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Discoms पर Gencos का बकाया 1.13 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, सालाना आधार पर 1.3% का इजाफा

Discoms पर Gencos का बकाया 1.13 लाख करोड़ रुपये पहुंचा, सालाना आधार पर 1.3% का इजाफा

साल 2020 के मुकाबले डिस्कॉम पर बकाया बढ़ा

साल 2020 के मुकाबले डिस्कॉम पर बकाया बढ़ा

बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम (Discoms) पर बिजली उत्पादक कंपनियों यानी जेनको (Gencos) का बकाया दिसंबर में एक साल पहले की तुलना में 1.3 फीसदी बढ़कर 1,13,227 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. दिसंबर, 2020 तक डिस्कॉम पर जेनको का बकाया 1,11,762 करोड़ रुपये था.

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    नई दिल्ली. बिजली वितरण कंपनियों यानी डिस्कॉम (Discoms) पर बिजली उत्पादक कंपनियों यानी जेनको (Gencos) का बकाया दिसंबर में एक साल पहले की तुलना में 1.3 फीसदी बढ़कर 1,13,227 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. दिसंबर, 2020 तक डिस्कॉम पर जेनको का बकाया 1,11,762 करोड़ रुपये था.

    पेमेंट रैटिफिकेशन एंड एनालिसिस इन पावर प्रोक्यूरमेंट फॉर ब्रिंगिंग ट्रांसपैरेंसी इन इन्वॉयसिंग ऑफ जेनरेशन (PRAAPTI) पोर्टल से यह जानकारी मिली है. दिसंबर, 2021 में डिस्कॉम पर कुल बकाया पिछले महीने की तुलना में भी बढ़ा है. नवंबर में यह 1,13,081 करोड़ रुपये पर था.

    डिस्कॉम को पेमेंट के लिए मिलता है 45 दिनों का समय
    बिजली उत्पादकों तथा डिस्कॉम के बीच बिजली खरीद लेनदेन में पारदर्शिता लाने के लिए प्राप्ति पोर्टल मई, 2018 में शुरू किया गया था. दिसंबर, 2021 तक 45 दिन की ग्रेस पीरियड के बाद भी डिस्कॉम पर कुल बकाया राशि 1,01,436 करोड़ रुपये थी. यह एक साल पहले समान महीने में 98,334 करोड़ रुपये थी. पोर्टल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, नवंबर में डिस्कॉम पर कुल बकाया 1,00,417 करोड़ रुपये था.

    बिजली उत्पादक कंपनियां डिस्कॉम को बेची गई बिजली के बिल का भुगतान करने के लिए 45 दिन का समय देती हैं. उसके बाद यह राशि पुराने बकाये में आ जाती है. ज्यादातर ऐसे मामलों में बिजली उत्पादक दंडात्मक ब्याज (Penal Interest) वसूलते हैं. बिजली उत्पादक कंपनियों को राहत के लिए केंद्र ने एक अगस्त, 2019 से भुगतान सुरक्षा प्रणाली (Payment Security Mechanism) लागू है. इस व्यवस्था के तहत डिस्कॉम को बिजली आपूर्ति पाने के लिए साख पत्र (Letters of Credit) देना होता है.

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    केंद्र सरकार ने बिजली वितरण कंपनियों को भी कोविड-19 महामारी की वजह से कुछ राहत दी है. भुगतान में देरी के लिए डिस्कॉम पर दंडात्मक शुल्क को माफ कर दिया गया है. सरकार ने मई, 2020 में डिस्कॉम के लिए 90,000 करोड़ रुपये की नकदी डालने की योजना पेश की थी. इसके तहत बिजली वितरण कंपनियां पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और आरईसी (REC) लिमिटेड से सस्ता कर्ज ले सकती हैं. बाद में सरकार ने इस पैकेज को बढ़ाकर 1.2 लाख करोड़ रुपये और उसके बाद 1.35 लाख करोड़ रुपये कर दिया.

    इन राज्यों की कंपनियों के पास सबसे ज्यादा बकाया
    आंकड़ों से पता चलता है कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड और तमिलनाडु की बिजली वितरण कंपनियों का उत्पादक कंपनियों के बकाए में सबसे अधिक हिस्सा है.

    Discoms पर कुल बकाया था 1,01,436 करोड़ रुपये
    भुगतान की मियाद समाप्त होने के बाद दिसंबर, 2021 तक डिस्कॉम पर कुल बकाया 1,01,436 करोड़ रुपये था। इसमें स्वतंत्र बिजली उत्पादकों का हिस्सा 51.18 फीसदी है. वहीं, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम की जेनको का बकाया 23.95 फीसदी है.

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    सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों में अकेले एनटीपीसी को ही डिस्कॉम से 4,344.75 करोड़ रुपये वसूलने हैं। एनएलसी इंडिया का बकाया 2,772.47 करोड़ रुपये है. निजी बिजली उत्पादक कंपनियों में अडाणी पावर का बकाया 25,141.73 करोड़ रुपये, बजाज समूह की ललितपुर पावर जेनरेशन कंपनी का 4,503.45 करोड़ रुपये है. वहीं सौर और पवन ऊर्जा कंपनियों का बकाया 20,318.79 करोड़ रुपये है.

    Tags: Electricity

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