धार्मिक और शिक्षा संस्थाओं के लिए कम हो सकती है टैक्स छूट! जानिए क्या है मामला

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Updated: September 4, 2019, 6:08 PM IST

देश में ट्रस्ट के तौर पर चलने वाले धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों (Education Insitute) को मिलने वाली टैक्स छूट (Tax Rebate) को कम किया जा सकता है.

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देश में ट्रस्ट के तौर पर चलने वाले धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों (Education Insitute) को मिलने वाली टैक्स छूट (Tax Rebate) को कम किया जा सकता है. CNBC आवाज को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक डायरेक्ट टैक्स कोड (Direct Tax Code) पर टास्कफोर्स की रिपोर्ट में ऐसे संस्थाओं पर नकेल कसने की सिफारिश की गई है जो टैक्स छूट का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं. आपको बता दें कि डायरेक्ट टैक्स कोड (DTC) पर बनी समिति ने इससे पहले पर्सनल इनकम टैक्स (Income Tax) की दरों में भी बदलाव का भी सुझाव दिया है ताकि टैक्स चोरी (Tax Evasion) में कमी लाई जा सके. पर्सनल इनकम टैक्स की दरों के मामले में समिति ने 5, 10 और 20 फीसदी के तीन स्लैब की सिफारिश की है, जबकि अभी 5, 20 और 30 प्रतिशत की दर से इनकम टैक्स वसूला जाता है.

धार्मिक और शिक्षा संस्थाओं पर हो सकती है इनकम टैक्स की सख्ती

>>  डायरेक्ट टैक्स पर बनी समिति ने कहा है कि ट्रस्ट के माध्यम से चलने वाले संस्थाएं टैक्स छूट का दुरुपयोग कर रहे हैं.
>> डायरेक्ट टैक्स कोड पर टास्कफोर्स की रिपोर्ट में टैक्स छूट कम करने की सिफारिश की है.

>> टैक्स छूट की आड़ में कालेधन जमा करने वाले ट्रस्ट पर नकेल की सिफारिश की है.
>> आयकर के मौजूदा नियम के मुताबिक डोनेशन पर टैक्स छूट मिले.


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>> डोनेशन की रकम के 15 फीसदी पर सीधे सीधे टैक्स छूट है.
>> बाकी 85 फ़ीसदी को 5 साल के भीतर खर्च करने पर टैक्स छूट मिलती है.
>> टास्कफोर्स ने 15 फीसदी पर सीधे टैक्स छूट देने के नियम को हटाने की सिफारिश की है.
>> 15% रकम को भी समय सीमा के भीतर खर्च करने की सिफारिश की है.
>> डोनेशन के उद्देश्य और समय के मुताबिक नहीं खर्च करने पर 30% टैक्स देना होगा.

आम आदमी को मिली सकती है बड़ी राहत
सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय को डायरेक्ट टैक्स कोड पर सौंपी अपनी रिपोर्ट में टास्क फोर्स ने सरकार द्वारा 5 लाख रुपये तक की टैक्सेबल इनकम पर टैक्स छूट नीति को बहुत अच्छा कदम बताया है. मौजूदा समय में जो हालात हैं उसके हिसाब से बेहतर होगा कि टैक्सेबल इनकम पर छूट को 6 लाख रुपये कर दिया जाए.

इसका मतलब है कि अगर किसी की आमदनी 8 या 10 लाख है. अगर वह इनकम टैक्स निवेश छूट के तहत निवेश करता है और उसकी टैक्सेबल इनकम 6 लाख रुपये आ जाती है. यानी 6 लाख रुपये पर इनकम टैक्स देय होता है तो उसे कोई टैक्स नहीं देना होगा.यह टैक्सेबल इनकम 6 लाख रुपये से ज्यादा की बनती है तो फिर तय टैक्स स्लैब के तहत इनकम टैक्स देना होगा. टास्क फोर्स का मानना है कि सरकार को इनकम टैक्स कलेक्शन बढ़ाने के साथ निवेश भी बढ़ाने की जरूरत है.
आलोक प्रियदर्शी, संवाददाता, CNBC आवाज़

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First published: September 4, 2019, 5:19 PM IST
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