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EPF और PPF में क्या है अंतर ? जानिए कहां मिलता है बेहतर रिटर्न

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन

ईपीएफ (EPF) किसी जॉब करने वाले व्यक्ति के सैलरी से एक अनिवार्य योगदान है. जबकि पीपीएफ (PPF) में इन्वेस्टमेंट कोई भी सामान्य भारतीय नागरिक (वेतनभोगी या गैर-वेतनभोगी) कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2021, 4:16 PM IST
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नई दिल्ली. कर्मचारी भविष्य निधि (Employees’ Provident Fund) और सार्वजनिक भविष्य निधि (Public Provident Fund) दो प्रकार की रिटायरमेंट सेविंग स्कीम हैं. ईपीएफ (EPF) रिटायरमेंट फंड बॉडी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (Employees' Provident Fund Organisation) ​द्वारा पेश किया जाता है, जबकि पीपीएफ (PPF) बैंकों और डाकघरों द्वारा पेश किया जाता है.

सैलरी से एक अनिवार्य योगदान है ईपीएफ
ईपीएफ किसी जॉब करने वाले व्यक्ति के सैलरी से एक अनिवार्य योगदान है. वैसी कोई भी कंपनी जिनके यहां 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं, उन्हें कर्मचारी का ईपीएफ काटना होता है. जबकि पीपीएफ में इन्वेस्टमेंट कोई भी सामान्य भारतीय नागरिक (वेतनभोगी या गैर-वेतनभोगी) कर सकता है. हालांकि, पीपीएफ को हिंदू अविभाजित परिवारों (Hindu Undivided Family) द्वारा नहीं खोला जा सकता है.

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EPF और PPF में योगदान


एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड सैलरी पाने वाले कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक फायदा देने वाली स्कीम है. ईपीएफ में हर महीने कर्मचारी की बेसिक सैलरी से 12 फीसदी पैसा काटकर ईपीएफ अकाउंट डाल दिया जाता है. कंपनी भी 12 फीसदी पैसा उस कर्मचारी के ईपीएफ अकाउंट में डालती है. पीपीएफ में न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की राशि प्रति साल जमा किया जा सकता है.

साथ ही पीपीएफ अकाउंटहोल्डर को इनकम टैक्स एक्ट (Income Tax Act) के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट का भी लाभ मिलता है. मैच्योरिटी पीरियड की बात करें तो पीपीएफ की अवधि 15 साल की है, लेकिन आप इसको बढ़वा भी सकते हैं. एक बार आवेदन करने पर आप इसको 5 साल के लिए बढ़ा सकते हैं.

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EPF और PPF की ब्याज दरें
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ईपीएफ जमा पर 8.5 फीसदी की ब्याज दर प्रदान करता है. यह ब्याज वित्त वर्ष 2019-20 के लिए है. हाल ही में सरकार ने कहा था कि पीपीएफ सहित छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें जनवरी-मार्च तिमाही में अपरिवर्तित रहेंगी. इस तरह पीपीएफ के लिए वार्षिक ब्याज दरें 7.1 फीसदी बनी रहेगी.
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