बिना डॉक्युमेंट के झटपट लोन के झांसे से सावधान, मौत के कुएं में ढकेल रहे मोबाइल ऐप के जरिए लोन देने वाले!

6. म्यूचुअल फंड निवेश के लिए बदले नियम
SEBI ने मल्टीकैप म्यूचुअल फंड के लिए असेट अलोकेशन के नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के मुताबिक अब फंड्स का 75 फीसदी हिस्सा इक्विटी में निवेश करना जरूरी होगा, जो कि अभी न्यूनतम 65 फीसदी है. SEBI के नए नियमों के मुताबिक मल्टी कैप फंड्स के स्ट्रक्चर में बदलाव होगा.

6. म्यूचुअल फंड निवेश के लिए बदले नियम SEBI ने मल्टीकैप म्यूचुअल फंड के लिए असेट अलोकेशन के नियमों में बदलाव किया है. नए नियमों के मुताबिक अब फंड्स का 75 फीसदी हिस्सा इक्विटी में निवेश करना जरूरी होगा, जो कि अभी न्यूनतम 65 फीसदी है. SEBI के नए नियमों के मुताबिक मल्टी कैप फंड्स के स्ट्रक्चर में बदलाव होगा.

डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स/मोबाइल ऐप्स के जरिए लोगों को बिना किसी डॉक्युमेंट झटपट लोन देने के नाम पर परेशान किए जाने के कई मामले सामने आए हैं. ये प्लेटफॉर्म/ऐप्स लोन​ डिफॉल्ट होने के बाद परिवार और दोस्तों को भी कॉल करते हैं. छोटी अवधि के लिए इस तरह के लोन पर 100 फीसदी तक ब्याज वसूला जाता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 24, 2020, 9:32 AM IST
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चेन्नई में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले राजीव उस वक्त चौंक गए, जब उन्हें उनके परिवार और दोस्तों से लोन डिफॉल्ट को लेकर कॉल के बारे में जानकारी मिली. राजीव ने एक डिजिटल लेंडिंग ऐप के जरिए 50,000 रुपये का लोन लिया था ताकि वो अपनी बाइक खरीद सकें. तय समय तक उन्होंने पूरा पैसा नहीं चुकाया था. लेकिन, राजीव को पता चला कि इस ऐप कंपनी ने उनके कॉन्टैक्ट डिटेल्स को ट्रैक कर इस डिफॉल्ट के बारे में परिवार और दोस्तों से संपर्क किया है. हालांकि, दो दिन बाद उन्होंने इस लोन को चुका दिया. बीते कुछ समय में कई ऐसे मामले सामने आए हैं. कुछ मामलों में तो इन ऐप्स के जरिए लोन लेने वाले लोगों को बहुत परेशान होना पड़ा है.

पिछले सप्ताह ही हैदराबाद में रहने वाली एक सरकारी कर्मचारी महिला ने भी इसीलिए आत्महत्या कर ली, क्योंकि लोन एजेंसी ने उनके परिवार को और दोस्तों से लोन डिफॉल्ट को लेकर अपमानित किया. टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने हैदराबाद में ऐसे ही गैर-कानूनी ऐप के बारे में पता किया है, जिसे जकार्ता से चलाया जा रहा था.

नहीं है रेगुलेटर्स का डर
तकनीक का फायदा उठाकर ये ऐप कंपनियां लोगों को अपना शिकार बना रही हैं. इन कंपनियों की जाल में सबसे ज्यादा युवाओं को फंसाया जा रहा है, जो अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए इन ऐप्स का सहारा ले रहे हैं. चिंता की बात यह है कि भारत में डिजिटल लेंडर्स के लिए कोई रेगुलेशन नहीं है.
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चीनी ऐप चुरा रहे व्यक्तिगत डेटा
मनीकंट्रोल ने अपनी एक रिपोर्ट में जानकारों के हवाले से लिखा है कि फिलहाल डिजिटल लेंडिंग ऐप्स को ​नियंत्रित करने के लिए कोई रेगुलेशन नहीं है. इन ऐप्स के जरिए यह भी नहीं पता चलता है कि उनका स्ट्रक्चर क्या है. इंडस्ट्री से जुड़े अन्य लोगों का कहना है कि डिजिटल लेंडिंग स्पेस में कई चीनी ऐप एक्टिव हैं, जो लोन लेने वालों के व्यक्तिगत डेटा के सहारे उन्हें प्रताड़ित करते हैं.

किस तरह से काम करते हैं ये गैर-कानूनी फाइनेंशियल ऐप्स?
ये ईकाईयां कई तरीकों से पैसे जुटाती हैं. इनमें अधिकतर पैसे व्यक्तिगत तौर पर जुटाए गए होते हैं. ​इन्हीं पैसों को 7 से 15 दिनों के लिए अत्यधिक ब्याज पर लोगों को लोन के रूप में बांटा जाता है. इन ऐप्स के जरिए लोन की रकम औसतन 3,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये के बीच होती है. इनपर लगाए जाने वाला ब्याज दर 60 से 100 फीसदी तक होता है. आमतौर पर रेगुलर माइक्रोफाइनेंसिंग के लिए ब्याज दर 22 से 25 फीसदी के बीच होता है. बैंक लोन तो 7 से 12 फीसदी के बीच होता है.

कैसे लोगों को अपना शिकार बनाते हैं ये ऐप्स?
ये ऐप्स लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाते हैं, जैसे - पब्लिक प्लेस में विज्ञापन देना, बल्क में ईमेल व मैसेज करना आदि. लोगों को बिना किसी डॉक्युमेंट के ही झटपट पैसे देने का लालच दिया जाता है. वहीं, दूसरी जगह लोन लेने से पहले पहले डॉक्युमेंट और केवाईसी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है. लेकिन, इन ऐप को डाउनलोड करने और लोन के लिए अप्लाई करने के कुछ मिनट में ही पैसे मिल जाते हैं.

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ये ऐप किसी इनकम संबंधी कोई जानकारी नहीं जुटाते हैं. दोनों पक्षों में बस इस बात की सहमति होती है कि कुछ सप्ताह में ब्याज के साथ इस रकम को चुका दिया जाएगा. हालांंकि, लोन डिफॉल्ट होने के बाद यह कहानी बिल्कुल बदल जाती है. ​लोन डिफॉल्ट होते ही इस ऐप के प्रतिनिधि डिफॉल्टर को कॉल करना शुरू करता है. इसके बाद वो कस्टमर के फोन लिस्ट से उनके परिवार और दोस्तों समेत अन्य लोगों से भी संपर्क करते हैं.

एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि इसी साल नवंबर में गूगल ने अपने प्लेस्टोर से 5 ऐसे ही ऐप को हटाया है. इन ऐप्स का नाम OK Cash, Go Cash, Flip Cash, E Cash और SnapItLoan है.

कैसे पता करें कि आप सही ऐप से उधार ले रहे हैं कि नहीं?
इस तरह के ऐप के जरिए लोन से पहले यह जांच लें कि केवाईसी नियमों का पालन किया जाता है या नहीं? क्या दोनों पक्षों के बीच लोन अग्रीमेंट है या नहीं? छोटी अवधि के लिए भी बिना किसी डॉक्युमेंट के लोन लेने से पहले सतर्क रहें.

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23 दिसंबर को ही आरबीआई ने इस तरह के डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स और मोबाइल ऐप्स को लेकर चेतावनी जारी की है. आरबीआई ने कहा कि कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें व्यक्तिगत स्तर पर या छोटे कारोबारियों को अनाधिकृत डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स/मोबाइल ऐप्स के जरिए झटपट लोन देने का झांसा दिया जा रहा है. ऐसे में आम लोगों से अपील की जाती है कि वो इस तरह के झांसे में न आएं. साथ ही यह भी ध्यान रखना है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को केवाईसी डॉक्युमेंट्स के बारे में कोई जानकारी नहीं देनी चाहिए. इस तरह की किसी भी गड़बड़ी को तुरंत रिपोर्ट किया जाना चाहिए.

वर्तमान में डिजिटल लेंडिंग को रोकने के लिए आरबीआई ने कोई ठोस रेगुलेशन नहीं बनाया है. लेकिन इस तरह के ऐप्स के जरिए फ्रॉड के मामले सामने आने के बाद अब आरबीआई भी सतर्क हो गया है. इसी साल 24 जून को आरबीआई ने बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों को कहा है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उधार देने के लिए नियमों का पालन करें.
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