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सिंगल यूज प्लास्टिक बैन को 1 साल टालने की मांग, क्या होगा कारोबार पर प्रतिबंध का असर

1 जुलाई से देश में सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल प्रतिबंधित होगा.

1 जुलाई से देश में सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल प्रतिबंधित होगा.

1 जुलाई से देश में सिंगल यूज प्लास्टिक पर पूरी तरह प्रतिबंध लग जाएगा. इसी बैन को टालने के लिए कैट ने केंद्र को पत्र लिखकर कहा है कि इससे व्यापारियों और कारोबार को तगड़ा झटका लगेगा. उनका कहना है कि बैन से पहले सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प ढूंढना चाहिए.

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नई दिल्ली. व्यापारी संघ कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर 1 जून से लगने वाले बैन को 1 साल तक टालने की मांग की है. इसके लिए संघ ने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को एक पत्र लिखा है. इसके साथ ही उन्होंने केंद्र से इस संबंध में एक समिति बनाने का भी आग्रह किया है.

खबरों के अनुसार, इस समिति में सरकारी अधिकारी और हितधारकों के प्रतिनिधि होंगे जो एक तय समय में सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प ढूंढने का प्रयास करेंगे. विकल्प मिलने के बाद देश में सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद हो सकेगा.

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विकल्प जरूरी है
कैट ने कहा है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जाने चाहिए. हालांकि, किसी भी वस्तु पर प्रतिबंध से पहले उसका विकल्प ढूंढना भी बेहद जरूरी है. कैट के अनुसार, सिंगल यूज प्लास्टिक निर्माण इंडस्ट्री वार्षिक आधार पर 60,000 करोड़ रुपये की है और इससे लाखों लोगों को रोजगार मिलता है. सिंगल यूज प्लास्टिक केवल निजी नहीं बल्कि सरकारी संस्थानों में भी बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है. बगैर किसी विकल्प के इसे बंद कर देने से खुदरा व्यापार क्षेत्र में भारी नुकसान होगा.

लघु कारोबारियों को होगा नुकसान
कैट का कहना है कि इस प्रतिबंध का सीधा असर व्यापारियों पर होगा. बकौल कैट, सिंगल यूज प्लास्टिक का अधिकांश हिस्सा बड़ी मैन्युफैक्चरिंग पर पैकेजिंग इकाइयों में अपने प्रोडक्ट को पैक करने के लिए इस्तेमाल होता है. इसलिए सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल तब तक होता रहेगा जब तक बड़े स्तर पर यह नहीं बंद होता. गौरतलब है कि इस तरह के बैन से सारा दबाव छोटे व्यापारियों पर आ जाएगा जो अपने ग्राहकों को पॉलीबैग नहीं दे पाएंगे. इससे उनके कारोबार पर असर पड़ सकता है.

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जॉब और रेवेन्यू होगा प्रभावित
इसके अलावा ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एआईपीएमए) का कहना है कि सरकारी आंकड़े के अनुसार, 88,000 इकाइयां सिंगल यूज प्लास्टिक के निर्माण में लगी हैं. इनमें करीब 10 लाख लोग कार्यरत हैं. अगर 1 जुलाई को बैन लागू होता है तो एक झटके में ये इकाइयां बंद हो जाएंगी और इनके कर्मचारी पर सीधी गाज गिरेगी. इसके अलावा यह इकाइयां करीब 25,000 करोड़ का माल एक्सपोर्ट करती हैं. इस बैन से राजस्व वाले पहलू पर भी तगड़ी चोट लगेगी.

Tags: Ban, Central government, Single use Plastic

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