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डीएचएफएल के कर्जदाताओं ने पिरामल की बोली पर लगाई मुहर, मिले 94 फीसदी वोट

दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) पर कई बैंकों का मोटा कर्ज बकाया है.
दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) पर कई बैंकों का मोटा कर्ज बकाया है.

डीएचएफएल लिमिटेड (DHFL Limited) ने बताया कि पिरामल समूह (Piramal Group) की कंपनी पिरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (PCHFL) की पेशकश को 94 फीसदी वोट मिले, जबकि अमेरिका की कंपनी ओकट्री कैपिटल की बोली को 45 फीसदी मत ही मिल पाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 17, 2021, 9:12 PM IST
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नई दिल्ली. कर्ज के बोझ से दबी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी डीएचएफएल लिमिटेड (DHFL Limited) ने बताया कि कर्जदाताओं की समिति (COC) ने पिरामल समूह (Piramal Group) की कंपनी पिरामल कैपिटल एंड हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (PCHFL) की पेशकश को मंजूरी दे दी है. डीएचएफएल ने शेयर बाजारों को भेजी जानकारी में कहा है कि सीओसी की 18वीं बैठक 15 जनवरी 2021 को हुई. इस बैठक में पिरामल कैपिटल की बोली को मंजूरी दे दी गई. डीएचएफएल ने कहा कि कर्जदाताओं की समिति ने इंसॉल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड (IBC) की धारा-30(4) के तहत बहुमत से पिरामल कैपिटल की पेशकश को स्वीकार कर लिया.

पिरामल की बोली (Bid of Piramal) को 94 फीसदी वोट मिले, जबकि अमेरिका की कंपनी ओकट्री कैपिटल की बोली को 45 फीसदी मत ही मिल पाए. दिसंबर 2020 में बोली का 5वां और अंतिम दौर पूरा होने के बाद पिरामल व ओकट्री कैपिटल ने अपनी-अपनी पेशकश को सबसे बेहतर बताया था. सूत्रों के अनुसार, बोली लगाने वालों ने 35,000 से 37,000 करोड़ रुपये के दायरे में बोलियां सौंपी हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने नवंबर, 2019 में आवास क्षेत्र को कर्ज उपलब्ध कराने वाली निजी क्षेत्र की दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (DHFL) को दिवाला प्रक्रिया के तहत राष्‍ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के पास भेजा था.

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NCLT के तहत भेजी पहली फाइनेंस कंपनी है DHFL
डीएचएफएल पहली फाइनेंस कंपनी थी, जिसे एनसीएलटी के तहत समाधान के लिए भेजा गया. इसके लिए रिजर्व बैंक ने आईबीसी कानून की धारा-227 के तहत दी गई विशेष शक्ति का इस्तेमाल किया. इससे पहले रिजर्व बैंक ने कंपनी के निदेशक मंडल को हटाकर आर. सुब्रमण्‍य कुमार को प्रशासक नियुक्त किया था. उन्हें ही आईबीसी के तहत समाधान पेशेवर भी बनाया गया. डीएचएफएल पर जुलाई, 2019 की स्थिति के मुताबिक बैंकों, नेशनल हाउसिंग बोर्ड, म्यूचुअल फंड और बॉन्‍डधारकों का 83,873 करोड़ रुपये का बकाया था.

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दीवान हाउसिंग पर इन बैंकों का बकाया है मोटा कर्ज
दीवान हाउसिंग पर सबसे ज्यादा कर्ज एसबीआई सिंगापुर समेत भारतीय स्टेट बैंक (SBI) का कुल 10,083 करोड़ रुपये है. इसके अलावा बैंक ऑफ इंडिया (BOI) का 4,125 करोड़ रुपये, केनरा बैंक (Canara Bank) का 2,681 करोड़ रुपये, एनएचबी (NHB) का 2,434 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक (Union Bank) का 2,378 करोड़ रुपये, सिंडीकेट बैंक (Syndicate Bank) का 2,229 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB) का 2,075 करोड़ रुपये, इंडियन बैंक का 1,552 करोड़ रुपये, सैंट्रल बैंक का 1,389 करोड़ रुपये, आईडीबीआई बैंक का 999 करोड़ रुपये और एचडीएफसी बैंक का 361 करोड़ रुपये का बकाया है.
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