वो वजह जो साफ करती हैं कि क्यों बजट का वास्तविक आकार ही तय करता है सबकुछ

Union Budget 2019: पिछले साल के मुकाबले सरकार इस बार करीब साढे़ तीन लाख करोड़ रुपए ज्यादा की रकम जुटाएगी

Sudhir Jain | News18Hindi
Updated: July 6, 2019, 11:57 AM IST
वो वजह जो साफ करती हैं कि क्यों बजट का वास्तविक आकार ही तय करता है सबकुछ
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन.
Sudhir Jain
Sudhir Jain | News18Hindi
Updated: July 6, 2019, 11:57 AM IST
बजट को समझना खास किस्म के दिमागदारों का काम होता है. इस बार तो यह काम और ज्यादा जटिल दिख रहा है. वित्तमंत्री का बजट भाषण ज्यादा ही दार्शनिक मिज़ाज का था. सवा दो घंटे के भाषण में उन्होंने ज्यादातर समय पिछले पांच साल में सरकार की उपलब्धियां गिनाने में खर्च किया. हालांकि ये भी बताया कि 2019-20 में सरकार क्या क्या करना चाहती है. लेकिन इतने सारे और इतने बड़े-बड़े काम गिना दिए कि एक नज़र में साफ-साफ समझने में आम लोगों को दिक्कत आएगी कि आखिर सरकार इस साल किस काम को प्राथमिकता दे रही है और उस काम पर कितना पैसा खर्च करने जा रही है. हालांकि ऐसा भी नहीें है कि बजट दस्तावेज में यह न बताया गया हो कि किस मद में कितना खर्च बढ़ाया जाएगा. लेकिन कितना बढ़ा इसका विश्लेषण बजट को गौर से देखने के बाद दो-तीन दिन में ही हो पाएगा. मसलन मनरेगा में पिछले साल 55 हजार करोड़ का प्रावधान था. इस साल पांच हजार करोड़ बढ़ाया जा रहा है. ऐसे ही बहुत से मद हैं जो पहले से बने हुए हैं और हर साल उनमें थोड़ा-बहुत खर्च बढ़ाने का चलन रहा है. बजट का वस्तुनिष्ठ विश्लेषण करते समय देखा यही जाता है कि किस मद में कितना पैसा बढ़ा. अब क्योंकि बजट में ऐसे सौ से ज्यादा मद होते हैं, सो एकसाथ सभी को एकनज़र में देखना मुश्किल होता है. बजट को समझने और उसके विश्लेशण की यही मुश्किल है.

आसान तरीका
आर्थिक मामले के जानकार और मीडिया के लोग अपना काम आसान बनाने के लिए एक तरीका अपनाते हैं. वे देखते हैं कि बजट में सरकार ने राजस्व यानी सरकार की कुल आय को कितना बढ़ाया. कुछ भी करने के लिए सबसे पहले पैसों की जरूरत होती है. जितनी आमदनी होगी, उतना ही खर्च करने की छूट होती है. अलबत्ता विशेष परिस्थितियों में सरकारें आमदनी से ज्यादा खर्च कर लेती हैं. और इस घाटे को आगे के साल के लिए छोड़ देती हैं. फिर भी बजट में ये साफ-साफ बताना पड़ता है कितने घाटे का बजट पेश किया जा रहा है और यह घाटा देश की जीडीपी का कितना फीसद है. मसलन पिछले साल के बजट में बताया गया था कि सरकार सभी जरियों से 24 लाख 42 हजार 213 करोड़ रुपए की आमदनी का इंतजाम करेगी. उसी हिसाब से उसने खर्च का अनुमान लगाया था.

इस साल क्या हुआ?

इस साल के बजट में 27 लाख 86 हजार 349 लाख करोड़ जुटाए जा पा रहे हैं. जिन जगहों से यह रकम आएगी, उनमें डीजल-पेट्रोल पर एक रुपया टैक्स भी एक वजह है. इसके अलावा, ज्यादा आमदनी वालों से अतिरिक्त टैक्स लेकर, सरकारी कंपनियों को बेचकर जिसे तकनीकी भाषा में विनिवेश कहा जाता है, और ऐसे ही दूसरे तरीकों से पिछले बार की तुलना में साढे़ तीन लाख करोड़ की ज्यादा रकम जुटाने का ही अनुमान लगाया गया है. यानी पिछले साल से 12 फीसद ज्यादा. जाहिर है, इन्हीं साढ़े तीन लाख करोड़ के हिसाब से ही खर्च बढ़ाने की गुंजाइश बनती है. इस साल के बजट में बढ़ी रकम से किसानों की आमदनी दुगनी करने का काम इस साल तेज रफ्तार पकड़ लेगा और बेरोज़गारी दूर करने की कोई बड़ी योजना शुरू हो जाएगी, ऐसी उम्मीद रखना सरकार के साथ एक ज्यादती ही होगी. फिर भी सरकार ने अपने हुनर लगाकर कुछ बड़े काम पूरा करने का एक तरीका सामने रखा है.

सारी उम्मीदें निजी क्षेत्र से
वि़त्तमंत्री के शुरुआती भाषण से पता चलता है कि सरकार ने ज्यादातर कामों को निपटाने के लिए निजी क्षेत्र से निवेश की उम्मीद लगाई है. एक संकेत आधारभूत ढांचे के लिए पांच साल में 100 लाख करोड़ रुपए का निवेश निजी क्षेत्र की भागीदारी से करने का इशारा है. पांच साल में सौ लाख करोड़ के निवेश का मतलब है हर साल 20 लाख करोड़ अतिरिक्त जुटाना. इसमें कितना निजी निवेश होगा और कितने करोड़ की सरकारी भागीदारी होगी, इसका अभी पता नहीं है. एक कमेटी बनेगी, वह सोच विचार करेगी. बारह साल में रेल परियोजनाओं में पचास लाख करोड़ का निवेश भी निजी क्षेत्र के सहारे करने का इरादा दिखता है. सरकार ने किसानों के लिए निजी निवेश की चाहत पहले से जता रखी है. कुल मिलाकर इस बजट में सरकार ने अपने जुटाए संसाधनों से निवेश का साफ-साफ खुलासा नहीं किया है. सरकार यह खुलासा कर भी नहीं सकती थी, क्योंकि बजट में इन भारी भरकम खर्चों का खुलासा तभी संभव है जब यह बताया जाए कि सरकार वह राजस्व जुटा कहां से रही है. यानी किसी बजट में राजस्व का पर्याप्त आकार का बढ़ना ही उसे तारीफ दिला सकता है. यह चुनौती सरकार के सामने है. देखना होगा कि इसे कैसे पूरा किया जाता है.
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First published: July 6, 2019, 10:00 AM IST
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