कृषि अध्यादेश के बावजूद MSP पर खरीदी जाएगी फसल, मंडियों का भी होगा विस्तार

कृषि अध्यादेश के बावजूद MSP पर खरीदी जाएगी फसल, मंडियों का भी होगा विस्तार
क्या नए कृषि अध्यादेश से एमएसपी पर है खतरा?

हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने किसानों की चिंता पर स्पष्ट किया सरकार का रुख, बताया, कृषि अध्यादेशों से क्या बदलेगा

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 10, 2020, 8:56 AM IST
  • Share this:
चंडीगढ़. मोदी सरकार के कृषि अध्यादेशों (Agriculture Ordinance) को लेकर बढ़ी किसानों की चिंता पर हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने सरकार का रुख स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के सभी किसानों की सभी फसलों के लिए न सिर्फ न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP-Minimum Support Price) उपलब्ध कराने बल्कि सरकारी मंडियों का और विस्तार करने के लिए भी प्रतिबद्ध है. केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए अध्यादेशों से केवल यह परिवर्तन हुआ है कि सरकारी मंडियों के बाहर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक मूल्य पर कोई प्राइवेट एजेंसी फसल की खरीद करना चाहती है तो किसान अपनी फसल अधिक दाम पर उसे बेच सकता है.

इन अध्यादेशों के आने से किसी भी स्थिति में सरकारी मंडियां (APMC-Agricultural produce market committee) बंद नहीं होंगी और एमएसपी जारी रहेगी. मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहले ही निर्देश दे चुके हैं कि मंडियों के बाहर खरीद-फरोख्त होने से मंडियों का अपना व्यापार कम न हो, इसके लिए नीतियां बनाई जाएं. उन्होंने कहा कि प्रदेश में करोड़ों रुपये की लागत से मंडियों का बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है. 4 हजार करोड़ रुपये की लागत से गन्नौर में एशिया की सबसे बड़ी मंडी, पिंजौर में सेब मंडी और गुरुग्राम में फूलों की मंडी बनाई जा रही है.

 modi government agricultural ordinances, Agricultural reform, msp, farmers agitation, Strikes in mandis, APMC, MSP-Minimum Support Price, मोदी सरकार के तीन कृषि अध्यादेश, कृषि सुधार, सरकारी मंडी, किसान आंदोलन, मंडियों में हड़ताल न्यूनतम समर्थन मूल्य
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर.(फाइल फोटो)




अध्यादेश केंद्र का, घिर रही हरियाणा सरकार
यह अध्यादेश भले ही मोदी सरकार ने जारी किया है लेकिन इस पर हरियाणा में खूब हंगामा हो रहा है. 26 अगस्त को हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू कृषि अध्यादेशों पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव ले आए थे. लेकिन उनका यह प्रस्ताव यह कहकर खारिज कर दिया गया कि ये अध्यादेश केंद्र सरकार के हैं, इससे हरियाणा गवर्नमेंट का कोई लेना-देना नहीं है. तब विधायक ने कहा था कि हरियाणा कृषि प्रधान राज्य है. 80 फीसदी वोट हमें किसानों के ही मिले हैं. ऐसे में उनसे जुड़े अध्यादेशों पर विधानसभा में चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए?  इस प्रकरण के बाद किसानों ने 10 सितंबर को कुरुक्षेत्र में इसके खिलाफ रैली का आह्वान कर दिया. तब जाकर सरकार इसे लेकर अपना रुख स्पष्ट कर रही है.

इसे भी पढ़ें: पानी से भी कम दाम पर बिक रहा गाय का दूध 

गेहूं की रिकॉर्ड खरीद, पैसा सीधे खाते में

दलाल ने कहा कि कोरोना संकट के समय में किसानों की सुविधा और फसल की खरीद को सुगम बनाने के लिए मंडियों और खरीद केंद्रों की संख्या बढ़ाई गई थी. सीधे किसानों के खाते में पैसा पहुंचाने की व्यवस्था की गई. इस साल रबी की फसल के दौरान खरीद केंद्रों में 75 लाख 98 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई. जो अपने आप में रिकॉर्ड है.

अन्य फसलों की खरीद और भुगतान

दलाल ने बताया कि इस साल 7 लाख 50 हजार मीट्रिक टन सरसों की खरीद की गई. इसके लिए किसानों के के बैंक खाते में सीधे ही 3303 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान किया गया. राज्य में 10,703 मीट्रिक टन चने की खरीद की गई है और किसानों को 50 करोड़ 72 लाख रुपये की राशि का भुगतान किया गया. इसी तरह 14,721 मीट्रिक टन सूरजमुखी की खरीद की गई, जिसके बदले किसानों को 63 करोड़ 5 लाख रुपये की राशि का भुगतान हुआ.

modi government agricultural ordinances, Agricultural reform, msp, farmers agitation, Strikes in mandis, APMC, MSP-Minimum Support Price, मोदी सरकार के तीन कृषि अध्यादेश, कृषि सुधार, सरकारी मंडी, किसान आंदोलन, मंडियों में हड़ताल न्यूनतम समर्थन मूल्य
प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होने पर प्रति एकड़ 12000 रुपये मुआवजा (File Photo)


MP की सरकारी मंडी में भी छले जा रहे किसान, आधे रेट पर बिक रही मूंग

...तो सरकार देगी मुआवजा 

दलाल ने कहा कि हाल ही में सफेद मक्खी के कारण कपास की फसल का नुकसान हुआ, उसके लिए भी मुख्यमंत्री ने विशेष गिरदावरी करवाने के निर्देश दिए हैं. कहा है कि जो किसान फसल बीमा योजना के अंतर्गत पंजीकृत हैं, उन्हें बीमा योजना से मुआवजा दिया जाएगा और जो किसान इस योजना के तहत पंजीकृत नहीं है, उन्हें सरकारी खजाने से मुआवजा दिया जाएगा. प्राकृतिक आपदा से खराब हुई फसलों की मुआवजा राशि प्रति एकड़ 12 हजार रुपये कर दी गई है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज