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DICGC फेल हो गए बैंकों की डिपोजिट क्लेम को 30 दिन के अंदर प्रमाणित करेगा

Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (Amendment) Bill, 2021

बुधवार को राज्यसभा में डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (संशोधन) विधेयक, 2021 (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (Amendment) Bill, 2021) पास हुआ. इसके मुताबिक, तनावग्रस्त बैंक के जमाकर्ता 90 दिनों के भीतर 5 लाख रुपये तक निकाल सकेंगे.

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    नई दिल्ली . जमा बीमा और क्रेडिट निगम (Deposit Insurance and Credit Corporation, DICGC) को एक असफल बैंक के जमाकर्ताओं के दावों को प्रमाणित करने के लिए 30 दिनों का समय मिलेगा. यह समय ऋणदाता से बकाया जमा की सूची प्राप्त होने के बाद काउंट होगी.

    बुधवार को राज्यसभा में डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (संशोधन) विधेयक, 2021 (Deposit Insurance and Credit Guarantee Corporation (Amendment) Bill, 2021) पास हुआ. इसके मुताबिक, तनावग्रस्त बैंक के जमाकर्ता 90 दिनों के भीतर 5 लाख रुपये तक निकाल सकेंगे. इसके तहत संकट ग्रस्त बैंक पर लेन-देन की पाबंदी लगने की स्थिति में जमाकर्ता अपनी पांच लाख रुपए तक की राशि निकाल सकेंगे.

    वित्त मंत्री ने राज्य सभा पेश किया बिल 
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (संशोधन) विधेयक 2021 उच्च सदन में चर्चा के लिए पेश किया. विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच विधेयक पर बीजद के डॉ अमर पटनायक, टीआरएस के वी लिंगैया यादव, अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरई ने अपनी बात रखी.

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    हंगामे के बीच ही वित्त मंत्री सीतारमण ने संक्षिप्त चर्चा का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि जमाकर्ताओं की मेहनत की कमाई तक उनकी आसान और समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करने के लिए यह बिल लाया गया है. निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम अधिनियम, 1961 में संशोधन जमाकर्ताओं में अपने धन की सुरक्षा के बारे में विश्वास पैदा करने के लिए किया गया है.

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 जुलाई को संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दी थी

    केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार 28 जुलाई को निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (संशोधन) विधेयक 2021 (डीआईसीजीसी) अधिनियम में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. इसके तहत संकट ग्रस्त बैंक पर लेन-देन की पाबंदी लगने की स्थिति में जमाकर्ता एक समय के अंदर अपनी पांच लाख रुपए तक की राशि निकाल सकेंगे .

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    इसका उद्देश्य किसी संकट के कारण बैंक पर लेन-देन की पाबंदी लगने की स्थिति में उसके जमाकर्ताओं को समय पर सहायता सुनिश्चित करना है. अधिनियम में संशोधन लागू होने के बाद बैंक पर लेन-देन की रोक लगने पर जमाकर्ताओं को 90 दिन के भीतर पांच लाख रुपये तक की अपनी जमा राशि प्राप्त करने का अवसर सुनिश्चित होगा.

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने डीआईसीजीसी अधिनियम, 1961 में संशोधन की घोषणा आम बजट में की थी. इस संशोधन के बाद सभी खाताधारकों की पांच लाख रुपये तक की जमा राशि को बीमा कवर मिलेगा. इसमें मूल राशि और ब्याज दोनों शामिल हैं.

    डीआईसीजीसी, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी है

    डीआईसीजीसी, भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी है, जो बैंक जमा पर बीमा कवर देती है. सीतारमण ने कहा कि डीआईसीजीसी सभी बैंक जमाओं…बचत या मियादी या चालू खाता जमा या आवर्ती जमा का बीमा करती है. इसके तहत सभी वाणिज्यिक बैंक आते हैं. इनमें वे विदेशी बैंक भी शामिल हैं जिनकी भारत में शाखाएं हैं.

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