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अगले तीन साल में अपना तेल खर्च 10% घटाएगा भारत- पेट्रोलियम मंत्री

भाषा
Updated: November 6, 2019, 7:48 PM IST
अगले तीन साल में अपना तेल खर्च 10% घटाएगा भारत- पेट्रोलियम मंत्री
भारत तेल आयात निर्भरता में 2022 तक 10 प्रतिशत की कमी लाने के रास्ते पर

पेट्रोलियम मंत्रालय (Petroleum Ministry) के अनुसार खपत में तीव्र गति से वृद्धि और घरेलू उत्पादन के स्थिर रहने के कारण देश की तेल आयात पर निर्भरता 2018-19 में बढ़कर 83.7 प्रतिशत पर पहुंच गयी जो 2017-18 में 82.9 प्रतिशत थी.

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नई दिल्ली. पेट्रोलियम मंत्री (Petroleum Minister) धर्मेन्द्र प्रधान ने बुधवार को कहा कि सरकार 2020 तक तेल आयात पर निर्भरता में 10 प्रतिशत की कमी लाने के रास्ते पर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मार्च 2015 में ‘ऊर्जा संगम’ में कहा था कि भारत को तेल आयात (Oil Import) पर निर्भरता 2013-14 के 77 प्रतिशत के स्तर से घटाकर आजादी की 75वीं वर्षगांठ 2022 तक 67 प्रतिशत पर लाने की जरूरत है. उन्होंने यह भी कहा था कि इस निर्भरता में 2030 तक आधे की कटौती की जा सकती है.

पेट्रोलियम मंत्रालय की पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार हालांकि खपत में तीव्र गति से वृद्धि तथा घरेलू उत्पादन के स्थिर रहने के कारण देश की तेल आयात पर निर्भरता 2018-19 में बढ़कर 83.7 प्रतिशत पर पहुंच गयी जो 2017-18 में 82.9 प्रतिशत थी.

एक कार्यक्रम में प्रधान ने संवाददाताओं से अलग से बातचीत में कहा, हम रास्ते पर है. हम लक्ष्य हासिल करेंगे. सरकार जैव-ईंधन के उपयोग को बढ़ाने के साथ कच्चे तेल एवं गैस का घरेलू उत्पादन में वृद्धि तथा आयात कम करने पर ध्यान दे रही है.

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पत्ती और कूड़ा करकट से बनेगा फ्यूल
प्रधान ने कहा कि फिलहाल पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण को बढ़ाकर 6 प्रतिशत किया गया है और 2022 तक इसे बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा. उन्होंने कहा कि साथ ही 5,000 कम्प्रेस्ड बायो-गैस संयंत्र स्थापित किये जा रहे हैं जो फसलों की डंठल , पत्ती और कूड़ा करकट को ईंधन में तब्दील करेंगे.

मंत्री ने कहा कि इसके अलावा वैकल्पिक ईंधन के उपयोग से आयात पर निर्भरता में कमी लाने में भी मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि निजी और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिये पिछले पांच साल में खोज नियमों में भी बदलाव लाये गये हैं.
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भारत में ऊर्जा क्षेत्र में 2024 तक 100 अरब डॉलर का निवेश की उम्मीद
भारत तेल एवं गैस क्षेत्र की अपनी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिये क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की तैयारी कर रहा है और इस लिहाज से देश में अगले पांच साल के दौरान तेल एवं गैस क्षेत्र में 100 अरब डॉलर का भारी निवेश होने की उम्मीद है.

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केपीएमजी एनरिच 2019 सम्मेलन (KPMG ENRich Annual Energy Conclave) को संबोधित करते हुये प्रधान ने कहा कि भारत ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव लाने के मामले में भारत पूरी जिम्मेदारी के साथ अपना रास्ता खुद तय करेगा. आने वाले दशक में वैश्विक ऊर्जा मांग के मामले में भारत की प्रमुख भूमिका होगी.

100 अरब डॉलर का निवेश होने की उम्मीद
उन्होंने कहा, भारत में 2024 तक तेल रिफाइनिंग, पाइपलाइनों, शहरी गैस वितरण नेटवर्क और एलएनजी टर्मिनल के क्षेत्र में 100 अरब डॉलर का निवेश होने की उम्मीद है. प्रधान ने कहा कि इसमें से करीब 60 अरब डॉलर पाइपलाइनों, शहरी गैस नेटवर्क और आयात टर्मिनल बनाने जैसे ढांचागत क्षेत्रों में हो सकता है.

उन्होंने कहा कि देश में तेल एवं गैस की खोज एवं उत्पादन और ईंधन विपणन एवं पेट्रोरसायन क्षेत्र में और ज्यादा विदेशी निवेश प्रवाह की जरूरत है. पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी देश बनने के लिये भारत पूंजी, विश्वस्तरीय प्रौद्योगिकी और जो भी नीतिगत सुधार करना होगा उस दिशा में आगे बढ़ेगा. उन्होंने कहा, भारत वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र के देशों में नया केन्द्र बनना चाहता है.

भारत दुनिया में ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता
प्रधान ने कहा कि गैर- पेट्रोलियम क्षेत्र की कंपनियों को ईंधन के खुदरा कारोबार में अनुमति देने और तेल एवं गैस खोज लाइसेंसिंग नीति में आमूलचूल संशोधन करने का काम इस दिशा में आगे बढ़ने के लिहाज से लिया गया है. अमेरिका और चीन के बाद भारत दुनिया में ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है. हालांकि, भारत की ऊर्जा क्षेत्र में प्रति व्यक्ति खपत दुनिया के औसत खपत का केवल एक तिहाई ही है.

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First published: November 6, 2019, 7:09 PM IST
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