दिल्‍ली से मुंबई की दूरी 13 घंटे में होगी तय, करीब 2 साल पीछे चल रहा है एक्‍सप्रेसवे का काम

दिल्‍ली से मुंबई की दूरी 13 घंटे में होगी तय, करीब 2 साल पीछे चल रहा है एक्‍सप्रेसवे का काम
दिल्‍ली-मुंबई एक्‍सप्रेसवे दोनों शहरों के बीच की दूरी करीब 150 किमी कम हो जाएगी.

दिल्‍ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) पूरा होने पर दोनों शहरों के बीच की दूरी 150 किमी कम हो जाएगी. वहीं, यात्रा का समय भी 24 घंटे से घटकर 13 घंटे रह जाएगा. इसे भारतमाला परियोजना (Bharatmala Project) के तहत बनाया जा रहा है.

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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली से मुंबई के बीच दूरी 150 किमी और यात्रा का समय करीब 11 घंटे कम करने वाले एक्‍सप्रेसवे (Delhi-Mumbai Expressway) का काम लगातार जारी है. दिल्‍ली-मुंबई एक्‍सप्रेसवे की लंबाई करीब 1,261 किमी है, जिसे बनाने में करीब 1 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे. इस एक्‍सप्रेसवे के 497 किमी हिस्से पर काम चल रहा है. साथ ही 162 किमी के एक अन्य हिस्से पर जल्द काम शुरू कराने के लिए टेंडर जारी किया जा चुका है. इसके अलावा 569 किमी के हिस्से के लिए बोली प्रक्रिया जारी है. आठ लेन के इस एक्सप्रेसवे का निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट, कंस्ट्रक्शन (EPC) रूट के ​जरिये किया जा रहा है.

एक्‍सप्रेसवे साल 2023-24 में बनकर हो सकता है तैयार
दिल्‍ली-मुंबई एक्सप्रेसवे भारतमाला परियोजना (Bharatmala Project) के पहले चरण के तहत बनाया जा रहा है. भारतमाला परियोजना के तहत 34,800 किमी का राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) बनाया जाना है. इस पर 2017 से काम शुरू हुआ है और इसे 2022 तक पूरा करना है. विश्लेषकों का कहना है कि पहला चरण कम से कम दो साल पीछे (Delay) चल रहा है यानी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे 2023-24 तक बनकर तैयार हो सकता है.

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भू-अधिग्रहण कम करना पड़ा तो पुनर्वास भी कम हुआ


ब्रोकरेज फर्म क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) ने जून की रिपोर्ट में कहा था कि ऐसा पहली बार हो रहा है, जब नेशनल हाइवे अथॉरिटी आफ इंडिया (NHAI) इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए ग्रीनफील्ड योजना पर काम कर रहा है. इससे प्रोजेक्ट की लागत कम होगी और निर्माण समय भी कम लगेगा. फाइनेंशियल एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन अधिग्रहण कम करना पड़ा है. इससे लोगों का पुनर्वास भी कम हुआ है.

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होगा आर्थिक फायदा, मालढुलाई 9 फीसदी तक होगी कम
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र से गुजरने वाले दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जयपुर, कोटा, चितौड़गढ़, इंदौर, उज्जैन, भोपाल, अहमदाबाद व वडोदरा की कनेक्टिविटी आसान हो जाएगी. दूरी और समय कम होने से आर्थिक फायदा भी होगा. एक्सप्रेसवे से मालढुलाई करीब 8-9 फीसदी तक कम होगी. दूरी, समय और तेल की खपत कम होने से विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी. कॉरिडोर पर नियंत्रित एक्सेस होगा. दोनों तरह 75 एमिनिटीज का एक नेटवर्क खड़ा करने की योजना बनाई गई है, जो 50 किमी के अंतराल पर होगी. सरकार की योजना इस आठ लेन के एक्‍सप्रेसवे को भविष्य में 12 लेन तक बढ़ाने की है.

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हर साल 85.7 करोड़ किलो कार्बन उत्सर्जन भी घट जाएगा
सड़क व परिवहन मंत्रालय का अनुमान है कि इस एक्सप्रेसवे से हर साल करीब 32 करोड़ लीटर तेल (Fuel) की बचत होगी. वहीं, प्रति लीटर 2.68 किलो का कार्बन उत्सर्जन (Carbon Emissions) मानकर चलें तो हर साल 85.7 करोड़ किलो कार्बन उत्सर्जन कम होगा. इतना उत्सर्जन कम करने के लिए 4 लाख पेड़ों की जरूरत होगी. इसके लिए वन विभाग को करीब 2 लाख हेक्टेयर जमीन की​ आवश्यकता होगी. रेटिंग एजेंसी इकरा का कहना है कि भारतमाला परियोजना वर्ष 2025-26 तक पूरा होगी. देशभर में मालढुलाई और यात्री परिवहन के लिए भारतमाला परियोजना एक अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है.
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