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ये है सरकार की सबसे बड़ी स्कीम, इसके जरिए ही आपके खाते में भेजे जाती है रकम

केंद्र सरकार कई योजनाओं का लाभ डीबीटी के जरिए देती है.
केंद्र सरकार कई योजनाओं का लाभ डीबीटी के जरिए देती है.

केंद्र सरकार कई तरह के योजनाओं के तहत लाभार्थियों के खाते में कैश ट्रांसफर (Cash Transfer) करती है. हाल ही में ऐलान किए गए राहत पैकेज में सरकार ने डायरेक्ट ट्रांसफर बेनिफिट (DBT) के जरिए ही लाभार्थियों के खाते में कैश ट्रांसफर किया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 17, 2020, 8:50 AM IST
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नई दिल्ली. देशभर में पहले चरण के लॉकडाउन (Lockdown) के तुरंत बाद ही केंद्र सरकार ने 1.7 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज (Stimulus Package) का ऐलान किया था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (FM Nirmala Sitharaman) ने इस राहत पैकेज में गरीब, मजदूर, वरिष्ठ नागरिकों, विकलांग, विधवाओं समेत जरूरतमंद लोगों के लिए कई बड़े ऐलान किया. इस राहत पैकेज में वित्त मंत्री ने कुछ ऐसे ऐलान किए, जिसका लाभ डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (Direct Benefit Transfer) के जरिया दिया जा रहा है. इसके पहले भी केंद्र सरकार ने ऐसे लाभार्थियों को कई योजनाओं का लाभ डीबीटी के जरिए ही देती आ रही है. ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि आखिर ये डीबीटी क्या है और इसके जरिए कैसे आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है?

क्या होता है डीबीटी?
वर्तमान में केंद्र सरकार कई योजनाओं के तहत सब्सिडी देती है. यह सब्सिडी लाभार्थियों (Beneficiaries) तक या तो उनके खाते में सीधे ट्रांसफर कर दिया जाता है या फिर उस स्कीम के तहत दिए जाने वाले प्रोडक्ट या सर्विस की कीमत बाजार भाव से कम होती है. इस दूसरे विकल्प के तहत केंद्र सरकार लाभार्थियों के हाथ में पैसे न देकर उनकी तरफ से उस एजेंसी या संस्था को पैसे ट्रांसफर करती है जो प्रोडक्ट या सर्विस इन लाभार्थियों तक कम कीमत में पहुंचा रहे हैं. जब किसी भी योजना के तहत केंद्र सरकार सीधे तौर पर लाभार्थियों के खाते में पैसे ट्रांसफर करती है तो उसे ही 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' कहा जाता है.

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डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से क्या फायदा है?


DBT का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें किसी तरह के फ्रॉड की कोई गुंजाईश नहीं रहती है. जब लाभार्थी के खाते में सरकार सीधे तौर पर पैसे ट्रांसफर करती है तो इसमें बिचौलियों की कोई भूमिका नहीं रहती है. इस प्रकार सरकारी योजना का पूरा फायदा लाभा​र्थी को मिल जाता है.

इसके लिए लाभा​र्थी के आधार नंबर की भी जरूरत होती है ताकि सरकार यह सुनिश्चित कर सके कि सही लाभार्थी के पास ही लाभ मिल रहा है या नहीं. चूंकि, आधार भारत में एक तरह की यूनिवर्सल ID, ऐसे में सरकार को वास्तविक लाभार्थी की पहचान करने में आसानी होती है.

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कैसे काम करता है DBT?
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के अंतर्गत कई तरह की प्रक्रिया होती है, जिसे केंद्र सरकार अपने स्तर पर मैनेज करती है. DBT के तहत योजना का लाभ देने से पहले पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) रजिट्रेशन की प्रक्रिया पूरी की जाती है. इसके बाद लाभार्थियों का डेटाबास तैयार किया जाता है. इस डेटाबेस को तैयार करते समय में लाभार्थियों की डिटेल्स को बेहद सटीकता से ​वेरिफाई किया जाता है. डीबीटी तहत कोई भी पेमेंट करते समय फीडबैक लूप का इस्तेमाल किया जाता है.

DBT के तहत लाभार्थी के खाते में कई तरह से पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं. सरकार के ट्रेजरी अकांउट से या सरकार द्वारा नियुक्त किए गए किसी एजेंसी के जरिये लाभार्थी के खाते में यह पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं. उदाहरण के तौर पर नेशनल सोशल असिस्टेंस प्रोग्राम है, जिसके तहत लाभार्थियों के खाते में पैसे ट्रांसफर किए जाते है.

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