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..तो क्या रद्द हो जाएंगे आपके PF से जुड़े 2 बड़े नियम, जानिए क्या होगा असर?

..तो क्या रद्द हो जाएंगे आपके PF से जुड़े 2 बड़े नियम, जानिए क्या होगा असर?

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार (फाइल फोटो)

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार (फाइल फोटो)

फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल (Federation of all india trade board) ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार से पीएफ कानून (PF Act) 1952 की धारा 1 (5) को कम से कम दो साल तक निलंबित रखने का अनुरोध किया है.

    नई दिल्ली. कोरोना महामारी से पूरे विश्व के साथ भारत में भी आर्थिक मंदी आ गई है. जिसका सबसे ज्यादा असर देश के छोटे कारोबारियों पर देखने को मिल रहा है. आपको बता दें कोरोना महामारी और लॉकडाउन की वजह से देश में ज्यादातर छोटे कारोबार पूरी तरह ठप हो गए है या बहुत ही कम संसाधन के साथ संघर्ष कर रहे है. ऐसे में छोटे कारोबारियों ने अपनी उद्योग-धंधों को बचाए रखने के लिए. व्यापारिक संगठन फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल (फैम) के जरिए. केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार से पीएफ कानून (PF Act) 1952 की धारा 1 (5) को कम से कम दो साल तक निलंबित रखने का अनुरोध किया है. आइए जानते है यदि ये कानून दो साल के लिए निलंबित होता है. तो छोटो कारोबारियों के यहां काम करने वाले श्रमिकों पर इसका क्या असर होगा... 

    समझें (PF Act) 1952 की धारा 1 (5) - केंद्र सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने श्रमिकों के हितों को ध्यान में रखकर  (PF Act) 1952 कानून बनाया था. इस कानून के जरिए सरकार ने संस्था के कर्मचारियों को भविष्य निधि, पेंशन एवं बीमा संबंधी लाभ प्रदान करने का प्रावधान बनाया हैं. इस एक्स के अनुसार यदि किसी कारोबारी के यहां 20 से अधिक कर्मचारी काम करते है. तो उसे पीएफ विभाग (EPFO) में पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य और सभी कर्मचारियों का पीएफ का अंशदान जमा कराना होगा.

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    छोटे व्यापारियों इस वजह से परेशान- व्यापारिक संगठन फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल (फैम) के महासचिव वी के बंसल का कहना है कि निरंतर बाजार बंदी और अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती ने छोटे व्यापारियों की व्यावसायिक गतिविधियों को काफी हद तक सीमित कर दिया है. इन छोटे व्यापारियों के अधिकांश कर्मचारी काम छोड़ कर अपने मूल स्थान को पलायन कर गए हैं. भविष्य निधि कानून की धारा 1(5) के प्रावधान के अनुसार यदि किसी भी प्रतिष्ठान में कर्मचारियों की संख्या 20 तक पहुंचती है. तो उसे पीएफ विभाग (EPFO) में पंजीकरण (Registration) कराना अनिवार्य हो जाता है.

    लेकिन यदि वहां कर्मचारी की संख्या 20 से कम भी हो जाए तो संस्थान पीएफ पंजीकरण को आत्मसमर्पण नहीं कर सकते. क्योंकि भविष्य में कारोबारी हालात सामान्य होने पर एक बार फिर कर्मचारियों की संख्या बढ़ना स्वाभाविक है और ऐसे में उस कारोबारी को एक बार फिर पीएम विभाग में पंजीकरण कराना होगा. इसलिए फैम ने श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार से पीएफ कानून  (PF Act) 1952 की धारा 1 (5) को कम से कम दो साल तक निलंबित रखने का अनुरोध किया है.

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     PF Act 1952 की धारा 1 (5) में छूट की मांग- फैम ने श्रम एवं रोजगार मंत्री संतोष गंगवार को पत्र लिखकर इस कानून में दो साल के लिए छूट की मांग की है. अपने पत्र में फैम ने केंद्रीय मंत्री को बताया है कि इस समय कारोबारी प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों की संख्या 20 से काफी कम है. लेकिन पीएफ कानून के मुताबिक वह पीएफ के पंजीकरण का सरेंडर नहीं कर सकते. इसलिए इस कानून को कम से कम दो साल के लिए निलंबित किया जाए. फैम ने अपने पत्र में कहा है कि जब व्यापारिक हालात ठीक थे. तब छोटे व्यापारियों ने पीएफ कानून का पूरा पालन किया था. लेकिन लॉकडाउन के बाद बाजार में आई मंदी ने कारोबारियों को परेशानी में डाल दिया है. ऐसे में अपने प्रतिष्ठानों का संचालन करना भी उनके लिए मुश्किल हो रहा है.

    Tags: Benefits of PF, Business news, EPFO account, Small business

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