है कि मरीज की रोग-प्रतिरोधक सिस्टम जरूरत से ज्यादा साइटोकिन्स का उत्पादन कर देती है. इससे अत्यधिक सूजन की समस्या होती है और शरीर के कई अंग काम करना बंद कर देते हैं. इसके बाद मरीज की मौत हो जाती है.
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