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अब रेस्टोरेंट में खाना होगा महंगा! इस वजह से बढ़ सकते हैं दाम

अब रेस्टोरेंट में खाना होगा महंगा! इस वजह से बढ़ सकते हैं दाम

रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने कहा-अगले 10 दिन में होगा कीमतें बढ़ाने पर फैसला

रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने कहा-अगले 10 दिन में होगा कीमतें बढ़ाने पर फैसला

इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (AHAR) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्याज की बढ़ती कीमतों (Onion Prices) के चलते रेस्टोरेंट कई डिशेज के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं.

    नई दिल्ली. नए साल से पहले रेस्टोरेंट में खाना महंगा हो सकता है. इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन (Indian Hotel and Restaurant Association-AHAR) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि प्याज की बढ़ती कीमतों (Onion Price Hike) के चलते रेस्टोरेंट कई डिशेज के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं. हालांकि अब प्याज की कीमतें 100 रुपये प्रति किलोग्राम के नीचे आ गई हैं. आपको बता दें कि प्याज के उत्पादन में गिरावट के बीच देश के प्रमुख शहरों में प्याज का औसत भाव एक साल में पांच गुना बढ़कर 101.35 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया है. खरीफ और खरीफ में देर से बोए जाने वाले प्याज के उत्पादन में 22 फीसदी गिरावट का अनुमान है. सरकार ने शुक्रवार को राज्यसभा को यह जानकारी दी.

    81 फीसदी बढ़ें प्याज के दाम- एक महीने में प्याज पिछले एक महीने में प्याज का बाजार 81 फीसदी चढ़ गया है. राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में खाद्य और उपभोक्ता मामलों के राज्य मंत्री दानवे रावसाहेब दादाराव ने बताया कि प्याज का अखिल भारतीय दैनिक औसत खुदरा मूल्य एक महीने पहले 55.95 रुपये प्रति किलो और एक साल पहले 19.69 रुपये प्रति किलो था. यह मंगलवार (10 दिसंबर) को 101.35 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया था.

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    रेस्टोरेंट में खाना होगा महंगा- एचएआर के प्रेसीडेंट संतोष शेट्टी ने पीटीआई को बताया है कि मुंबई में प्याज की कीमतें 30 फीसदी तक गिर चुकी हैं, लेकिन अगले 10 दिन और प्याज के दामों पर नज़र रखेंगे. उसके बाद प्याज से बनी डिशेज की कीमतों को बढ़ाने पर फैसला लेंगे. आपको बता दें कि इंडियन होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन में मुंबई के 8000 छोटे और बड़े रेस्टोरेंट शामिल है.

     क्यों महंगी हुई प्याज- कृषि मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2017 और वर्ष 2018 में प्याज का भंडारण क्रमश 48.73 लाख टन और 50.05 लाख टन था. वर्ष 2019-20 के दौरान, मानसून के देर से आगमन के कारण खरीफ प्याज के बोए गए रकबे में गिरावट के साथ-साथ बुवाई में तीन-चार सप्ताह की देरी हुई.

    >> इसके अलावा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में कटाई के समय सितंबर/ अक्टूबर में बेमौसम लंबे समय तक हुई बरसात की वजह से प्याज की खड़ी फसल को नुकसान पहुंचा.

    >> इस सब ने खरीफ फसल के उत्पादन और गुणवत्ता पर प्रतिकूल प्रभाव डाला. सितंबर और अक्टूबर माह के दौरान हुई बारिश ने इन क्षेत्रों से उपभोक्ता क्षेत्रों तक फसल ले जाने के काम को भी प्रभावित किया. इसकी वजह से बाजार में खरीफ प्याज की उपलब्धता सीमित रह गई और इसका कीमतों पर दबाव बन गया.

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    Tags: Business news in hindi, Onion Price

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