विदेशी कंपनियों को रॉयल्‍टी भुगतान की सीमा तय करेगी सरकार, DPIIT ने 25 अगस्‍त को बुलाई अंतर-मंत्रालयी बैठक

केंद्र सरकार जल्‍द ही विदेशी कंपनियों को तकनीकी हस्‍तांतरण के एवज में की जाने वाली रॉयल्‍टी की भुगतान सीमा तय करेगा.

केंद्र सरकार जल्‍द ही विदेशी कंपनियों को तकनीकी हस्‍तांतरण के एवज में की जाने वाली रॉयल्‍टी की भुगतान सीमा तय करेगा.

केंद्र सरकार के विचाराधीन एक प्रस्ताव में टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर (Technology Transfer) या भारत की किसी कंपनी के जरिये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी विदेशी कंपनी की संलिप्तता वाले गठबंधन मामले में रॉयल्टी भुगतान (Royalty Payment) की सीमा तय करने की मांग की जा रही थी. किसी भी विदेशी भागीदार को तकनीकी हस्तांतरण, उसके ब्रांड या ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करने के बदले रॉयल्टी का भुगतान किया जाता है.

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  • Last Updated: August 19, 2020, 10:03 PM IST
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नई दिल्ली. उद्योग व आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने विदेशी कंपनियों को रॉयल्टी भुगतान (Royalty Payment) के मुद्दे पर 25 अगस्त 2020 को अंतर मंत्रालयी (Inter-Ministerial) बैठक बुलाई है. एक अधिकारी ने बताया कि डीपीआईआईटी सचिव गुरुप्रसाद मोहपात्र की अध्‍यक्षता में होने वाली बैठक में वाणिज्य विभाग (Commerce Department), रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और राजस्व विभाग (Revenue Department) के अधिकारी शामिल होंगे.

2009 के बाद विदेशी कंपनियों को रॉयल्‍टी भुगतान हुआ है तेज

केंद्र सरकार के विचाराधीन एक प्रस्ताव में टेक्‍नोलॉजी ट्रांसफर (Technology Transfer) या भारत की किसी कंपनी के जरिये प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी विदेशी कंपनी की संलिप्तता वाले गठबंधन मामले में रॉयल्टी भुगतान की सीमा तय करने की मांग की गई थी. केंद्र सरकार (Central Government) की ओर से 2009 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति को उदार बनाने के बाद इस प्रकार के विदेशों को होने वाले भुगतान तेज हुए हैं. इस नीति में सीमा समाप्त कर दी गई है और भारतीय कंपनियों को उनके तकनीकी भागीदार को सरकार की बिना मंजूरी के रॉयल्‍टी का भुगतान करने की अनुमति दे दी गई.

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विदेशी कंपनियों को क्‍यों किया जाता है रॉयल्‍टी भुगतान

किसी भी विदेशी भागीदार को तकनीकी हस्तांतरण, उसके ब्रांड या ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करने के बदले रॉयल्टी का भुगतान किया जाता है. इस प्रकार के रॉयल्टी भुगतान में तेजी आने के बाद अप्रैल 2017 में सरकार ने एक अंतर मंत्रालयी समिति का गठन किया. समिति को भुगतान नियमों पर गौर करने और यह देखने को कहा गया कि क्या भारतीय कंपनियों की ओर से उनके विदेशी सहयोगियों को रॉयल्टी का ज्यादा भुगतान किया जा रहा है. उद्योग क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतिबंधों से घरेलू कंपनियों का मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलेगी. खासतौर से आटोमोबाइल क्षेत्र में इसका फायदा होगा.

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रॉयल्‍टी भुगतान कम होने पर देश को होगा ये फायदा

रॉयल्‍टी भुगतान में कमी होने पर विदेशी मुद्रा भंडार (Forex) को कम होने से बचाया जा सकेगा और अल्पांश शेयरधारकों के हितों की रक्षा होगी. साथ ही सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा. वर्ष 2009 से पहले सरकार ने रॉयल्टी भुगतान को नियमन के दायरे में रखा था. तकनीकी हस्तांतरण गठबंधन के मामले में रॉयल्टी भुगतान को निर्यात कारोबार के 8 फीसदी और घरेलू बिक्री के पांच फीसदी पर सीमित रखा गया था. इसी प्रकार ट्रेडमार्क और ब्रांड नाम के इस्तेमाल में रॉयल्टी भुगतान निर्यात पर दो फीसदी और घरेलू बिक्री का एक फीसदी तय किया गया था. प्रमुख वाहन कंपनी मारुति सुजूकी ने 2019-20 में अपनी मूल कंपनी सुजूकी को शुद्ध बिक्री का 5.3 फीसदी रॉयल्टी भुगतान किया.
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