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अब कैब कंपनियां पीक ऑवर्स में नहीं वसूल पाएंगी मनमाना किराया, अब मानने होंगे कई नियम

अब कैब कंपनियां पीक ऑवर्स में नहीं वसूल पाएंगी मनमाना किराया, अब मानने होंगे कई नियम

नई दिल्‍ली में अब कैब कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने की कवायद शुरू हो गई है.

नई दिल्‍ली में अब कैब कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने की कवायद शुरू हो गई है.

राष्‍ट्रीय राजधानी में अब कैब कंपनियों की मनमानी पर रोक लगाने की कवायद शुरू हो गई है. कैब एग्रीगेटर्स के लिए नियम बनाने को अब एक पॉलिसी तैयार की गई है. इसका मसौदा परिवहन विभाग ने जारी किया है. इसमें कैब संचालन के लिए नियम बनाए गए हैं.

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नई दिल्‍ली. राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्‍ली में ओला और उबर (Ola & Uber) जैसी कैब कंपनियां पीक आवर्स में पैसेंजर से जमकर किराया (Taxi Fare) वसूलती हैं. अब वो ऐसा नहीं कर पाएंगी. दिल्‍ली सरकार अब कैब कंपनियों पर लगाम कसने के लिए मोटर व्‍हीकल एग्रीगेटर्स स्‍कीम (Motor Vehicle Aggregators Scheme, 2021) ला रही है. इसमें कैब संचालन के लिये कैब कंपनियों के लिए नियम बनाए गए हैं.

दिल्‍ली सरकार के परिवहन विभाग ने इस योजना का मसौदा जारी किया है. कैब पॉलिसी में कैब का किराया (CAB Fare), ड्राइवर की रेटिंग, यात्रियों की सुरक्षा जैसे नियम बनाए गए हैं. दिल्ली परिवहन विभाग (Delhi’s Department of Transport) के अनुसार कैब एग्रीगेटर्स कंपनियां सर्ज प्राइस (surge pricing) यानी पीक ऑवर में बढ़ने वाला किराया बेस फेयर के दोगुने से ज्यादा नहीं वसूल सकतीं.

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ड्राइवर और वाहनों का रजिस्‍ट्रेशन जरूरी

ओला (Ola) और उबर (UBER) जैसी कैब सेवा देने वाली कंपनियों को सभी ऑनबोर्ड ड्राइवर पार्टनर व मौजूदा समय में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का रजिस्ट्रेशन कराना होगा. सभी ड्राइवर पार्टनर का ड्राइविंग लाइसेंस जरूरी होगा. लाइसेंस की वैलिडिटी सिर्फ एक साल होगी. एक साल बाद इसे रिन्‍यू कराया जा सकेगा.

शिकायत पर करनी होगी कार्रवाई

अगर ड्राइवर-पार्टनर को एक महीने में 15 फीसदी या इससे ज्यादा शिकायतें आती हैं तो कैब कंपनी को उचित कार्रवाई करनी होगी. एक साल में 3.5 रेटिंग वाले ड्राइवरों को एग्रीगेटर्स द्वारा ट्रेनिंग के लिए भेजना होगा. कैब में पैनिक बटन तथा कैब की रियल टाइम लोकेशन जानने के लिए एक कंट्रोल रूम अनिवार्य होगा. कैब एग्रीग्रेटर्स को सभी ड्राइवरों की जानकारी भी परिवहन विभाग को देनी होगी.

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25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहन

पॉलिसी के मसौदे के अनुसार, दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए भी सरकार ने प्रस्ताव दिया है. इसके तहत कैब एग्रीगेटर्स को लाइसेंस मिलने की तारीख से दो साल के भीतर 25 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को शामिल करना होगा. इसी अवधि में 50 फीसदी दोपहिया वाहनों को शामिल करना जरूरी है. यह स्कीम उन एग्रीगेटर्स के लिए लागू होगी, जिनके बेड़े में कम से कम 50 वाहन शामिल होंगे.

Tags: Delhi Government, New Rule

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