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इस सरकारी कंपनी में 100% हिस्सा बेचने की प्रक्रिया तेज, 24 जनवरी तक मंगाई बोली

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Updated: January 16, 2020, 4:13 PM IST

विनिवेश विभाग ने निलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (Neelachal Ispat Nigam Limited) के लिए एडवाइजर (Advisor) और एसेट वैल्युअर (Asset valuer) नियुक्त करने के लिए 24 जनवरी तक बोली मंगाई है. बता दें कि पिछले हफ्ते बुधवार को कैबिनेट ने कंपनी को बेचने की मंजूरी दी थी.

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  • Last Updated: January 16, 2020, 4:13 PM IST
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नई दिल्ली. निलाचल इस्पात निगम लिमिटेड में पूरी 100% हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया में तेजी आ गई है. विनिवेश विभाग ने कंपनी के लिए एडवाइजर (Advisor) और एसेट वैल्युअर (Asset valuer) नियुक्त करने के लिए 24 जनवरी तक बोली मंगाई है. बता दें कि पिछले हफ्ते बुधवार को कैबिनेट ने निलाचल इस्पात निगम लिमिटेड (Neelachal Ispat Nigam Limited) को बेचने की मंजूरी दी थी.

24 जनवरी तक मंगाई बोली
निलाचल इस्पात निगम लिमिटेड की बिक्री के लिए विनिवेश विभाग ने एडवाइजर और एसेट वैल्युअर नियुक्त करने के लिए 24 जनवरी दोपहर 1 बजे तक बोली मंगाई है. 1 बजे तक बोली आने के ठीक 2 घंटे बाद टेक्निकल बिड खोली जाएगी. बोली लगाने वालों के सामने ही टेक्निकल बिड खोली जाएगी. फिर वहीं पर तय किया जाएगा कि कौन एडवाइजर और कौन एसेट वैल्युअर होंगे.

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NINL किस कंपनी की कितनी हिस्सेदारी
निलाचल इस्पात निगम में एमएमटीसी, एनएमडीसी, मेकॉन, भारत हैवी इलेक्ट्रकल्स लिमिटेड (भेल) और ओडिशा सरकार की दो कंपनियों इंडस्ट्रियल प्रमोशन एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ऑफ ओडिशा (आईपीआईसीओएल) और ओडिशा माइनिंग कॉरपोरेशन (ओएमसी) की हिस्सेदारी है. कंपनी में एमएमटीसी की हिस्सेदारी 49.78 फीसदी, एनएमडीसी की 10.10 फीसदी, मेकॉन की 0.68 फीसदी, भारत हैवी इलेक्ट्रकल्स लिमिटेड (भेल) की 0.68 फीसदी आईपीआईसीओएल की 12 फीसदी और ओएमसी की हिस्सेदारी 20.47फीसदी है. रणनीतिक खरीदार का चयन दो चरणों वाली नीलामी प्रक्रिया से किया जाएगा.

क्या होता है रणनीतिक विनिवेशरणनीतिक विनिवेश के तहत सरकार किसी कंपनी में अपनी बहुमत हिस्सेदारी बेचती है. इसके बाद कंपनी का प्रबंधन भी सरकार खरीदार का सौंप देती है. इसका सीधा मतलब यह माना जा सकता है कि सरकारी कंपनी रणनीतिक विनिवेश के बाद एक निजी कंपनी हो जाती है.

(लक्ष्मण रॉय, इकोनॉमिक पॉलिसी एडिटर- CNBC आवाज़)

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First published: January 16, 2020, 4:10 PM IST
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