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'100 रुपये प्रति क्विंटल की सहायता से खत्म हो जाएगी पराली की समस्या'

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Updated: November 7, 2019, 11:15 AM IST
'100 रुपये प्रति क्विंटल की सहायता से खत्म हो जाएगी पराली की समस्या'
किसानों को पराली के निस्तारण के लिए 100 रुपये/क्विंटल के हिसाब से भुगतान होना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court of India) के आदेश की कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा ने की सराहना, कहा-सरकारों को पहले ही उठा लेना चाहिए था यह कदम. अब अगले साल के लिए रोडमैप बनाना चाहिए.

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  • Last Updated: November 7, 2019, 11:15 AM IST
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नई दिल्ली. देश के बड़े कृषि अर्थशास्त्री देविंदर शर्मा ने पराली मैनेजमेंट (Paddy Stubble Management) के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल की सहायता देने के आदेश का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि इससे पराली (Paddy Stubble Issue Resolve) की समस्या का समाधान हो जाना चाहिए. इस साल तो अब सिर्फ एक तिहाई ही पराली बची हुई है. लेकिन अगले साल के लिए यह पैसा देने के लिए एक रोडमैप बनाना चाहिए ताकि धान की कटाई से पहले पैसा उन तक पहुंच जाए और उसे जलाने की नौबत न आए. हरियाणा, पंजाब और यूपी में इस काम के लिए 3000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. देविंदर शर्मा कई दिनों से मांग कर रहे थे कि किसानों को पराली के लिए 200 रुपये प्रति क्विंटल आर्थिक मदद दी जाए.

क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश-  बुधवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने आदेश दिया है कि किसानों को पराली के निस्तारण के लिए 100 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान किया जाएगा.

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पराली जलाने पर क्यों मजबूर हैं किसान?


>> पराली के निस्तारण के लिए यह भुगतान तीन राज्यों के किसानों को किया जाएगा. इस आदेश के अंतर्गत पंजाब, हरियाणा और यूपी तीन राज्यों के किसान आएंगे. यह फैसला छोटे और सीमांत किसानों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.

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किसानों के लिए रास्ता आसान हुआ- न्यूज18 हिंदी से बातचीत में शर्मा ने कहा कि इतनी सहायता से किसान बिना जलाए ही पराली मैनेजमेंट कर लेंगे. अगर मदद लेने के बाद भी कोई किसान पराली जलाता है तभी उसके खिलाफ एफआईआर की जाए.

>> यह दुखद बात है कि सरकार पराली मैनेजमेंट के लिए मशीन पर 60 हजार रुपये की सब्सिडी देने को तैयार थी लेकिन उन्हें इसके लिए नगद पैसा नहीं दे रही थी. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दे दिया है तो किसानों का रास्ता आसान हो जाएगा.
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>> शर्मा ने कहा कि समाज और सरकार सभी को किसानों के साथ खड़ा होना पड़ेगा तभी इसका समाधान होगा. किसान जान बूझकर पराली नहीं जला रहा. किसी ने अन्नदाताओं के नजरिए को समझने की कोशिश नहीं की. यही कारण है कि हर डिबेट में किसान को खलनायक बनाया जा रहा है, जो बहुत गलत है. पंजाब में अकेले 200 लाख टन पराली होती है. हमारा तंत्र क्या इतनी पराली का समाधान कर पाएगा. इसका समाधान यही है कि किसानों को नगद सहायता दी जाए.

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First published: November 7, 2019, 6:00 AM IST
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