कोरोना संकट से उबरकर भारत बनाएगा एक अलग पहचान, जानें क्या बोले डेलॉयट के CEO

डेलॉयट सीईओ पुनीत रंजन

डेलॉयट सीईओ पुनीत रंजन

डेलॉयट के सीईओ पुनीत रंजन ने कहा कि भारत पूरे दमखम के साथ कोविड-19 संकट से उबरेगा और 21वीं सदी निश्चित रूप से ‘‘भारत की सदी’’ है. रंजन ने कहा कि भारत सरकार ने कोविड-19 महामारी से पैदा हुई चुनौतियों का सामना करने में अच्छा प्रदर्शन किया है.

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  • Last Updated: April 13, 2021, 3:30 AM IST
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नई दिल्ली: परामर्श सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी डेलॉयट के सीईओ पुनीत रंजन ने कहा कि भारत पूरे दमखम के साथ कोविड-19 संकट से उबरेगा और 21वीं सदी निश्चित रूप से ‘‘भारत की सदी’’ है. रंजन ने कहा कि भारत सरकार ने कोविड-19 महामारी से पैदा हुई चुनौतियों का सामना करने में अच्छा प्रदर्शन किया है. भारतीय मूल के अमेरिकी दिग्गज कारोबारी एक साक्षात्कार में कहा कि यह भारत की सदी है और मैं इसके बारे में आश्वस्त हूं.

आगे उन्होंने कहा, ‘‘मैं निश्चित रूप से अपनी (भारतीय) विरासत को देखते हुए थोड़ा पक्षपाती हूं, लेकिन मुझे सच में पूरा भरोसा है कि यह भारत की सदी है, क्योंकि भारत में बड़ी संख्या में प्रतिभावान नौजवान हैं, और यहां पिछले 75 वर्षों से लोकतांत्रिक परंपरा कायम है.’’

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रंजन ने कहा कि महामारी ने सभी को प्रभावित किया है, और भारत में सरकार ने जिस तरह से लॉकडाउन लागू किया तथा यहां की बड़ी आबादी को देखते हुए महामारी ने देश को बुरी तरह प्रभावित किया. रोहतक में जन्मे भारतीय मूल के सीईओ, जो 2015 से डेलॉइट की कमान संभाल रहे हैं, ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की हालिया रिपोर्ट को उल्लेखनीय बताया, जिसमें भारत के लिए 12.5 प्रतिशत वृद्धि दर का अनुमान लगाया गया था.
उन्होंने कहा, ‘‘कोई भी पक्के तौर पर नहीं कह सकता है, लेकिन मैं वास्तव में मानता हूं कि भारत इस महामारी से सबसे तेजी से उबरेगा.’’ आगे कहा, ‘‘मुझे लगता है कि बहुत तेजी से भरपाई होगी. भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है और डेलॉइट के रूप में मैं भारत को लेकर आशावादी हूं.’’

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उन्होंने कहा कि यह एक बेहद अप्रत्याशित वायरस है और भारत 1.3 अरब लोगों का देश है, जहां मुंबई में धारावी जैसे इलाके हैं, जो अत्यधिक भीड़भाड़ वाले क्षेत्र हैं और जहां तेजी से वायरस फैल सकता है. उन्होंने कहा, ‘‘इन सभी स्थितियों को देखते हुए, मेरा मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और भारतीय लोगों ने जितना संभव था, उतना अच्छा किया है हालांकि, यह मुश्किल वक्त है, लेकिन ऐसा सिर्फ भारत के साथ ही नहीं है.’’
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