27 साल बाद बदला ये कानून! अब बैंक डूबने पर इतने लाख रुपये तक रहेंगे सेफ

डिपॉजिट इंश्योरेंस बढ़ाने के लिए वित्त मंत्रालय ने दी मंजूरी.

डिपॉजिट इंश्योरेंस बढ़ाने के लिए वित्त मंत्रालय ने दी मंजूरी.

बजट में ऐलान के बाद मंगलवार को बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस (Deposit Insurance) की रकम बढ़ाने के लिए मंजूरी दे दी गई है. वित्त सचिव (Finance Secretary) राजीव कुमार ने मंगलवार को ट्वीट कर इसके बारे में जानकारी दी. 27 साल में पहली बार इस डिपॉजिट इंश्योरेंस की रकम को बढ़ाया गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 4, 2020, 5:07 PM IST
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नई दिल्ली. बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने बैंकों में जमा रकम के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस (Deposit Insurance) की लिमिट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का ऐलान किया था. अगर कोई बैंक किसी भी वजह से दिवालिया होता है तो उस बैंक में जमाकर्ताओं को उनकी रकम पर 1 लाख की जगह 5 लाख रुपये का बीमा मिलेगा. मंगलवार को वित्त सचिव (Finance Secretary) राजीव कुमार ने ट्वीट कर जानकारी दी कि बैंक डिपॉजिट्स पर 27 साल बाद बीमा कवर बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने के लिए वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने मंजूरी दे दी है.

बता दें कि अंतिम बार साल 1993 में बैंकिंग डिपॉजिट्स पर ​इंश्योरेंस की रकम बढ़ाकर 1 लाख रुपये की  गयी थी. राजीव कुमार ने बताया कि वर्तमान में हर 100 रुपये पर 10 पैसे की जगह अब 12 पैसे प्रीमियम बैंक पूर्वानुसार देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि बजट घोषणा पर काम शुरू हो गया है. इसी सिलसिले में वित्तीय विभाग ने बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस को मंजूरी दी है.


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पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) संकट सामने के आने के बाद से ही इस बात की मांग की जा रही थी कि डिपॉजिट इंश्योरेंस की रकम बढ़ाई जाए. देश के सबसे बड़े बैंक यानी भारतीय स्टेट बैंक ने भी अपनी एक रिसर्च रिपोर्ट में डिपॉजिट इंश्योरेंस की रकम बढ़ाने का सुझाव दिया था.

बजट में वित्त मंत्री ने क्या ऐलान किया था

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात को लेकर अपने बजट में कहा है कि DICGC को 'प्रति अकाउंट' डिपॉजिट इंश्योरेंस की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये किए जाने की अनुमति है. नानगिया एंडरसन LLP के विश्वास पांजियार का भी कहना है कि ऐसी स्थिति​ में केवल एक ही अकाउंट के आधार पर 5 लाख रुपये का​ डिपॉजिट इंश्योरेंस मिल सकेगा.




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DICGC के अंतर्गत कितने बैंक आते हैं?

31 मार्च 2019 तक DICGC के पास डिपॉजिट इंश्योरेंस के तौर पर 97,350 करोड़ रुपये था, जिसमें 87,890 करोड़ रुपये सरप्लस भी शामिल है. DICGC ने 1962 से लेकर अब तक कुल क्लेम सेटलमेंट पर 5,120 करोड़ रुपये खर्च किया है जो कि सहकारी बैंकों के लिए था. डीआईसीजीसी के अंतर्गत कुल 2,098 बैंक आते हैं, जिनमें से 1,941 सहकारी बैंक हैं. अधिकतर इन्हीं बैंकों में लिक्विडेशन की कमी देखने को मिल रही है.

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